Maharashtra Political Crisis: सियासी संकट के बीच किस ओर करवट लेगी महाराष्ट्र की राजनीति, सरकार बचेगी या गिरेगी? ये हैं संभावनाएं
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Maharashtra Political Crisis: सियासी संकट के बीच किस ओर करवट लेगी महाराष्ट्र की राजनीति, सरकार बचेगी या गिरेगी? ये हैं संभावनाएं

Maharashtra Political Crisis: महाविकास अघाड़ी (Maha Vikas Aghadi) के समर्थन में 169 विधायक थे, जिसमें से 46 विधायकों के बागी होने से ये आंकड़ा 123 तक पहुंच गया है. यानी की सरकार अल्पमत में है, जो कि सरकार गिरने का सीधा संकेत है.

Maharashtra Political Crisis: सियासी संकट के बीच किस ओर करवट लेगी महाराष्ट्र की राजनीति, सरकार बचेगी या गिरेगी? ये हैं संभावनाएं

Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र में मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए ये जानना जरूरी है कि अब महाराष्ट्र में सरकार बचाने या फिर नई सरकार के गठन को लेकर क्या संभावनाएं हैं? ऐसे में आपको बता दें कि एकनाथ शिंदे के दावे के मुताबिक उनके पास 46 विधायक हैं यानी की सरकार बनाने के समर्थन का जो आंकड़ा है, उसे उन्होंने शिवसेना के खाते से छीन लिया है.

गिरेगी MVA सरकार?

बता दें कि महाविकास अघाड़ी (Maha Vikas Aghadi) के समर्थन में 169 विधायक थे, जिसमें से 46 विधायकों के बागी होने से ये आंकड़ा 123 तक पहुंच गया है. यानी की सरकार अल्पमत में है, जो कि सरकार गिरने का सीधा संकेत है.

क्या कहता है नंबर गेम?

गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे के पास करीब 36 विधायक शिवसेना के हैं और दो तिहाई बहुमत के लिए 37 विधायक चाहिए. मौजूदा परिस्थिति से साफ है कि इस आंकड़े तक पहुंचने में एकनाथ शिंदे को कोई खास दिक्कत नहीं होगी. इस आंकड़े को हासिल करने के बाद एकनाथ शिंदे अपना अलग गुट बना सकते हैं और बीजेपी को समर्थन देकर नई सरकार स्थापित करा सकते हैं. फिलहाल बीजेपी के पास 106 विधायक हैं, साथ ही 7 निर्दलीय उम्मीदवारों का भी साथ है.

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इस केस में बच सकती है उद्धव सरकार

अगर MVA दल एकनाथ शिंदे को मनाने में सफल होते हैं तो उद्धव ठाकरे की सरकार के गिरने का खतरा टल सकता है. हालांकि इसकी गुंजाइश कम ही नजर आ रही है, चूंकि उद्धव ठाकरे, रश्मि ठाकरे, संजय राउत और मिलिंद नार्वेकर से अब तक हुई बातचीत बेनतीजा रही है.

राज्यपाल के पाले में कब जाएगी गेंद?

इसके अलावा अगर दो तिहाई आंकड़ा इकट्ठा करने में एकनाथ शिंदे असफल होते हैं तो उनकी और शिवसेना के विधायकों की सदस्यता जा सकती है. फिर भी सरकार अल्पमत में रहेगी ऐसी परिस्थिति में विपक्ष विशेष सत्र बुलाने की मांग कर अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है, जिसपर राज्यपाल फ्लोर टेस्ट करवा सकते हैं. जहां सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाएगी. चूंकि शिवसेना के अलावा जो दूसरे निर्दलीय विधायक एकनाथ शिंदे के साथ हैं वो सरकार के पक्ष में वोट नही करेंगे, निर्दलीय विधायक का आंकड़ा करीब 10 है.

किस ओर है भाजपा?

चलिए अब बीजेपी की रणनीति पर भी बात करते हैं. बता दें कि महाराष्ट्र में BJP फिलहाल Wait एंड Watch (Wait and Watch) की स्थिति में है. पार्टी का मानना है कि राज्य मंत्रिमंडल अगर विधानसभा भंग करने की सिफारिश करता है तो राज्यपाल उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होंगे. वे अपने विवेक का इस्तेमाल करेंगे. महाराष्ट्र में  चल रही उठापटक पर बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व की पैनी नजर है.

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प्रदेश प्रभारी और पार्टी महासचिव सी टी रवि ने संगठन महासचिव बी एल संतोष से मुलाकात कर वहां के राजनैतिक हालात पर चर्चा की है. वहीं उद्धव सरकार द्वारा विधानसभा भंग करने की सिफारिश पर भी दोनों के बीच चर्चा हुई. वैसे भाजपा सूत्रों का मानना है कि राज्य सरकार राज्य विधानसभा को भंग नहीं कर सकती है. वे केवल इसके विघटन की सिफारिश कर सकते हैं.

क्या कहता है संविधान?

यह राज्यपाल को तय करना है कि राज्य सरकार की सिफारिश को मानें या न मानें. संविधान के अनुसार राज्यपाल मौजूदा स्थिति का आंकलन करेंगे और निर्णय लेंगे. शिवसेना नेताओं द्वारा विधानसभा भंग करने की बात कहना, हकीकत से कोसों दूर हैं. बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि जो हालात मुंबई में है उसको देखते हुए उद्धव सरकार का गिरना तय है. ऐसे में महाराष्ट्र में नए समीकरण और तालमेल से बड़ा परिवर्तन जल्द दिख सकता है.

भाजपा की भी हुई 'खेला' में एंट्री

यहां गौर करने वाली बात ये भी है कि महाराष्ट्र के BJP अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल अन्य 4 विधायकों के साथ गुवाहटी रवाना हो गए हैं. माना जा रहा है कि वो बागी विधायकों के साथ मुलाकात कर सकते हैं.

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