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उदयपुर: सिर्फ कागजों पर बांसवाड़ा की रेलवे लाइन, लोगों को 70 साल से है इंतजार

इलाके के पूर्व सांसद तारा चंद भगोरा ने बताया कि जब 2011 में ये योजना तैयार हुई थी. उस वक्त इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार को 50-50 फीसदी हिस्सेदारी देनी थी

उदयपुर: सिर्फ कागजों पर बांसवाड़ा की रेलवे लाइन, लोगों को 70 साल से है इंतजार
इस रेलवे लाइन का 49 किलोमीटर हिस्सा मध्यप्रदेश में है.

बांसवाड़ा: देश की आजादी के 70 सालों के बाद भी राजस्थान का बांसवाडा इलाका रेलवे लाइन की राह देख रहा है. इलाके के कई बुजर्ग इलाके में रेल को देखने के लिए केंद्र सरकार की ओर देख रहे हैं. इलाके के नए सांसद कनकमल कटारा से जब जी न्यूज डॉट कॉम ने रेलवे लाइन पर रूख पूछा तो उन्होंने बताया कि इलाके की सबसे बड़ी समस्या पानी की है और रेलवे लाइन बिछ जाती है तो पानी भी रेलवे से पहुंचाया जा सकता है.

देश के लगभग सभी इलाके रेलवे से जुड़े हैं, नार्थ ईस्ट का इलाका भी मोदी सरकार ने पिछले पांच सालों में रेलवे से जोड़ दिया गया है. लेकिन इस आदिवासी इलाके में बहुत से लोगों ने आज तक रेल नहीं देखी है. 2011 में यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बांसवाडा-डुंगरपुर रेलवे लाइन बनाने की घोषणा की थी, लेकिन ये घोषणा 2014 तक सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सिमट कर रह गई. 

हालांकि बाद में इस योजना पर काम तो शुरू हुआ लेकिन वो काम भी मुआवजे की रकम और उसको बांटने के झगड़े में ही उलझ गया. लिहाजा रेलवे लाइन का काम पूरा नहीं हो सका. हालांकि इस दौरान इस 192 किलोमीटर लंबे ट्रैक को बनाने की लागत दोगुनी से ज्य़ादा हो गई है. 

इलाके के पूर्व सांसद तारा चंद भगोरा ने बताया कि जब 2011 में ये योजना तैयार हुई थी. उस वक्त इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार को 50-50 फीसदी हिस्सेदारी देनी थी, लेकिन बाद में वसुंधरा सरकार ने इस बात से अपनी और का हिस्सा देने को मना कर दिया, इस वजह से पूरी योजना ही अटक गई. इसी वजह से 2083 करोड़ रुपये की योजना अब 4200 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है. 

इस रेलवे लाइन का 49 किलोमीटर हिस्सा मध्यप्रदेश में है, जबकि बाकी का राजस्थान में है. यह लाइन रतलाम के पास दिल्ली-मुंबई रेल ट्रैक से जुड़ जाएगी. योजना में कुल 500 से ज्य़ादा ओवर ब्रिज बनाए जाने है. बहरहाल दो सरकार की अदलाबदली के बाद भी इलाके में लोगों की आंखे रेल लाइन नहीं देख पाई है, इसलिए अब लोगों को मोदी सरकार से उम्मीद है कि देश की आजादी के 75 साल में वो भी रेल के जरिए यह उत्सव मना पाएंगे.