राजस्थान: आर्दश ग्राम योजना की खोखली तस्वीर, 5 सालों में सिर्फ 45 फीसदी काम हुए पूरे

आदर्श गांवों में ना ही सफाई है और ना ही पानी की व्यवस्था. इतना ही नहीं सांसदों ने कुपोषण की दर सुधारने और ड्रॉप आउट रेट कम करने जैसे पांच बिंदुओं पर ध्यान नहीं दिया. 

राजस्थान: आर्दश ग्राम योजना की खोखली तस्वीर, 5 सालों में सिर्फ 45 फीसदी काम हुए पूरे
आदर्श गांवों में ना ही सफाई है और ना ही पानी की व्यवस्था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जयपुर: पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में जब आदर्श ग्राम योजना लागू कि तो मकसद था कि हर सांसद एक गांव गोद लेकर शहर जैसी सुविधाएं विकसित करे, लेकिन राज्य के सांसदों द्धारा गोद लिए गए गांव के हालात बेहद खराब हैं. ये हम नहीं कह रहे, सरकार के आकंडे इसके गवाह हैं. 

पांच साल में सांसदों ने गोद लिए गांवों में महज 45 फीसदी ही काम करवाए हैं. कई गांव ऐसे भी हैं जहां सांसद गांव गोद लेने के बाद एक बार भी नहीं गए. कुछ सांसद ऐसे भी हैं, जिन्होने सांसद निधि से एक पैसा भी खर्च नहीं किया. गांव में जल स्त्रोत सुधारने थे, लेकिन पुराने तालाबों में ही सीवर लाइन छोड़ दी गई.

आदर्श गांवों में ना ही सफाई है और ना ही पानी की व्यवस्था. इतना ही नहीं सांसदों ने कुपोषण की दर सुधारने और ड्रॉप आउट रेट कम करने जैसे पांच बिंदुओं पर ध्यान नहीं दिया. जिसका नतीजा ये रहा कि अब तक 55 फीसदी काम पूरे नहीं हो पाए, इनमें से 21 फीसदी काम में प्रोग्रेस चल रही है, जबकि 33 फीसदी काम तो अभी तक शुरू भी नहीं हो पाए है.

पांच साल के अंदर 3 फेज में सांसदों ने 78 गांवों को गोद लिया. जिसमें 4326 काम शुरू किए गए. जिसमें से 1964 काम पूरे हो पाए, जबकि 909 कार्य वर्क इन प्रोगेस है. वहीं 1453 काम तो अभी अधर में अटके हैं.   

ये काम हुए- 
-गांव 2015-16 में ओडीएफ घोषित हो चुका है. नियमित रूप से कई गांवों में सफाई होती है. 
- टंकी, पशु चिकित्सा भवन बनवाए गए.
- कई गांवों में पेयजल सुविधाओं में बढोतरी हुई है. 

ये काम नहीं हुए-
- कई गांवों में न बस, न टैक्सी और ना ही अस्पताल बना.
- महिलाएं खुले में शौच जाती हैं. लकड़ियों से चूल्हा जलता है. 
- कई सांसद एक बार भी गांव नहीं गए .
- ग्रामीण फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं.