कोटपूतली: अतिक्रमण और सोशल डिस्टन्सिंग को लेकर SDM सख्त, व्यापारियों ने जताया विरोध

लम्बे वर्षों से कोटपूतली व पावटा के बाजारों में भारी अतिक्रमण की मार रही है. व्यपारियों व धड़ी ठेलों वालों ने मुख्य सड़कों तक भारी अतिक्रमण कर रखा है. 

कोटपूतली: अतिक्रमण और सोशल डिस्टन्सिंग को लेकर SDM सख्त, व्यापारियों ने जताया विरोध
एसडीएम सुनीता मीणा पिछले सात-आठ दिनों में बाजार व मुख्य रास्तों की स्थिति को पैदल घूम कर देखा.

अमित यादव, कोटपूतली(जयपुर): लम्बे वर्षों से कोटपूतली व पावटा के बाजारों में भारी अतिक्रमण की मार रही है. व्यपारियों व धड़ी ठेलों वालों ने मुख्य सड़कों तक भारी अतिक्रमण कर रखा है. जिसके चलते चौपहिया व दुपहिया वाहन मुख्य मार्गो से नही निकल पाना दुर्भर रहता है. जिस कारण घंटों बाजारों में जाम की स्थित बनी रहती है, लेकिन पिछले कई सालों से नगरपालिका व किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इस ओर कोई ठोस कदम उठाया. 

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अगर उठाया भी है तो राजनैतिक कारणों के चलते उसे रोक दिया गया, लेकिन पिछले 10 दिन पहले आरएएस सुनीता मीणा ने कोटपूतली उपखण्ड कार्यालय पर एसडीएम का पदभार संभाला. एसडीएम ने शहर की लचर व्यवस्था और भारी जाम की स्थित को देख कर व्यपारियों से अतिक्रमण हटाने व कोविड 19 की सरकारी गाइडलाइन की पूरी पालना करने को कहा गया, लेकिन किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी, जिसके बाद एसडीएम ने शक्त रूप अपनाते हुये बाजारों से अस्थाई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करना शुरू की. साथ में बिना मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं करने वाले व्यपारियों व लोगों के चालान काटे.

एसडीएम सुनीता मीणा पिछले सात-आठ दिनों में बाजार व मुख्य रास्तों की स्थिति को पैदल घूम कर देखा. जिसके बाद नगरपालिका के अधिकारियों व कर्मचारियों को खासी लताड़ लगाई. साथ में सभी को दिशा निर्देश दिये. नगरपालिका का जो मुख्य कार्य है उसे बेखूबी से निभाये ना कि इसी और कामों में ध्यान देवे. इसी क्रम में एसडीएम ने कल देर शाम तक पावटा कस्बा व कोटपूतली शहर के मुख्य मार्गो से अतिक्रमण हटाने की फिर से शुरुआत की. इस दौरान पुलिस का जाप्ता व नगरपालिका के कर्मचारी साथ थे. अतिक्रमण की कार्रवाई के दौरान कुछ व्यपारियों ने इसका विरोध किया, लेकिन एसडीएम ने साफ तरीके से समझाया अब ये तरीका मेरे रहते नहीं चलेगा. 

कोई भी व्यापारी अपने प्रतिष्ठान के आगे एक भी सामान नहीं रखेगा. अपना सामान अपनी दुकानों के अंदर रखे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो तीन दिन बाद सभी वर्ग की बैठक बुलवाया कर समझाया जायेगा, जिसके बाद शहर में अतिक्रमण स्वतः नहीं हटाया गया तो शक्त कार्रवाई की जायेगी. 

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