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राजस्थान: संघ के विचारों से लड़ेगी गहलोत सरकार, बनाएगी सत्य और अहिंसा विभाग

देश में भाजपा और संघ की राजनीति कार्यप्रणाली और उनकी विचारधारा से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पुरानी विरासत को ही हथियार बनाने का फैसला किया है

राजस्थान: संघ के विचारों से लड़ेगी गहलोत सरकार, बनाएगी सत्य और अहिंसा विभाग
फाइल फोटो

जयपुर: देश में भाजपा और संघ से विचारधारा की लड़ाई में पिछड़ चुकी कांग्रेस अब अपने सबसे बड़े नेता महात्मा गांधी के मूल सिद्धांतों की की तरफ लौट रही है. गांधीवादी नेता अशोक गहलोत ने राजस्थान में इसकी शुरुआत की है. राजस्थान देश का ऐसा पहला राज्य होगा जहां महात्मा गांधी के सिद्धांत शांति और अहिंसा के नाम पर अलग से विभाग बनाया जाएगा. माना जा रहा है कि समाज में सकारात्मक बदलाव और विचारधारा की जंग में अपने संदेश को आमजन तक पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.

देश में भाजपा और संघ की राजनीति कार्यप्रणाली और उनकी विचारधारा से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पुरानी विरासत को ही हथियार बनाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भाजपा और आरएसएस पर नफरत की राजनीति फैलाने का आरोप लगाते रहे हैं. इसके जवाब में अब गहलोत ने राजस्थान में महात्मा गांधी के दो प्रमुख सिद्धांत शांति और अहिंसा के आधार पर अलग से विभाग बनाने की दिशा में कार्रवाई करने में लगे हैं. 

जानकारी मिली है कि विभाग कला और संस्कृति मंत्रालय के अधीन रहेगा. महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती से पहले राजस्थान सरकार इस विभाग को अंतिम रूप देने की कवायद में जुटी है. सीएमओ की एक विशेष टीम इसे लेकर अभी सुझाव मांग रही है. सुझावों के आधार पर एक फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा है कि समाज के भीतर लोगों में आपसी एकता और सद्भाव को बढ़ाने के लिए इस तरह के मंत्रालय की जरूरत है. 

राजस्थान में पिछले कुछ सालों में मॉब लिंचिंग और भीड़ तंत्र की घटनाओं में वृद्धि हुई है. ऐसे में इस मंत्रालय के जरिए समाज में सकारात्मक सोच लाने की दिशा में काम किया जाएगा. माना जा रहा है कि आम जनता में बीजेपी के हिंदुत्व की विचारधारा की काट में धर्मनिरपेक्षता की भावना फैलाने के लिए कांग्रेस को पार्टी से ज्यादा सरकार पर भरोसा कर रही है और सरकार के जरिए सर्वधर्म समभाव की विचारधारा फैलाई जाएगी. आरएसएस की विचारधारा के मुकाबले सरकारी अधिकारी लोगों के बीच जाकर आपसी सद्भाव और शांति का पाठ पढ़ाएंगे.

दरअसल, गांधी के सिद्धांतों पर मंत्रालय बनाने का सुझाव गांधीवादी विचारक डॉ. एसएन सुब्बाराव ने जयपुर के एक शिविर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिया था. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहली बार सुब्बाराव के 10 दिवसीय शिविर के समापन समारोह में बोलते हुए कहा कि राज्य में शांति और सद्भावना की जरूरत है जिसके लिए सरकारी स्तर पर एक विभाग स्थापित किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस विभाग का मूल विचार सुबाराव का है लिहाजा विभाग को संचालन करने की जिम्मेदारी भी उनको दी जा सकती है। सुबाराव राजस्थान में अलग-अलग जगह पर शिविर लगाने का काम कर रहे हैं ऐसे में वे बेहतर तरीके से इस विभाग की योजनाओं को मूर्त रूप देने की दिशा में काम कर सकते हैं।

दरअसल विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को भाजपा से महज 1 लाख 42 हजार वोट ही अधिक मिले थे. उसके बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस देश में करारी हार के साथ साथ राजस्थान में भी 25 सीटें हार गई. हार के बड़े कारणों में से एक कारण यह भी था कि देश में लोगों का कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ाव खत्म हो रहा है. इस विचारधारा से जुड़ने के लिए खास तौर पर युवा पीढ़ी को कांग्रेस के पुराने सिद्धांत बताने के लिए यह पहल की जा रही है. इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है पिछले कुछ सालों में कांग्रेस खुद महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू की सोच और विचार से अलग हो गई है. ऐसे में समाज में बदलाव के साथ-साथ खुद पार्टी का भी यह जड़ों की तरफ लौटने का कदम है. देखना होगा अशोक गहलोत इस एक कदम के जरिए क्या बदलाव कर पाते हैं.