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राजस्थान: पंचायतीराज संस्थान में 20 साल से फर्जीवाड़े का खेल जारी, जानिए पूरा मामला

राजस्थान के इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान में 20 साल से नौकरी करने वाले इलेक्ट्रीशियन को अयोग्य करार दिए जाने के बावजूद आरोपी के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई. 

राजस्थान: पंचायतीराज संस्थान में 20 साल से फर्जीवाड़े का खेल जारी, जानिए पूरा मामला
नियमानुसार इलेक्ट्रीशियन के पद के लिए 3 साल का अनुभव प्रमाण पत्र जरूरी होता है

जयपुर: राजस्थान के इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान में फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है. यहां 20 साल से नौकरी करने वाले इलेक्ट्रीशियन को अयोग्य करार दिया जा चुका है. लेकिन इसके बावजूद फर्जी नौकरी करने वाले आरोपी रमेश मीणा के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई. अफसरों ने फर्जी इलेक्ट्रीशियन रमेश मीणा की फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया. 

बताया जा रहा है कि रमेश मीणा के खिलाफ सवा साल पहले नोटशीट तैयार की गई थी, जिसमें ये लिखा गया है कि अधिकारियों की मिलीभगत के चलते फर्जी दस्तावेजों के जरिए रमेश ने षडयंत्रपूर्ण नौकरी प्राप्त कर ली. नोटशीट में ये भी सामने आया था कि दस्तावेजों की बिना जांच के ही रमेश मीणा को नौकरी दे दी गई.

जानिए क्या है नियम
नियमानुसार इलेक्ट्रीशियन के पद के लिए 3 साल का अनुभव प्रमाण पत्र जरूरी होता है ,लेकिन रमेश 3 महीने के प्रमाण पत्र से 20 साल से लगातार नौकरी कर रहा है. ऐसे में सबसे बडे सवाल ये उठता है कि डायरेक्टर जनरल अशोक सिंघवी क्यों पूरे मामले की कार्रवाई नहीं कर रहे.

आलाधिकारियों ने साधी चुप्पी
अब तक पंचायतीराज विभाग ने इस सबंध में कोई कार्रवाई नहीं की कर रहा. आला अधिकारी लगातार पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है. अधिकारी एक दूसरे पर टालमटोल कर मामले से पल्ला झाड रहे है. 

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नहीं थी पात्रता
नोटशीट में लिखा गया है कि रमेश मीणा इलेक्ट्रीशियन के पद के लिए योग्य नहीं पाए गए और उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई होनी चाहिए. रमेश मीणा द्धारा फर्जी दस्तोवजों के जरिए नौकरी प्राप्त करना अपराधिक श्रेणी में माना गया है. 

पद के लिए 3 साल का अनुभव की थी जरुरत
नियमानुसार इलेक्ट्रीशियन के पद के लिए 3 साल का अनुभव प्रमाण पत्र जरूरी होता है, लेकिन रमेश महज 3 महीने के प्रमाण पत्र से 20 साल से लगातार नौकरी कर रहे है. नोटशीट में यह बात भी सामने आई है कि बिना दस्तावेज जांच ही रमेश को नौकरी दे दी गई,जिसमें कई अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है. इससे पहले रमेश पंचायतीराज संस्थान में ही चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी था,लेकिन अधिकारियों की साठगांठ के चलते उसने नौकरी प्राप्त कर ली.