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जयुपर: डॉक्टर्स की हड़ताल के समर्थन में SMS अस्पताल, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध

जयपुर एसएमएस अस्पलात के विरोध कर रहे डॉक्टर्स ने पश्चिम बंगाल में डॉक्टर्स पर हुए हमले की निंदा की है. डॉक्टर्स ने दो घंटे कार्य बहिष्कार कर विरोध जताया.

जयुपर: डॉक्टर्स की हड़ताल के समर्थन में SMS अस्पताल, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
कोलकाता मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों पर हमले से देशभर के डॉक्टरों में रोष है.

आशुतोष शर्मा/जयपुर: कोलकाता मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों पर हमले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. कोलकाता में हुई इस घटना के विरोध में राजस्थान समेत देशभर में डॉक्टरों में रोष है. शुक्रवार को देशभर में डॉक्टरों ने 'काला दिवस' मनाया और अस्पतालों में दो घंटे ओपीडी बंद रखकर विरोध जताया जा रहा है. वहीं शनिवार को जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर्स काली पट्टी बांधकर विरोध जताया.

वहीं जयपुर एसएमएस अस्पलात के विरोध कर रहे डॉक्टर्स ने पश्चिम बंगाल में डॉक्टर्स पर हुए हमले की निंदा की है. डॉक्टर्स ने एक ओर जहां दो घंटे कार्य बहिष्कार कर विरोध जताया तो वहीं इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं भी जारी रखी. जार्ड पदाधिकारियों ने कहा कि लगातार डॉक्टर्स पर हमले बढ़ रहे हैं. अस्पतालों में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ गया है और असामाजिक तत्व ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे है.

एसएमएस अस्पलात के विरोध कर रहे डॉक्टर्स ने कहा कि हर बार ऐसी घटनाएं होने पर सरकार सिर्फ मामूली कार्रवाई कर देती है, लेकिन अब स्थाई समाधान करने की जरूरत है. आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल के कोलकाता मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों पर हमले से देशभर के डॉक्टरों में रोष है. दिल्ली एम्स सहित देश भर के सरकारी और निजी डॉक्टरों ने शुक्रवार को एक दिन की हड़ताल में शामिल होने की अपील की थी.

वहीं दिल्ली के बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों की हड़ताल में हजारों की संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. इन डॉक्टरों के हड़ताल में जाने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से हिंदुस्तान के कई हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है. पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर लोगों को इलाज न मिलने से कई तरह की परेशानी हो रही है. 

साथ ही अस्पतालों में ओपीडी कार्य बहिष्कार से मरीजों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. SMS अस्पताल और दुसरे अस्पतालों में रेजिडेंट्स के दो घंटें के कार्य बहिष्कार से शुरुआती घंटें में असर पड़ा लेकिन बाद में सीनियर चिकित्सकों ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली और मरीजों को राहत मिली.