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राजस्थान: लोकसभा चुनाव से पहले राज्यवर्धन सिंह राठौर से जी राजस्थान की खास बातचीत, पढ़ें

किसानों के हित की जब बात आती है तो फर्क देखना होगा कि किसने क्या काम किया? हमने किसानों के लिए लैंड से लैब तक का रास्ता कम कर दिया. 

राजस्थान: लोकसभा चुनाव से पहले राज्यवर्धन सिंह राठौर से जी राजस्थान की खास बातचीत, पढ़ें
फाइल फोटो

जयपुर: लोकसभा चुनावों को लेकर एक ओर जहां इलेक्शन कमीशन द्वारा तारीखों का ऐलान कर दिया गया है तो वहीं दूसरी ओर केंद्र के साथ साथ राज्यों की राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं. इसी बीच राजस्थान की बात करें तो यहां भी बीजेपी और कांग्रेस पूरी तरह से प्रचार प्रसार में जुट गई है और चुनाव जीतने की तैयारियों में लग गई है. इसी बीच जी मीडिया के रिपोर्टर शरद मोहन ने बीजेपी के केन्द्रीय सूचना प्रसारण राज्य मन्त्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ से खास बातचीत की.

चुनावी माहौल शुरु हो चुका है ऐसे में बीजेपी नेता होने के नाते आप अपने आप को कितना मजबूत महसूस करते हैं और कितना मजबूर?
मैं फौजी हूं और भारत का सैनिक हमेशा मजबूत रहता है. कैसी भी चुनौती हो सैनिक देश को सुरक्षित रखना और मजबूत बनाना, चाहे वह बाहरी खतरे से हो या आंतरिक खतरे से सैनिक की जिम्मेदारी होती है. आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गांव-गांव तक जो मजबूती लेकर आए हैं और नई दिशा राजनीति को दे रहे हैं तो हम पूरे हौंसले के साथ खड़े हैं. 

आप हौंसले से खड़े होने की बात करते हैं, लेकिन विपक्ष भी उतनी ही मजबूती के दावे कर रहा है. राजस्थान की बात करें तो दोनों पार्टियां सभी 25 सीटें जीतने की बात कर रही हैं. किसके दावे में दम है?
पिछले 5 साल और पिछले 50 साल का आंकलन करना चाहिए. गरीबी हटाओं का नारा तो 70 के दशक से लग रहा है. बैंकों का राष्ट्रीयकरण भी इसलिए हुआ क्योंकि गरीबों के बैंक खाते नहीं खुले थे लेकिन साल 2014 तक लोगों के बैंक खाते नहीं थे और गरीबी नहीं हटी थी. आज तीस करोड़ से ज्यादा लोगों के बैंक खाते हैं और उनमें 400 से ज्यादा योजनाओं का पैसा बिना बिचौलिए के सीधे लोगों के खाते में जा रहा है. अंतोदय के तहत हमने काम किया और अन्तिम छोर पर खेड़ व्यक्ति तक विकास पहुंचा. आप अर्थव्यवस्था, सैनिक शक्ति या किसी भी पहलू को ले लीजिए, हर क्षेत्र में हमने मजबूती से काम किया है और यह अंतर देखने वाला है. हमने अपने आपके लिए टाइमलाइन रखी कि 2018 तक क्या करेंगे और 2019 तक क्या करेंगे? जबकि कांग्रेस और दूसरी पार्टियां सिर्फ नारे लगाने तक सीमित रहीं. 

लेकिन आप लोगों ने 2022 तक के लक्ष्य तय किए. यह आत्म विश्वास है या अति-आत्म विश्वास?
हर 5 साल में होने वाले चुनाव लोकतंत्र की प्रक्रिया है, लेकिन सरकार सिर्फ 5 साल के लिए ही अपने लिए लक्ष्य रखे यह कहां का विचार है? सरकारें देश के लिए काम करती हैं ना कि चुनाव जीतने के लिए. लेकिन दुर्भाग्य से अभी तक जितनी भी सरकारें थी वह चुनाव जीतने के लिए काम करते थीं. जबकि हमारी सरकार देश को मजबूत करने के लिए काम करती है और इसीलिए बड़े लक्ष्य तय करती है और उस दिशा में काम भी किया.

