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उदयपुर के जलाशयों में अब सिर्फ 33 प्रतिशत पानी, बढ़ सकता है जलसंकट

प्रदेश के संभाग में मध्यम श्रेणी के कुल 22 जलाशय हैं. जिनकी भराव क्षमता 612.83 एमसीयूएम है लेकिन इनमें पानी की उपलब्धता महज 30.42 एमसीयूएम है. 

उदयपुर के जलाशयों में अब सिर्फ 33 प्रतिशत पानी, बढ़ सकता है जलसंकट
संभाग के कई छोटे जलाशय पूरी तरह सुखे हुए है.

अविनाश जगनावत/उदयपुर: आदिवासी अंचल मेवाड़-वागड़ संभाग में छोटे और बडे जलाशयों की कुल संख्या 266 है. इनकी संख्या को देखते हुए लगता है कि इस संभाग में कभी भी पानी की कमी नहीं हो सकती है. लेकिन ताजा आंकडों की बात करे तो इन जलाशयों में अभी महज 33 प्रतिशत ही पानी बचा हुआ है. संभाग के कई छोटे जलाशय पूरी तरह सुखे हुए है. 

प्रदेश के संभाग में मध्यम श्रेणी के कुल 22 जलाशय है जिनकी भराव क्षमता 612.83 एमसीयूएम है लेकिन इनमें पानी की उपलब्धता महज 30.42 एमसीयूएम है. जो कुल क्षमता का महज 4.96 प्रतिशत ही है. जबकि संभाग में छोटे तालाबों की संख्या 238 है, इन तालाबों की भराव क्षमता 904.88 एमसीयूएम है, लेकिन वर्तमान में इन में महज 198.31 एमसीयूएम पानी है जो कुल क्षमता का 21.92 प्रतिशत है. 

हालांकि कि इस बार संभाग भर में गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष प्री मानसुन और मानसून की बारिश का आगाज अच्छा हुआ है. जिसके चलते कैचमेंट एरिया से कुछ जलाशयों में पानी की आवक भी हुई है जो शुभ संकते की ओर इशारा करती है. अभी भी कई तालाब एसे है जिनके कैचमेंट एरिया में कम बारिश हुई है. जो चिंता का विषय है. 

जलाशयों में गिरते जल स्तर को लेकर जल संसाधन विभाग सहीत अन्य विभागों की ओर से भी लोगों में जागरूकता के अभियान चलाए जाते है. विभाग के अधिकारियों की माने तो कृषि कार्यो के लिए जो पानी सप्लाई किया जाता है उसका अप व्यय कम से कम हो इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है. साथ ही कृषि विभाग के साथ मिल कर किसानों को कम पानी में अधिक पैदावार देने वाले सिंचाई साधनों का उपयोग करने के लिए प्ररित किया जाता है. 

बहरहाल इन जलाशयों के अलावा भी संभाग भर में कई ऐसे कुएं, बावडियां और ऐसे कई जल स्त्रोत है जहां पर प्रचूर मात्रा में पानी उपलब्ध रहता है. जो कभी यहां के लोगों की प्यास बूझाने का प्रमुख स्त्रोत हुआ करते थे, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम जन की लापरवाई का भेट चढ़ गए है. जिसका खामियाजा पानी की कमी के सयम सभी को उठाना पड़ रहा है. ऐसे में जरूरत है इन जल स्त्रोतों को बचाने के लिए अधिक से अधिक प्रयास किए जाए जिससे इनके पानी को भी सही ढंग से उपयोग किया जा सके.