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राजस्थान: नकली वैक्सीन मामले में ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट का एक्शन, डॉक्टर्स पर होगी कार्रवाई

अनुमान है कि पिछले कई वर्षों से इस कंपनी की नकली दवा बाजार में बेची जा रही थी. शनिवार को ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक के नेतृत्व में कालवाड़ रोड स्थित वी क्योर पर यह कार्रवाई की गई थी.

राजस्थान: नकली वैक्सीन मामले में ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट का एक्शन, डॉक्टर्स पर होगी कार्रवाई
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: राजस्थान में नकली और मिलावटी खानपान के बाद अब मुनाफाखोरी के लिए नकली दवाओं का मामला भी सामने आ रहा है. दिमागी बुखार यानी मेनिनजाइटिस नामक डिजीज के लिए काम आने वाली वैक्सीन भटिंडा से लाकर राजस्थान में खपाई जा रही थी. शनिवार को जयपुर औषधि नियंत्रक की कार्रवाई में चौकाने वाले खुलासे हुए हैं.

भटिंडा से सस्ती दरों पर ये नकली वैक्सीन जोधपुर के वर्धमान मेडिकोज पहुंच रही थी. जंहा से इनकी सप्लाई हो रही थी. ना सिर्फ अधिकृत स्टोर्स पर बल्कि राजधानी जयपुर में कुछ चिकित्सकों तक ये खपाई जा रही थी. जयपुर ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने ऐसे चिकित्सकों को चिन्हित कर लिया है और जल्द इन चिकित्सकों के ऊपर एक्शन संभव है. 

अनुमान है कि पिछले कई वर्षों से इस कंपनी की नकली दवा बाजार में बेची जा रही थी. शनिवार को ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक के नेतृत्व में कालवाड़ रोड स्थित वी क्योर पर यह कार्रवाई की गई थी. फिलहाल विभाग ने जयपुर के चार और जोधपुर के 15 वॉयल पर रोक लगा दी है. यह वैक्सीन बच्चों और वयस्क के लगाई जाती है. ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट को सूचना मिली थी कि बाजार में इसके नकली इंजेक्शन आ रहे हैं. कई जगह पड़ताल की गई तो पता चला कि वी- क्योर पर इस तरह के इंजेक्शन आते हैं और बेचे जाते हैं.

मामले की पड़ताल की गई, लेकिन वॉयल बहुत ही छिपा कर रखी गई थी. इसके मालिक मनोज पूरे मामले को दबाने की कोशिश करता रहा लेकिन बिलों की जांच में सामने आया कि चार वॉयल बची हुई हैं. इसके बाद इन्हें निकलवाया गया. मेनेक्टरा वैक्सीन कंपनी की वॉयल से मिलाया गया तो लेबल और प्रिंटिंग में फर्क था. इसके बाद वहां टीम को तुरंत भेजा गया और वहां पर पूछताछ की गई. 

यह दवा बाजार में 5000 रुपए प्रति वॉयल तक बेची जाती है. नकली दवा में कोई ड्रग केमिकल मौजूद नहीं मिला. ऐसे में माना जा रहा है कि पूरी दवा मरीज को कोई असर नहीं करेगी. यानी एक वॉयल पर करीब 4000 रुपए बचाए जा रहे थे. अभी बाजार में 350 वॉयल प्रतिमाह बाजार में बेची जाती हैं. ऐसे में यदि 20 प्रतिशत दवा भी वी-क्योर बेचता है तो 40 वॉयल नकली बाजार में बेची जा रही हैं. 

दिमागी बुखार को ही मेनिनजाइटिस कहा जाता है. दिमाग में ज्वर, सिरदर्द, ऐंठन, उल्टी और बेहोशी जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं. रोगी का शरीर कमजोर हो जाता है. कुछ रोगियों (बहुत कम) की गर्दन में जकड़न आ जाती है. कई रोगी लकवा के भी शिकार हो जाते हैं. ये सभी लक्षण मस्तिष्क की सुरक्षा प्रणाली के क्रियाशील (एक्टिव) होने के कारण प्रकट होते हैं. इस कार्रवाई के बाद पुरे राजस्थान में ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने अलर्ट जारी कर दिया है.