पिछली बार आप पॉलिटिक्स में फ्रेश चेहरा थे. ऐसे में इस बार के चुनाव पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले कितने अलग हैं?
2014 के चुनाव के वक्त मैं राजनीति में नया था. पहले देश की रक्षा की मैंने वर्दी पहनकर और अब भी देश को मजबूत करने का ही काम कर रहे हैं. 2014 में जयपुर ग्रामीण मुझे मात्र भर जानता होगा, लेकिन पिछले 5 साल में जो काम किया उससे गांव गांव में मेरी पहचान है. आज मेरे क्षेत्र का हर व्यक्ति एक वीर सैनिक के रूप में देश के लिए खड़ा है. लोगों में आत्मबल है, विश्वास है देश की राजनीति में और सरकार में. यह पहली बार है. अभी तक 2014 से पहले राजनीति या राजनेताओं के बारे में बात करते थे तो लोग विश्वास नहीं करते थे. आज वक्त बदला है और लोग भरोसा करने लगे हैं तो यह मोदीजी की बदौलत है कि लोग मानते हैं कि ऐसे भी राजनेता होते हैं जो पूरे समर्पण भाव से देश को आगे ले जाते हैं. 

आप मोदी के प्रति विश्वास जगने की बात कर रहे हैं, लेकिन तीन महीने पहले जो विधानसभा चुनाव हुए उनके नतीजे बीजेपी के पक्ष में नहीं रहे. इन तीन महीनों में ऐसा क्या बदल गया जो बीजेपी इतना आश्वस्त दिख रही है लोकसभा के लिए?
2018 का जो विधानसभा चुनाव था उसमें पूरे राजस्थान में कांग्रेस की हवा थी लेकिन महज आधे फीसदी के वोट के अंतर से हम सरकार बनाने से रह गए. 1 लाख 80 हज़ार वोट से हम पीछे रह गए नहीं तो हम सरकार बना देते राजस्थान में. आखिर किन वादों पर कांग्रेस जीती यह भी देखना चाहिए? 10 दिन में किसानों का कर्जा माफ कर देंगे. बेरोजगारों को भत्ता देना शुरू कर देंगे लेकिन इनके सारे वादे झूठे हैं. एक भी वादा यह पूरा नहीं कर पाई.

लेकिन कांग्रेस कहती है कि उन्होंने अपने वादे लागू करना शुरू कर दिया.
आप कांग्रेस राज में बेरोजगारी भत्ता पाने वाला कोई नौजवान ढूंढ लीजिए और कांग्रेस सरकार बता दे कितना फिगर है? कितने किसानों का कितना ऋण माफ हुआ? कितने लोगों को बेरोजगारी भत्ता मिला? इसके आंकड़े सरकार दे तो सही. दो महीने पहले हमारी सरकार ने राजस्थान में किसानों के ऋण माफ करे थे उसके बाद 2 महीने में किसानों ने कितना ऋण उठा लिया होगा जो माफ कर दिए होंगे? सरकार ने प्राइवेट बैंक और नेशनलाइज बैंक के कर्ज माफ नहीं किया लेकिन सिर्फ नाम भर के लिए वे कर्ज माफी की बात कर रहे हैं और उसमें फर्जीवाड़ा भी दिख रहा है.

चुनाव आते ही हर कोई किसान की बात करता है. क्या वास्तव में कोई किसान का हित देखेगा?
किसानों के हित की जब बात आती है तो फर्क देखना होगा कि किसने क्या काम किया? हमने किसानों के लिए लैंड से लैब तक का रास्ता कम कर दिया. यूरिया की पहले कतारें लगती थीं और ब्लैक में यूरिया मिला करता था लेकिन 2014 से यूरिया की कमी प्रदेश में कहीं नहीं हुई और प्रदेश से बीजेपी सरकार जाते ही कई जगह समस्या खड़ी हो गई. हमने लागत से डेढ़ गुना एमएसपी की. अनाज मंडियों को आपस में जोड़कर उनका विस्तार किया. अब ट्रक में उपज लादकर किसान फोन पर तय करता है कि बरेली ट्रक घुमाना है या चण्डीगढ़. इस आधुनिक युग तक हम किसान को लेकर आए हैं. दो फसलों के बीच में किस तरह किसान की आमदनी बढ़ाई जा सकती है उस पर हमने काम किया. किसान के लिए प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना जो शुरू की उससे किसान को संबल मिला है.

लेकिन प्रधानमन्त्री ने तो चूरू की सभा में कहा कि राजस्थान की तरफ से आंकड़े नहीं दिये गए. आयुष्मान भारत को भी लेकर निशाना साधा.
जब पीएम योजना लेकर आए पूरे देश के लिए उससे आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को फायदा मिला. पूरे देश में पचास करोड़ लोगों को इससे राहत नहीं मिली. सिर्फ राजस्थान और बंगाल ने योजना को स्वीकार नहीं किया और वह भी राजनीति के कारण. 

आपने 10 सितम्बर 2013 को बीजेपी जॉइन की नरेन्द्र मोदी और वसुंधरा राजे की अगुवाई में उसके बाद जयपुर ग्रामीण से जीते और मन्त्री भी बने, लेकिन अब चुनाव से पहले आपका नाम कभी राजसमन्द तो कभी चित्तौड़ और कभी जैसलमेर-बाड़मेर चुनाव लड़ने वाले दावेदारों में चल जाता है. आखिर आपका मानस क्या है और पार्टी क्या चाहती है?
दूसरी पार्टियों में जो मेरे विरोधी हैं वह सीट बदलने की अफवाह चलाते हैं. उन्हें जयपुर ग्रामीण से मेरे सामने चुनाव लड़ने में डर है. आज जयपुर ग्रामीण का हर युवा मेरे साथ है, उससे विपक्षी डरे हुए हैं. मैं जब आपके चैनल पर बोल रहा हूं कि मैं तो सैनिक हूं और जयपुर ग्रामीण में मैनें मोर्चा संभाला हुआ है ऐसे में दूसरों को क्या तकलीफ हो सकती है. 

लेकिन आपके संसदीय क्षेत्र में आठ में से दो विधानसभा क्षेत्र में चुनाव जीते हैं, फिर लोकसभा चुनाव में क्या चमत्कार की उम्मीद? केवल आपका काम, मोदी का नाम या पार्टी की ताकत?
आप देखिए कि कांग्रेस गुमराह कर रही है. लोगों को बड़े-बड़े वादे किए. लोगों से कर्ज माफी, बेरोजगारी भत्ता देने के सपने दिखाए. इन्होंने खुद तो जीत दर्ज की, लेकिन लोगों के विश्वास को हरा दिया. गुर्जरों में यह माहौल चलाया कि उनका मुख्यमंत्री बनने वाला है. कांग्रेस ने जो धोखा लोगों से किया है वह लोग देख रहे हैं और अब से पहले दशकों तक कांग्रेस लोगों से धोखा ही करती आई है. लेकिन अब लोग काम करने वाले प्रधानमंत्री और उनकी सरकार को भी देख रहे हैं. जो कांग्रेस ने बोया था वह गुस्से से वापस लौट कर आएगा.

