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बलरामपुर के अस्पताल का बेरहम चेहरा, मरीज को 14 दिन जमीन पर सुलाया, पर इलाज न किया

बलरामपुर जिले में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की संवदेनहीनता का मामला सामने आया है. एक मानसिक रूप से बीमार मरीज को 14 दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में मानसिक बीमारी का इलाज ना होने के बावजूद उसे 14 दिनों से अस्पताल में रखा गया. 

बलरामपुर के अस्पताल का बेरहम चेहरा, मरीज को 14 दिन जमीन पर सुलाया, पर इलाज न किया

बलरामपुर: जिले में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की संवदेनहीनता का मामला सामने आया है. एक मानसिक रूप से बीमार मरीज को 14 दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में मानसिक बीमारी का इलाज ना होने के बावजूद उसे 14 दिनों से अस्पताल में रखा गया है. सिर्फ इतना ही नहीं भर्ती होने के बाद मानसिक तौर पर बीमार मरीज के साथ भेदभाव करते हुए उसे बेड पर ना लिटाकर वार्ड के कोने में फर्श पर लिटा दिया गया जिसके कारण उसकी जान पर बन आई. मामला है संयुक्त जिला चिकित्सालय का. सड़क किनारे बीमार हालत में पड़े एक अज्ञात बुजुर्ग को उतरौला कोतवाली की पुलिस ने 3 अक्टूबर को अस्पताल में इलाज के लिए इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया था.

बाद में इमरजेंसी से अस्पताल के वार्ड में मरीज को भेज दिया गया. 14 दिन से अस्पताल के 38 नम्बर पुरूष वार्ड में फर्श पर लेटा ये मरीज मानसिक तौर पर बीमार बताया जा रहा है. संवेदनहीनता इतनी कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद से ना तो डॉ डाक्टर ने मरीज की सुध ली और ना ही किसी कर्मचारी ने. किसी ने भी मरीज को बेड पर लिटाने की जहमत नहीं उठाई.

रिकार्ड की मानें तो अस्पताल में 2 सप्ताह से मरीज का इलाज किया जा रहा है. जबकि अस्पताल में मानसिक रोग के डॉक्टर ही नहीं है. अब सवाल उठता है कि जब डॉक्टर ही नहीं तो मरीज को आखिर 14 दिन से अस्पताल में क्यों रखा गया. मानसिक तौर पर बीमार मरीज बेड नम्बर 8 के नीचे 14 दिनों से पड़ा है. लेकिन किसी ने इसकी परवाह ही नहीं है.

16 अक्टूबर को मामला ज़ी मीडिया के संज्ञान में आते ही अस्पताल में हड़कंप मच गया आनन फानन में वहां के कर्मचारियों ने बीमार मरीज को फर्श से उठाकर बेड़ पर लिटाया. 14 दिन से अस्पताल में भर्ती इस मरीज की जानकारी अस्पताल के सीएमएस को भी नहीं थी.

मामला सामने आने के बाद हरकत में आये मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एन.के. बाजपेई ने आनन फानन में मरीज को 108 एम्बंलेंस से जिला मेमोरियल चिकिसालय के मेंटल सेल के लिए रेफर कर दिया. यदि वहां मरीज का इलाज संभव नहीं हुआ तो उसे केजीएमसी लखनऊ के लिए रेफर किया जाएगा.

सवाल ये है कि जब अस्पताल में मानसिक चिकित्सक ही नहीं है तो उसे अस्पताल में भर्ती क्यों किया गया और यदि मरीज को भर्ती किया गया तो उसका ख्याल क्यों नहीं रखा गया. सही इलाज ना मिल पाने से मरीज की जो जान पर बन आई उसका जिम्मेदार कौन है और जिम्मेदारों पर स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करेगा.

संयुक्त जिला चिकित्सालय, बलरामपुर के सीएमएस डॉ. एन.के. बाजपेई ने बताया कि मरीज यहां कुछ दिनों से भर्ती है, मेंटली डिसेबल्ड है जिसे हम लोग पागल कहते हैं. वह कहीं भी लेट सकता है लेकिन हां ध्यान रखना चाहिए था, मेरे संज्ञान में आया है, मैने उसे जिला मेमोरियल चिकित्सालय में रेफर करने के लिए कहा है.

108 एम्बंलेंस से उसको वहां छोड़ देगी. वहां मरीज की काउंसलिंग होगी. यदि वहां ठीक होने लायक होगा तो किया जाएगा नहीं तो उसे केजीएमसी के लिए रेफर कर दिया जाएगा. हमने अपने सभी डॉडाक्टरों को अभी बता दिया है कि जितने इस तरीके के मरीज आते हैं उन्हे भर्ती ना करके रेफर कर दिया जाए.