बांसवाड़ा: आजादी के दशकों बाद भी इस गांव को नहीं मिली मूलभूत सुविधाएं...

बांसवाड़ा में विकास की बातें भले ही कितनी की जाएं, लेकिन जिले के कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं, जहां लोग आज भी मूलभूत जरूरतों के लिए जूझते नजर आते हैं.

बांसवाड़ा: आजादी के दशकों बाद भी इस गांव को नहीं मिली मूलभूत सुविधाएं...
परिवार आज भी अंधेरे में रहने को मजबूर

अजय ओझा/बांसवाड़ा: आजादी मिले 70 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर हैं. आदिवासी अंचल के बांसवाड़ा जिले में लोगों का बुरा हाल है.

बांसवाड़ा जिले में विकास की बातें भले ही कितनी की जाएं, लेकिन जिले के कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं, जहां लोग आज भी मूलभूत जरूरतों के लिए जूझते नजर आते हैं. देश आजाद हुए 70 साल से ज्यादा हो गए, आज देश विकास के नाम पर कहीं आगे निकल चुका है, फिर भी विकास के दावों की पोल खोलने वाला सच जनजाति अंचल कहे जाने वाले बांसवाड़ा जिले में दिखाई पड़ रहा है.

शहर के वार्ड नंबर-1 में पिपलोद गांव हैं. जहां आजादी के बाद से आज तक विकास का सूरज उगा ही नहीं. ग्रामीण आज भी अंधेरे में रहने को मबजूर हैं. पिपलोद गांव में यूं तो 100 से ज्यादा परिवार रहते हैं, लेकिन शायद इनकी सुविधाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है. यहां के ग्रामीण सिर्फ एक वोट बैंक बनकर ही रह गए हैं. आज तक इन लोगों तक बिजली नहीं पहुंच पाई है.

यहां रहने वाले परिवार आज भी अंधेरे में रहने को मजबूर हैं. रात के वक्त यहां लोग चिमनी या दिये से रोशनी का इंतजाम करते हैं. इसी रोशनी में बच्चे पढ़ने को भी मजबूर हैं. महिलाएं रात के वक्त चुल्हे की रोशनी में ही खाना बनाने का काम करती हैं. गांव के लोगों का कहना है कि वो हरबार मतदान करते हैं, और हर चुनाव में इन लोगों को एक उम्मीद बंधती कि शायद अब इनके दिन बहुरेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

वहीं, ग्रामीणों और स्थानीय पार्षद के मुताबिक हर बार इन्होंने बिजली विभाग के अलावा जिला प्रसाशन और स्थानीय जनप्रतिनिधि को जानकारी दी, लेकिन अब तक यहां पर बिजली नहीं पहुंच पाई. इतना ही नहीं यहां एक बड़ी समस्या पीने के पानी की भी है. राजस्थान सरकार और केन्द्र सरकार की योजनाएं कुल मिलाकर यहां दम तोड़ती नजर आ रही हैं.