पांच साल में आपकी ऐसी क्या उपलब्धिया रहीं जो जयपुर ग्रामीण के लोग और युवा आपके साथ हैं?
जयपुर राजस्थान की राजधानी है, लेकिन 2014 से पहले यहां सेना की भर्ती नहीं होती थी. जयपुर ग्रामीण में 6 साल से सेना की भर्ती नहीं हुई थी. यहां के सांसद या किसी नेता ने सवाल नहीं उठाया. हमने वह भर्ती शुरू कराई जिसके बाद रोजगार के तहत बड़ा काम हो रहा है. हमने खेलों का माहौल बनाया और यह न सिर्फ मनोरंजन के लिए बल्कि शारीरिक और मानसिक मजबूती के लिए जिससे इनका चरित्र निर्माण होता है. आज हर साल 500-600 युवा सेना और अर्धसैनिक बलों में जा रहे हैं. जिस भी क्षेत्र में जा रहे हैं वहां उनकी पर्सनालिटी की वजह से इन्हें सब आगे बढ़ कर रिस्पांस देते हैं. हमने युवाओं को बहुत बड़ा मंच दिया. स्कूलों में बड़ा काम किया. जमवारामगढ़ में देश का बड़ा बोर्डिंग स्कूल खोला. केंद्रीय विद्यालय आमेर में खोला, कोटपूतली में की भी की जमीन आवंटित हुई. हमने खेलों पर भी बहुत बड़ा काम किया. जयपुर ग्रामीण में 17 मिनी स्टेडियम जिसमें प्रत्येख पर 50 से 60 लाख अलॉट हुआ. तीन इण्डोर स्टेडियम 3-3 करोड़ की लागत से बन रहे हैं. 17 व्यायाम शाला बन रही हैं पूरे जयपुर ग्रामीण में. इनमें कुश्ती-कबड्डी के मैट जैसी सुविधाएं भी हैं. सोलह ओपन जिम खोल चुके हैं और 30 ओपन जिम का पैसा मंजूर कर दिया है. 20 से 25 करोड़ रुपया सिर्फ खेलों पर लगाया है. इससे सारा समाज एक साथ आएगा और जयपुर ग्रामीण में नया माहौल बनेगा. इस कारण यहां के सभी लोग मेरे साथ हैं.

आप उपलब्धियों की बात कर रहे हैं, लेकिन आपके क्षेत्र से जयपुर-दिल्ली को जोड़ने वाला हाईवे भी जाता है. सड़कों को लेकर क्या प्रोग्रेस रही?
साल 2009 में नेशनल हाईवे का टेंडर हुआ और अक्टूबर 2011 तक यह बनकर तैयार हो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ 2014 में 19 फ्लाईओवर तैयार नहीं हुए थे ट्रेफिक जाम रहता था एक्सीडेंट होते थे लोग परेशान होते थे, जान भी जाती थी. साल 2014 से अभी तक हमने सभी 19 फ्लाईओवर बनवा दिए हैं. एक फ्लाईओवर शाहपुरा में है जिस पर काम और हो रहा है. हमने नए रोड मंजूर कराए. 90 फ़ीसदी से ज्यादा काम सर्विस लेन पर पूरा हो चुका है. कोटपूतली के बीडीएम अस्पताल के सामने फ्लाईओवर उतर रहा था यह योजना बनाने वालों की सोच पर सवाल उठाता है कि उसमें फ्लाईओवर से उतर कर गाड़ी कैसे जाएगी? कोटपूतली में सब्जी मंडी में ट्रक जाने का कोई रास्ता नहीं है. उसके सामने भी फ्लाईओवर उतर रहा है ना कोई अंडरपास बनाया. पावटा में भी फ्लाईओवर की जरूरत थी लेकिन नहीं बनाया. गांव को दो हिस्सों में बांट दिया लेकिन कनेक्टिविटी नहीं छोड़ी. अब हम 20 फुट ओवरब्रिज लेकर आए हैं, जिससे स्कूल जाने वाले विद्यार्थी और महिलाएं सड़क पार कर सकें. मनोहरपुर दौसा नेशनल हाईवे हमने तैयार करा दिया. केंद्र सरकार से पैसे लाकर कई बड़ी सड़कें बनवाई. पावटा-नरेना सड़क भी इसमें शामिल है. सड़कों, स्कूलों, खेल, युवाओं के लिए मैनें खूब काम कराए. हमारी सरकार ने महिलाओं के लिए विशेष काम कराए. गैस कनेक्शन दूर की बात होती थी लेकिन अब इनका जीवन बदला है. महिलाए अब घर के काम के साथ आमदनी में भी सहयोग देने लगी हैं. शौचालय की स्थितियां भी सही नहीं थीं लेकिन मोदी सरकार ने महिलाओं को मान-सम्मान दिया है. यही कारण है कि पूरा देश देख रहा है कि नारे लगाने वाले, बड़ी-बड़ी बातें करने वाले कौन लोग होते हैं और काम करने वाले कौन लोग होते हैं?

