जयपुर: निर्वाचित अध्यक्ष बनते ही सतीश पूनिया ने कही खरी-खरी

मनोनीत से निर्वाचित प्रदेशाध्यक्ष बनने के तत्काल बाद पूनिया ने कहा कि अब कार्यकर्ता को अनुशासन के साथ काम में जुटना होगा.

जयपुर: निर्वाचित अध्यक्ष बनते ही सतीश पूनिया ने कही खरी-खरी
सतीश पूनिया, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष

शशि मोहन, जयपुर: बीजेपी के अध्यक्ष पद पर सतीश पूनिया के निर्वाचन के बाद पूनिया को पार्टी नेताओं की तारीफ़ के साथ ही नसीहत भी मिली. पूनिया ने भी अपनी बात कार्यकर्ताओं को खरी-खरी कह दी. मनोनीत से निर्वाचित प्रदेशाध्यक्ष बनने के तत्काल बाद पूनिया ने कहा कि अब कार्यकर्ता को अनुशासन के साथ काम में जुटना होगा. उन्होंने कहा कि अब तक जिसको जो करना था उसने वह कर लिया, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा.

सतीश पूनिया ने अपने निर्वाचन के साथ ही यह जता भी दिया है कि अब वे निर्वाचित अध्यक्ष हैं. उन्होंने साफ कहा कि पिछले ढाई महीने में उन्होंने मनोनीत प्रदेशाध्यक्ष के रूप में काम करते हुए हर कार्यकर्ता को काम करने की छूट दी और यह देखा भी कि कौन कैसा काम करता है? पूनिया ने भले ही अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के बीच यह मैसेज दिया हो कि उनके टाइटल में प्रदेशाध्यक्ष का पद जुड़ने के अलावा कुछ भी नहीं बदला है, लेकिन उनके इस बयान से पार्टी के कार्यकर्ता और नेता दोनों समझ गए हैं कि जो अब तक चलता रहा और जैसा चलता रहा वैसा अब नहीं चलेगा. 

उनके भाषण के दौरान सभी के जहन में यह सवाल उठा कि आखिर सतीश पूनिया का यह मैसेज किसके लिए था? तो उसका जवाब भी उन्होंने अपने भाषण में ही दे दिया. पूनिया का यह बयान सबसे पहले तो खुद के लिए था. यही कारण है कि उन्होंने पहले खुद के काम का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्होेंने अपना इस्तीफ़ा अपनी पत्नी को दे दिया और कहा है कि कभी वे कोई गलत काम करें तो यह इस्तीफ़ा वी. सतीश को दे दिया जाए.

पूनिया का दूसरा इशारा अपनी पार्टी के कार्यकर्ता को था. इसीलिए उन्होंने भले ही मज़ाकिया लहजे में कहा हो लेकिन अपने कार्यकर्ताओं से भी कह दिया कि आज खिलाया हलवा मुफ्त में नहीं था. आने वाले चार साल तक राज्य सरकार की कमजोरियों को उजागर करने और विरोध प्रदर्शन करने के लिए उन्हें भी संगठन के साथ खड़ा होना होगा.

बीजेपी के निर्वाचित प्रदेशाध्यक्ष का तीसरा इशारा सरकार की तरफ भी था. अपने कार्यकर्ताओं के साथ ही उन्होंने सरकार को भी चेताते हुए कह दिया कि अब वे बीजेपी को जिताने के लिए काम करेंगे. लिहाजा सरकार ने हल्की सी भी ढिलाई बरती तो वे घेरने से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि सदन में सरकार को घेरने का काम प्रतिपक्ष के नेता और उपनेता की अगुवाई में होगा तो सड़क पर सारे कार्यकर्ता मिलकर घेरेंगे.