उत्तराखंड की लाइफ लाइन मानी जाने वाली 108 सेवा की हालत खराब, 900 कर्मचारियों को नोटिस

पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लाइफलाइन 108 सेवा से करीब 900 फील्ड कर्मचारियों को नौकरी से हटाया जा रहा है. 

उत्तराखंड की लाइफ लाइन मानी जाने वाली 108 सेवा की हालत खराब, 900 कर्मचारियों को नोटिस

देहरादून​: पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लाइफलाइन 108 सेवा से करीब 900 फील्ड कर्मचारियों को नौकरी से हटाया जा रहा है. 11 साल बाद 108 आपातकालीन सेवा का टेंडर जीवीके कंपनी से अब कैम्प कंपनी को मिल गया है. नई कंपनी ने पुराने फील्ड कर्मचारियों को लेने से इंकार के बाद जीवीके कंपनी ने कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का नोटिस दे दिया है. 

900 कर्मचारियों को एक साथ थमाया नोटिस
उत्तराखंड की लाइफलाइन 108 आपातकालीन सेवा इन दिनों सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. पहले वित्तीय संसाधनों के कारण 108 सेवा को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पिछले एक महीने से कर्मचारियों को सैलरी नही मिली है. कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित है. कर्मचारियों ने कहा कि वे कई वर्षो से 108 सेवा से जुड़े है और अब इस उम्र में परिवार को कैसे पालेंगे और कहा नई नौकरी  खोजेंगे.

108 सेवा के प्रभारी मनीष टिंकू ने कहा कि इस वर्ष उनकी कंपनी एक लाख 66 हजार रु प्रति एम्बुलेंस का डाला और जिस कंपनी को टेंडर अलॉट हुआ उसने 1 लाख 18 हजार में टेंडर डाला था. मनीष टिंकू ने कहा कि नई कंपनी ने पुराने कमर्चारियों को लेने से इंकार के बाद वे सभी पुराने कर्मचारियों को नोटिस दे रहे है. उन्होंने कहा कि नई कंपनी 1 मई से पहले मैनेजमेंट अपने हाथ में ले लेगी. 

कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित
108 आपातकालीन सेवा में कार्यरत फील्ड कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित है.  पिछले 11 वर्षों से 108 सेवा में कार्यरत अनुज बताते है कि जब उन्होंने अपनी नौकरी की शुरआत की थी तो उन्हें साढ़े 5 हजार सैलरी मिलती थी और करीब 18 हजार रु मिलते है. दिनेश कुमार देहरादून जिले अति दुर्गम क्षेत्र त्यूणी में खुशियों की सवारी से जुड़े है. दिनेश ने कहा कि उन्हें नोटिस मिल चुका है. अपने परिवार की चिंता उन्हें सता रही है. परमवीर पंवार 108 सेवा के चालक है और पिछले 3 सालों से 108 सेवा से जुड़े है. 

आईसीयू से गुजर रही है पहाड़ की लाइफलाइन 108 सेवा
2008 में 108 आपातकालीन सेवा की शुरुआत उत्तराखंड में हुई थी. उस समय सत्यम कंपनी ने इस सेवा का प्रबंधन संभाला था लेकिन कुछ ही साल बाद सत्यम कंपनी दिवालिया हो गई और जीवीके कंपनी ने मैनेजमेंट अपने हाथ में ले लिया. करीब 11 सालों तक 108 सेवा संचालित करने के बाद अब इस कंपनी का टेंडर खत्म हो गया है. लेकिन पिछले 2 सालों से 108 सेवा खुद आईसीयू में है. कई बार 108 सेवा के पहिये वित्तीत संसाधनो के कारण थम गई. सरकार और जीवीके कंपनी के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी. पहाड़ो में पेट्रोल ना मिलने से अभी भी 108 सेवा. संचालित करने में दिक्कते आ रही है. 

नई कंपनी के पास नही है 108 सेवा संचालित करने का कोई भी अनुभव
करीब 11 साल बाद 108 आपातकालीन सेवा का टेंडर ऐसी कंपनी को जारी किया गया है जिसे इसका कोई अनुभव नही है. 108 सेवा में वर्तमान में 140 गाड़िया है जिसमें एक वोट एम्बुलेंस भी है और 95 खुशियों की सवारी है. नई कैम्प(कंपनी कम्युनिटी एक्शन मोटिवेशन प्रोग्राम) को यह पहला मौका होगा जब वो आपातकालीन सेवा से जुड़ी है. नई कंपनी ने कम दरों पर टेंडर डाला है और इसीलिए कम सैलरी पर कर्मचारियों को रखने की तैयारी है या फिर पुराने कर्मचारियों से कम सैलरी पर काम करने के लिए कहा जा रहा है जबकि राज्य सरकार ने अनुबंध के समय निर्देश भी जारी किए थे कि पुराने कर्मचारियों को नही हटाया जाएगा.