राजस्थान सरकार ने बंद किया व्यवसायिक प्रशिक्षक कोर्स, 1,810 शिक्षक हुए बेरोजगार

राजस्थान में 2014-15 के सत्र से इस कोर्स की शुरूआत हुई और 16 विभिन्न एजेंसियों द्वारा 1810 व्यवसायिक शिक्षकों की नियुक्ति हुई.

राजस्थान सरकार ने बंद किया व्यवसायिक प्रशिक्षक कोर्स, 1,810 शिक्षक हुए बेरोजगार
28 फरवरी के बाद सभी 905 स्कूलों से इस कोर्स को बंद कर दिया जाएगा. (प्रतिकात्मक तस्वीर)

जयपुर: सत्ता में आने से पहले व्यावसायिक शिक्षा की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के साथ ही स्कूलों में पिछले 5 सालों से चले आ रहे व्यावसायिक प्रशिक्षक कोर्स को बंद करने का फैसला लिया. सरकार के इस फैसले ने एक साथ 1,810 परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है. गौरतबल है कि सत्र 2014-15 में स्कूलों में व्यावसायिक प्रशिक्षक कोर्स शुरू किया था. और 2012 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत हरियाणा से शुरू हुआ ये कोर्स वर्तमान में पूरे देश के राज्यों में संचालित हो रहा है. राजस्थान के करीब सभी जिलों के 905 स्कूलों में ये कोर्स संचालित हो रहा है, जिसमें 1810 व्यावसायिक शिक्षक स्कूली बच्चों को व्यावसायिक कोर्स की शिक्षा दे रहे हैं.

स्कूलों के समय से ही रोजगारोन्मुखी शिक्षा देने के लिए यूपीए सरकार ने 2012 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत व्यावसायिक कोर्स प्रशिक्षण की शुरूआत हरियाणा से की थी और महज दो सालों में ही देश के करीब सभी राज्यों में इस कोर्स की शुरूआत हुई. राजस्थान में भी 2014-15 के सत्र से इस कोर्स की शुरूआत की गई और 16 विभिन्न एजेंसियों के जरिए 1810 व्यावसायिक शिक्षकों की नियुक्ति हुई जिन्होंने 1 जनवरी 2015 को स्कूलों में कोर्स की पढ़ाई करवानी शुरू की लेकिन 11 फरवरी 2019 को शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर इन कोर्स को बंद करवाने का फैसला लिया. जिसके बाद 28 फरवरी के बाद सभी 905 स्कूलों से इस कोर्स को बंद कर शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी और अब इन संविदा शिक्षकों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो गया है.

संविदा पर लगे इन शिक्षकों को कई महीनों से वेतन नहीं मिल पाया है. किसी शिक्षक को 6 महीनों से तो किसी शिक्षक को 18 महीनों से वेतन नहीं मिल पाया है. अभी तक वेतन के लिए संघर्ष कर रहे शिक्षकों के सामने अब रोजगार का भी संकट हो गया है. व्यवासायिक शिक्षक राधाकिशन का कहना है कि पहले तो वेतन के लिए ही परेशान हो रहे थे लेकिन अब तो रोजगार ही छीना जा रहा है. ऐसे में शिक्षकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि संविदा पर लगे व्यावसायिक शिक्षकों का समायोजन शिक्षा विभाग में किया जाए क्योंकि इसमें से अधिकतर शिक्षक बहुत गरीब तबके से हैं.

बहरहाल, प्रदेश के करीब 1 लाख 50 हजार से ज्यादा विद्यार्थी व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई का लाभ उठा रहे थे. ऐसे में अचानक व्यावसायिक कोर्स बंद होने से रोजगारोन्मुख शिक्षा को तो धक्का लगा ही है. साथ ही प्रदेश के 1,810 शिक्षकों के सामने रोजगार का भी संकट खड़ा हो गया है.