कोई ऐसा भी काम जो अधूरा रह गया हो?
हम तो खुद बोल रहे हैं कि जो काम 50-60 साल में नहीं हुआ वह सिर्फ 5 साल में पूरे नहीं हो सकते लेकिन हमने जो दिशा ली है वह सही दिशा है और उस पर हम लगातार ईमानदारी से काम कर रहे हैं. 

काम हुआ है और आपके इतने दावे हैं तो हर लोकसभा क्षेत्र में प्रत्याशी का चेहरा चुनाव में आगे होगा या मोदी का चेहरा?
चुनाव में बीजेपी हर कार्यकर्ता पीएम मोदी का चेहरा है. हम सब जब काम करते हैं तो हम अपने टीम कैप्टन के नाम के नीचे काम करते हैं. आखिर जो टीम का कैप्टन होता है वह सही है तो पूरी टीम सही होती है. उसी के तहत पूरे देश में हर कार्यकर्ता मोदी का चेहरा बनकर काम कर रहा है और पीएम में अपनी छवि देखता है. लोग कहते हैं मैं ईमानदार-मेरा प्रधानमंत्री ईमानदार. मेरा पीएम अगर चौकीदारी करता है तो मैं भी चौकीदारी करूंगा. कहीं गलत काम होता तो उसे बताऊंगा. जब पूरे देश में यह माहौल होता तो देश कितना मजबूत होगा? ये भ्रष्टाचारी जितने भी हैं सब भागते हुए दिखाई देंगे.

यह प्रधानमन्त्री मोदी का असर है या पार्टी के कार्यकर्ताओं की सक्रियता कि सोश्यल मीडिया पर सभी चौकीदार का साथ देने की मुहिम में जुटे हैं?
दुर्भाग्य यह है कि इतने लंबे समय से लोग लीड बाय एग्ज़ाम्पल को भूल गए. भारतीय सेना अगर अच्छा काम करती है तो वहां लीडरशिप बाय एग्ज़ाम्पल होती है. सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करने से अपनी टुकड़ी के पीछे खड़े होने से हमला नहीं होता.आपको सबसे आगे खड़ा होना होता है और हमले में सबसे आगे जाना होता है. आपको खुद जिम्मेदारी निभानी होगी तभी हर जवान वह ज़िम्मेदारी निभा सकता है. ... वही काम आज भारत के प्रधानमंत्री कर रहे हैं.  लीड बाय एग्जांपल की तर्ज पर पीएम काम कर रहे हैं और जब वे ऐसा करते हैं तो लोगों के मन में शंका पैदा करने की कोशिश की जाती है. दूसरों की तरफ से यह भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है. पीएम और उनकी सरकार की बराबरी तो यह लोग अपने सपनों में भी नहीं कर सकते. विपक्ष तो उन्हें रोकने के लिए भ्रम फैला रहा है.  फेक न्यूज़ फैलाई जा रही है. इसमें सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि देश के बाहर की ताकतें भी जुटी हुई हैं. कांग्रेस भी पाकिस्तान की भाषा बोल रही है. कभी कभी फर्क ही नहीं पता लगता यह कांग्रेस बोल रही है या पाकिस्तान की सेना बोल रही है. जैसे ही एयर स्ट्राइक हुई उस दिन सब लोग भारत की सेना के साथ और वायु सेना के साथ अपने आप को बता रहे थे और 2 दिन बाद वही लोग सबूत मांग रहे थे कि कहां बम गिराए. .. अगर सबूत मांग रहे तो साथ कैसे हो? अगर ईवीएम के सबूत देखने के लिए आप लंदन जा सकते हैं तो फिर एयर स्ट्राइक के सबूत देखने के लिए बालाकोट भी चले जाइए.

