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राजस्थान: ग्रामीण विकास के मामले में अजमेर अव्वल, जयपुर हुआ फेल

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के अधीन चलने वाली गांव की योजनाओं में सबसे आगे इस बार अजमेर रहा.

राजस्थान: ग्रामीण विकास के मामले में अजमेर अव्वल, जयपुर हुआ फेल
यह रैकिंग वित्तीय वर्ष के सरकारी योजनाओं की वर्किंग के आधार पर जारी होती है.

जयपुर: ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने सरकारी योजनाओं की रैकिंग जारी कर दी है. रैकिंग में इस बार अजमेर अव्वल रहा. जबकि राजधानी जयपुर 16 वें पायदान पर रही. मनरेगा, पीएम आवास समेत कई योजनाओं को आधार बनाकर रैकिंग जारी की है.

राजस्थान के किस जिले, किस पंचायत में और किस गांव में कितना विकास हुआ, इसका अंदाजा इस रिपोर्ट से आपको हो जाएगा. ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के अधीन चलने वाली गांव की योजनाओं में सबसे आगे इस बार अजमेर रहा. जहां सबसे ज्यादा आवास बने, सबसे ज्यादा मनरेगा के जरिए रोजगार मिला और गांव की दूसरी योजनाओं में भी अजमेर नंबर वन रहा. जबकि राजधानी जयपुर गांव के विकास में बुरी तरह पिछड़ गई. जयपुर गांव योजनाओं के मामले में 16 वे नंबर पर रहा.

यह रैकिंग वित्तीय वर्ष के सरकारी योजनाओं की वर्किंग के आधार पर जारी होती है. इसमें जिला कलेक्टर सीधे शामिल रहते हैं और कलेक्टर की परफॉर्मेंस का पैमाना भी माना जाता है. कलेक्टर ही इन सब सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग सीधे तौर पर करते हैं. इनमें मनरेगा, पीएम आवास योजना, राजीविका मिशन, ग्रामीण विकास परियोजनाएं, स्वच्छ भारत मिशन जैसी ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं. 

प्रदेश में मनरेगा के लिए एक लाख 40 हजार श्रम दिवस तय किए गए थे. जिसे राज्य सरकार ने 40 प्रतिशत बढ़ाकर दो लाख से अधिक का टारगेट किया. इस अनुपात में अब प्रदेश में तीन करोड़ से ज्यादा श्रम दिवस हो जाएंगे. 

प्रदेश में दो लाख 13 हजार लोग मनरेगा में काम कर रहे है. इन्हें 145 रुपए एवरेज रेट से भुगतान किया जा रहा है और अब ये रेट 170 रुपए तक बढ़ने की संभावना है. लेकिन जो जिले पिछडे हुए है उन्हे अपनी रैकिंग सुधारने की जरूरत है. क्योंकि गांव की योजनाओं में यदि पिछड़ रहे है तो इसका मतलब ये है कि पात्र व्यक्तियों को उनका हक नहीं मिल रहा.