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राजस्थान कांग्रेस में लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार को लेकर मंथन शुरू

राजस्थान में कांग्रेस के सत्ता में वापसी के बाद पार्टी नेताओं के हौसले बुलंद है, लेकिन पार्टी नेताओं का कहना है कि विधानसभा में जितनी मेहनत की गई उसके मुताबिक पार्टी को परिणाम नहीं मिले थे

राजस्थान कांग्रेस में लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार को लेकर मंथन शुरू
तीन दिवसीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी बुलाया गया था

मनोहर विश्नोई/राजस्थान: प्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर हलचलें तेज हो गई हैं. कांग्रेस के उम्मीदवार चयन को लेकर महासचिव प्रभारी अविनाश पांडे ने पीसीसी चीफ सचिन पायलट के साथ 25 लोकसभा सीटों के लिए दिल्ली में विस्तार से मंथन कर लिया है. अविनाश पांडे ने आलाकमान को सुपरियर होने का रुतबा दिखाने के लिए जयपुर की बजाय प्रभारी मंत्री, विधायक, जिलाध्यक्ष, संगठन के जुड़े सीनियर नेताओं को दिल्ली बुलाकर मंथन किया.

खबर के मुताबिक तीन दिवसीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी बुलाया गया था लेकिन सीएम गहलोत रायशुमारी की तीनों दिन की बैठकों में नहीं पहुंचे. बताया जा रहा है कि इस गहलोत के बैठक में नहीं आने से पांडे नाखुश हो गए. लिहाजा अगले दिन सीएम को अविनाश पांडे और सचिन पायलट को जयपुर बुलाना पड़ा. जिसके बाद तीनों ने तीन दिन के रायशुमारी में मिले फीडबैक पर चर्चा की. 

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने वर्तमान बदले राजनीतिक मिजाज के चलते टिकट वितरण के फॉर्मूले में बदलाव करना पड़ा. अविनाश के अनुसार विधायक और मंत्रियों को लोकसभा चुनाव नहीं लड़वाना था, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बदली परिस्थितियों में अब केवल जीताउ उम्मीदवार ही मैदान में उतारा जाएगा. इसलिए कुछ दिग्गज विधायक और मंत्री जो लोकसभा चुनाव लड़ने की मांग कर रहे उनको चुनाव लड़वाया जा सकता है. कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि इसी हफ्ते होने वाली पीईसी की बैठक में कांग्रेस अपने उम्मीदवारों का पैनल बनाकर सीईसी को भेज देगी.

राजस्थान में कांग्रेस के सत्ता में वापसी के बाद पार्टी नेताओं के हौसले बुलंद है, लेकिन पार्टी नेताओं का कहना है कि विधानसभा में जितनी मेहनत की गई उसके मुताबिक पार्टी को परिणाम नहीं मिले थे, लिहाजा इस बार लोकसभा में अलग रणनीति के साथ लोकसभा के समीकरणों को साधने की कोशिश की जाएगी. 

उधर राहुल गांधी ने प्रदेश प्रभारियों को साफ निर्देश दे रखें है कि जो नेता विधायक का चुनाव लड़ चुके उनको लोकसभा में नहीं उतारा जाएगा. साथ ही उनके संबंधी को भी टिकट नहीं दी जाएगी. लिहाजा कई दिग्गजों को अपनी राजनीतिक विरासत आगे बढाने में खासी दिक्कत आ रही है. हालांकि अब परिस्थितियां बदल चुकी है लिहाजा केवल जीताउ का पैमाना लागू होगा, इसलिए दिग्गजों के लिए राहत की खबर हो सकती है.