लेकिन विपक्ष कहता है कि बीजेपी एयर स्ट्राइक का राजनीतिकरण करते हुए माइलेज लेने की कोशिश कर रही है.
एयर स्ट्राइक का राजनीतिकरण तो कांग्रेस कर रही है. आतंकी हमले देश में कई वर्षों से हो रहे हैं लेकिन उनका जवाब हम कैसे देते हैं इसकी प्रक्रिया पीएम ने बदल दी. उन्होंने कहा था कि जिसे जो भाषा समझ में आती है, उसे उसी तरह जवाब देना चाहिए. भारत पहली बार आतंक की जड़ पर हमला करके आ रहा है और यह लोग सबूत मांग रहे हैं. यह कितना बड़ा बदलाव है? लेकिन यह लोग सबूत मांग रहे हैं. तो राजनीतिकरण इसमें कौन कर रहा है? यह भारत की सेना है और हम सबकी रक्षा कर रही है. सेना देश की रक्षा कर रही है ना कि बीजेपी की. कांग्रेस वाले भी इसलिए सुकून से सोते हैं क्योंकि भारत का प्रधानमंत्री एक ऐसा फैसला लेता है जिससे भारत सुरक्षित हो भाजपा नहीं.

पीएम अपने तरीके से काम करते हैं और इसके चलते विपक्ष भी सवाल उठाता है. इन दिनों कांग्रेस की चुनावी सभाओं में खुद मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत सवाल उठाते हैं कि अगर बीजेपी की सरकार बनी तो देश में अगले पचास साल तक चुनाव नहीं होंगे.
कांग्रेस में सबसे ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग झूठ की ही करी है. झूठ बनाने में कांग्रेस सबसे ज्यादा माहिर है क्योंकि यह मोदी को ना तो पकड़ सकते हैं ना उनके काम की बराबरी कर सकते हैं इसलिए हर जगह झूठ और भ्रम फैलाने में लगे हुए हैं. पिछले दिनों कांग्रेस आईटी सेल एक बड़े पदाधिकारी ने गलत बातें फैलाईं. अब उन पर एफआईआर हुई है. कांग्रेस तो एससी-एसटी का आरक्षण खत्म करने और दूसरे मुद्दों को लेकर भी झूठ फैला रही है. इनके साथ सीएजी, सुप्रीम कोर्ट नहीं खड़ा. यह पार्लियामेंट में भी चर्चा नहीं कर सकते. उनके पास कोई मुद्दा नहीं है संसद में चर्चा के लिए. फ्रांस के राष्ट्रपति भी इनको दुत्कारते हैं. जब यूपीए सरकार थी तब आतंकियों को यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की बैन लिस्ट में शामिल कराने कोशिश की गई थी लेकिन तब एक भी राष्ट्र भारत के साथ नहीं खड़ा था, जबकि आज पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है.

