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राजस्थान: 45 वर्षो बाद मिला जमीन का मालिकाना हक, पुलिस की मौजूदगी में दिलाया कब्जा

इस मामलें में न्यायालय ने सुनवाई के उपरांत फरवरी 2019 में बैयनामा को विधि विरुद्ध घोषित करते हुए उक्त भूमि का कब्जा बीरबल राम वगैरह को दिलाए जाने के आदेश दिए थे. 

राजस्थान: 45 वर्षो बाद मिला जमीन का मालिकाना हक, पुलिस की मौजूदगी में दिलाया कब्जा

अनूपगढ़: अपर जिला न्यायधीश के निर्णय की पालना में उपखंड़ अधिकारी पवन कुमार की देखरेख में तहसीलदार राजस्व ने गिदावर रामकुमार लदोइया तथा हल्का पटवारी नरेश कुमार की मौजूदगी में चक 14 एसजेएम की 50 बीघा नहरी भूमि का कब्जा बीरबलराम वगैरह को दिलाया. उपखंड़ अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि मंगलवार रात तक उक्त भूमि का बीरबल राम आदि के नाम से राजस्व रिकॉर्ड में इंतकाल दर्ज किया गया था. 

जिसके बाद बुधवार को न्यायालय के आदेशों की पालना में कब्जा दिलाने की कार्रवाई की गई. इस कार्रवाई के दौरान कब्जा स्थल पर 4 पुलिस थानों के पुलिस बल थानाधिकारियों सहित मौके पर मौजूद रहे. अधिवक्ता इंद्राज कस्वां तथा सुशील गोदारा ने बताया कि बीरबल राम के दादा के नाम से चक 14 एसजेएम में भूमि थी जिस पर कुछ लोगों ने कब्जाकर कूटरचित तरीके से उक्त भूमि का बैयनामा 2009 में अपने नाम करवा लिया था. जिस पर बीरबल राम तथा अन्य ने न्यायालय की शरण लेकर बैयनामा को विधि विरुद्ध घोषित करवाने के लिए वाद दायर किया था. 

इस मामलें में न्यायालय ने सुनवाई के उपरांत फरवरी 2019 में बैयनामा को विधि विरुद्ध घोषित करते हुए उक्त भूमि का कब्जा बीरबल राम वगैरह को दिलाए जाने के आदेश दिए थे. जिसके विरुद्ध में विरोधी पक्षकार ने राजस्थान उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी. जिसे न्यायालय द्वारा 2 अगस्त 2019 को खारिज कर दिया गया. इसके विरुद्ध विरोधी पक्षकार ने सर्वोच्च न्यायालय में भी अपील दायर की जिसे न्यायालय ने 23 सितम्बर 2019 को खारिज करते हुए अपर जिला न्यायधीश के निर्णय को यथावत रखा. 

जिस पर बीरबल राम वगैरह ने निर्णय की पालना करवाने के लिए अपर जिला न्यायधीश के न्यायालय में इजराय पेश की. जिसमें न्यायालय ने तहसीलदार अनूपगढ़ को निर्णय की पालना में इंतकाल दर्ज कर कब्जा दिलाने के आदेश दिए थे. इस दौरान न्यायालय ने कई बार निर्णय की पालना के लिए लिखा था लेकिन तहसीलदार ने कार्रवाई नही करते हुए न्यायालय के निर्णय को प्रसंगत करते हुए न्यायालय में अपना जवाब प्रस्तुत किया था. 

जिसे न्यायालय के पीठासीन अधिकारी शिव कुमार महला ने गम्भीर मानते हुए तहसीलदार रामपाल मीणा तथा प्रशिसु आई.ए.एस. मोहम्मद जुनेद के विरुद्ध 166 और 120 बी आई पीसी में सक्षम न्यायालय में परिवाद दर्ज करवाया था तथा कब्जे दिलवाने के लिए उपखंड़ अधिकारी को पालना करने के लिए निर्देशित किया था. जिस पर उपखंड़ अधिकारी ने उक्त भूमि का कब्जा बीरबल राम आदि को दिलाया है. उक्त भूमि पर सन 1976 से कब्जाधारी व्यक्तियों ने कब्जा कर रखा था. इतने व्यापक स्तर पर कार्रवाई होने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.