राजस्थान: बेटी को बचाने के लिए पिता ने लगाई गहलोत सरकार से गुहार, कहा...

पिता के मुताबिक, करीब चार वर्ष पहले एकाएक हर्षिता को कमजोरी व थकान महसूस हुई तो हॉस्पिटल दिखाया. जांच में खून की मात्रा कम होने पर उसे ब्लॅड चढ़ाया गया.

राजस्थान: बेटी को बचाने के लिए पिता ने लगाई गहलोत सरकार से गुहार, कहा...
हर्षिता के परिजनों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है.

जयपुर: राजस्थान के जयपुर जिले के रेनवाल तहसील के बासड़ीखुर्द पंचायत के जोधपुरा गांव की रहने वाली हर्षिता पाटोदिया पिछले चार वर्ष से अप्लास्टिक एनीमिया रोग से ग्रसित है. दरअसल, इस बीमारी में शरीर पर्याप्त रक्तकोशिकाओं का उत्पादन बंद कर देता है. जिससे खून नहीं बन पाता. इस बीमारी से पीड़ित हर्षिता को हर महीने जयपुर जाकर ब्लॅड चढ़वाना पढ़ता है. गरीब पिता सुरेश कुमार पाटोदिया ने बेटी के इलाज में अब तक 15 लाख रूपए से अधिक खर्च कर दिए हैं. लेकिन अब हालात ये हैं कि आगे इलाज के लिए उसके पास पैसे नहीं है. जबकि, चिकित्सकों के अनुसार स्थाई इलाज के लिए 35 लाख रूपए की आवश्यकता है.

पिता के मुताबिक, करीब चार वर्ष पहले एकाएक हर्षिता को कमजोरी व थकान महसूस हुई तो हॉस्पिटल दिखाया. जांच में खून की मात्रा कम होने पर उसे ब्लॅड चढ़ाया गया. लेकिन अगले माह फिर हिमोग्लोबिन कम होने पर जयपुर एसएमएस हॉस्पिटल जांच करवाई तो उसमें अप्लास्टिक एनीमिया बीमारी सामने गई. जिसके बाद गरीब पिता अपनी 16 वर्षीया बेटी के इलाज के लिए सरकार के आला अधिकारियों सहित जननेताओं के पास चक्कर लगाते लगाते थक चुके हैं. लेकिन अब तक कहीं से भी उसे इलाज के लिए मदद नहीं मिल रही है.

जानकारी के अनुसार, गरीब परिवार होने के बावजूद इस परिवार का बीपीएल कार्ड भी नहीं है. भामाशाह कार्ड से केवल साल में तीन बार ब्लॅड दिया जाता है. उसके बाद हर बार उसे रकम खर्च कर ब्लॅड चढ़वाना पढ़ रहा है. बेटी का इलाज कराते-कराते पिता व परिवार की आर्थिक स्थिती बुरी तरह से खराब हो चुकी है. अब तक 15 लाख से अधिक रूपये खर्च हो चुके हैं. पिता को रकम उधार लेकर बेटी का इलाज कराना पड़ रहा है. हांलाकि, एसएमएस हॉस्पिटल में निशुल्क ब्लॅड चढ़ाया जाता है. लेकिन वहां तत्काल ब्लॅड नहीं मिलने से मजबूरी में परिवार को दूसरे प्राईवेट हॉस्पिटल में रकम खर्च कर ब्लॅड चढ़वाना पड़ता है. प्राईवेट ब्लॅड बैंक में एक यूनिट के 1250 रूपए लगते है.

हर्षिता के पिता सुरेश कुमार के अनुसार, बच्ची के इलाज में मदद के लिए एसडीएम, विकास अधिकारी, जिला कलेक्टर सहित विधायक निर्मल कुमावत, सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़, कांग्रेस नेता विद्याधर सिंह व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलेट से फरियाद की. लेकिन अब तक कहीं से भी उसे मदद नहीं मिल रही है.

पिता सुरेश कुमार के अनुसार एसएमएस हॉस्पिटल ने अप्लास्टिक एनीमिया का स्थाई इलाज स्टेम सेल ट्रांसप्लांट बताया है. जिसके लिए 35 लाख रूपए का खर्च होता है. यह इलाज नई दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल या दूसरे बडे हॉस्पिटल में ही संभव है. जिसके लिए हर्षिता की मां ममता देवी व चाची पूजा ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है.

हर्षिता बीमारी की वजह से लगातार स्कूल नहीं जा पाती, फिर भी पढ़ाई में अव्वल है. 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली हर्षिता ने 10वीं कक्षा में सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए 85 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. हर्षिता बिमारी व कमजोरी की वजह ज्यादा से बोल नहीं सकती, हर्षिता के अनुसार उसकी उसकी एक ही तमन्ना है. वह जीना चाहती है. पढना चाहती है. और देश के लिए कुछ करना चाहती है. वो मरना नहीं चाहती.