चुनाव से पहले बीजेपी में फूट दिख रही है. अर्जुन मेघवाल का विरोध करते हुए देवीसिंह भाटी ने इस्तीफा दे दिया. पूर्व मुख्यमन्त्री वसुंधरा राजे भी अपने आपको अलग-थलग महसूस कर रही हैं. क्या पार्टी वाकई में एकजुट है चुनाव में जाने से पहले?
बीजेपी एक लोकतांत्रिक पार्टी है. यहां सब के विचार लेकर ही आगे चला जाता है. टिकट वितरण से पहले अगर चर्चाएं हो रही हैं तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है. टिकट वितरण होने के बाद हर कार्यकर्ता पूरी तरह से देश को याद करके कमल और तिरंगे के लिए पूरे मन से जुट जाएगा. जहां तक बात वसुंधरा जी की है तो वसुंधरा राजे प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं. विज़नरी चीफ मिनिस्टर रहीं और सब जानते हैं कि जब वे एक बार फैसला कर लेती हैं तो उसे पूरा करके रहती हैं. उन्होंने कई बड़े काम किये. आज हर गांव में एक-एक फीट की सीमेंट की सड़क है.  उन्होंने भविष्य को देखते हुए पढ़े-लिखे सरपंच बनाने की कवायद की. पंचायती सरकार पारदर्शी हो और वहां पढ़ा-लिखा सरपंच हो तो अच्छी शुरूआत हो सकती है. कांग्रेस ने उस फैसले को भी वापस ले लिया. जल स्वावलंबन का काम भी बड़ा था. वसुंधरा राजे एक बड़ी लीडर हैं और उन्हें हमेशा बड़ी जिम्मेदारी मिलती रहेगी.

सभी काम, ज़िम्मेदारी और विज़न के बावजूद विधानसभा चुनाव से पहले नारा लगता रहा कि वसुंधरा तेरी खैर नहीं और मोदी तुझसे बैर नहीं. उसका नतीजा विधानसभा चुनाव में सभी ने देखा. क्या लोग अभी भी उस नारे के साथ चलेंगे?
कांग्रेस वाले विधानसभा चुनाव में लोगों से यह कहकर वोट मांग रहे थे कि 2019 में देख लेना और मोदी जी से साथ रह लेना. उन्हें पता है कि जनता मोदी के साथ है. कांग्रेस को अपने नेता से कोई मतलब नहीं. लोगों ने विधानसभा में कांग्रेस को कह दिया था कि लोकसभा के समय मत आना. इन्होंने विधानसभा में भ्रम फैलाया और इसलिए कांग्रेस जीत पाई. लेकिन अब लोगों का वह भ्रम टूट गया और सच्चाई आने के बाद लोगों में गुस्सा है जो कांग्रेस को झेलना पड़ेगा.

राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में लोग आपमें काफी संभावनाएं देखते हैं. राजनीतिक गलियारों में भी आपको लेकर चर्चा काफी होती है. आज से दस साल बाद अपने आपको कहां देखते हैं?
अगर इसी तरह 10 साल बाद भी हम कहीं साथ बैठ कर बात कर रहे होंगे तो मैं खुशनसीब होऊंगा. एक जिम्मेदारी के साथ अगर मैं काम करता हूं तो उससे बड़ा तोहफा मेरे लिए और कुछ नहीं हो सकता. एक सैनिक रहा हूं, एक खिलाड़ी रहा हूं हर वक्त मैंने देश के लिए काम किया है. आगे भी इसी समर्पण भाव से काम करता रहूंगा आखिरी दम तक.

मुख्यमन्त्री बनने के बारे में सोचा है कभी?
जब मैं सेना में था तो मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं टीवी में आऊंगा. मैं टीवी पर आया. जब खिलाड़ी के रूप में टीवी पर आया तो सोचा नहीं था कि मैं राजनीति में जाऊंगा, मुझे वह अवसर भी मिला. मैं उस पल के लिए जीता हूं और उस पल के लिए मैं पूरा समर्पित हो जाता हूं. उसके आगे कुछ हो या ना हो, वह मेरा लक्ष्य नहीं है. एक सैनिक का लक्ष्य होता है कि सामने जो ऑब्जेक्टिव है, उस पर फतह हासिल करना. अगर वह तब प्लानिंग करने लगे कि इस पर मैं जाऊंगा, गोली लग गई तो जनरल कैसे बनूंगा? तो सेना नहीं लड़ सकती. मैं सैनिक हूं, और सैनिक ही रहूंगा.