पुष्कर मेला हुआ खत्म, कार्तिक पूर्णिमा पर 3 लाख श्रद्धालुओं ने किया महास्नान

पांच दिनों में भी पूर्णिमा महास्नान का विशेष महत्व बताया गया है. इसमे भी दुर्लभ पद्मक योग के संयोग से उम्मीद से बढ़कर लोगों ने महास्नान का धर्मलाभ लिया. 

पुष्कर मेला हुआ खत्म, कार्तिक पूर्णिमा पर 3 लाख श्रद्धालुओं ने किया महास्नान
पूर्णिमा महास्नान के समय अधिक भीड़ के बाद भी पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था अच्छे से बनाए रखी.

मनवीर सिंह, अजमेर: अंतराष्ट्रीय पुष्कर मेले का पूर्णिमा महास्नान और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मंगलवार को समापन हो गया. कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर दुर्लभ पद्मक योग के कारण महास्नान के लिए भारी भीड़ उमड़ी. एक अनुमान के अनुसार तीन लाख से अधिक श्रदालुओं ने पवित्र पुष्कर सरोवर मे आस्था की डुबकी लगाकर धर्म लाभ प्राप्त किया.

सोमवार देर रात जैसे जैसे पूर्णिमा का समय करीब आया लोगों का हुजूम पुष्कर की तरफ उमड़ने लगा. खबर लिखे जाने तक दो लाख से अधिक श्रदालु आस्था की डुबकी लगा चुके थे और लोगों का लगातार आना जारी था. पुष्कर सरोवर के मुख्य घाटों पर श्रदालुओं ने देर रात से ही श्रदालुओ ने डेरा लगाना शुरू कर दिया था. रात भर भजन कीर्तन ओर भक्ति के दौर चलते रहे. जैसे ही हिन्दू पंचाग के अनुसार पूर्णिमा का आगमन हुआ, लोगों ने सरोवर मे स्नान कर पुन्य प्राप्त करना शुरू कर दिया जो मंगलवार शाम तक जारी रहा.

दुर्लभ योग से उमड़ा आस्था का सैलाब
ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के रचियता जगत -पिता ब्रह्मा ने इस पवित्र सरोवर के बीच माता गायत्री के साथ कार्तिक एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक यज्ञ किया था. इस यज्ञ के दौरान धरती पर ३३ करोड़ देवी - देवता पुष्कर में ही मौजूद रहते हैं. सतयुग काल से ही इन पांच दिनों का खासा महत्व माना जाता है. इन पांच दिनों में पवित्र सरोवर में स्नान करने से पांचों तीर्थों का पुन्य प्राप्त होता है इसलिए इसे पञ्चतीर्थ स्नान भी कहा जाता है.

इन पांच दिनों में भी पूर्णिमा महास्नान का विशेष महत्व बताया गया है. इसमे भी दुर्लभ पद्मक योग के संयोग से उम्मीद से बढ़कर लोगों ने महास्नान का धर्मलाभ लिया. हालांकि, पंडित कैलाशनाथ दाधीच के अनुसार यह योग मंगलवार रात आठ बजकर एक मिनट से लेकर बुधवार रात 10 बजे तक है लेकिन लोगों ने तो पूरे दिन ही यह संयोग मानते हुए स्नान का लाभ ले लिया. श्रदालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान करने के बाद पूजा अर्चना की और पुरोहितों को दान दक्षिणा दी. जगतपिता ब्रह्मा के दर्शन के लिए भी श्रदालुओ की लंबी लंबी कतारें लगी.

चाक चौबन्ध के साथ रही सुरक्षा व्यवस्थाएं
पूर्णिमा महास्नान के समय उम्मीद से अधिक भीड़ के बावजूद पुलिस की और से सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबन्ध रही. यही कारण था कि खबर लिखे जाने तक किसी बड़ी वारदात की सूचना नहीं मिली. पिछले साल की अपेक्षा चोरी सहित चेन स्नेचिंग की घटनाओं पर नकेल डालने में पुलिस बहुत हद तक कामयाब रही. चार पहिया वाहनों को कस्बे से बाहर ही रोकने के कारण लोगो को असुविधा तो हुई लेकिन हालात काफी हद तक सही रहे.

रंगारंग समापन 
दूसरी तरफ रंगारंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमो के साथ मेले का विधिवत समापन हो गया. मेला ग्राउंड में आयोजित समापन समारोह में सभी अतिथियों का पशु पालन विभाग के संयुक्त निदेशक अजय अरोड़ा सहित विभाग के अन्य अधिकारियों ने स्वागत किया. समारोह में राजस्थान के लोक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समारोह में चार चांद लगा दिए. इस मौके मटका दौड़,रस्साकसी सहित सभी मुख्य प्रतियोगिताओ का फिर से आयोजन हुआ.

समापन समारोह के मुख्य अतिथी जिला कलेक्टर विश्वमोहन शर्मा ने अपने सम्बोधन में पुष्कर मेले में की गई व्यवस्थाओ के लिए जिला पुलिस और पालिका प्रशासन सहित सभी विभागों की तारीफ करते हुए सभी को बधाई दी. शर्मा ने कहा कि आगामी मेले को और नवाचारों के साथ आकर्षित बनाने का प्रयास किया जाएगा. मेला मजिस्टेट और उपखंड अधिकारी देविका तोमर ने कहा कि सभी विभागों ने एक टीम के रूप में बेहतर समन्वय के साथ काम किया इसलिए पुष्कर मेला शांतिपूर्ण सफल सम्पन हुआ है.

तोमर ने कहा कि जल्द ही मेला क्षेत्र के विस्तृत क्षेत्र को विकसित करने के प्रयास शुरू किए जाएंगे. नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अभिषेक गहलोत ने मेले के सफल समापन के लिए प्रशासन के आला अफसरों के मार्गदर्शन स्थानीय लोगो, संस्थाओ, मीडिया के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और अपनी टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया.

गहलोत ने कहा कि इस मेले में मिले अनुभव के आधार पर अगले मेले को नवाचारों के साथ नई ऊचाइंया देने के प्रयास होंगे. कलेक्टर विश्वमोहन शर्मा ने कहा कि पुष्कर मेले को और अधिक आकर्षित बनाने के लिए पूरी कोशिस की जाए. इस मौके पर एडीएम सिटी कैलाश लखारा, अजमेर उपखंड अधिकारी अर्तिका शुक्ला, तहसीलदार पंकज बड़गुर्जर, सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी,पुलिस  अधिकारी,धार्मिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे. इस मौके पर अंत में मेले में हर क्षेत्र में सहयोग प्रदान करने वाले लोगो का जिला प्रशासन की और से सम्मान किया गया.

रस्सा कसी में स्थानीय पुरुष और महिला दोनों जीते
समापन समारोह में आयोजित रस्साकसी प्रतियोगिता में मेजबानों ने पुरुष और महिला दोनों वर्ग में विदेशी मेहमानों को पराजित किया. इस दौरान हजारों की भीड़ स्थानीय खिलाड़ियों का हौसला अफजाई करती रही. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.