Budget 2021: जानिए सरकार के पास कहां से आता है पैसा जिससे तैयार होता है देश का बजट
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Budget 2021: जानिए सरकार के पास कहां से आता है पैसा जिससे तैयार होता है देश का बजट

आपको अगर याद हो, पिछले साल का बजट (2020-21)  करीब 30 लाख करोड़ रुपये का था. इस पैसे को देश के हर विभाग ने अलग तरीके से खर्च किया होगा. अब आम व्यक्ति के मन में यह सवाल जरूर उठता होगा कि जिन 30 लाख करोड़ के जीरो काउंट करने में हमें समय लग जाता है, उतना पैसा सरकार लाती कहां से है?

Budget 2021: जानिए सरकार के पास कहां से आता है पैसा जिससे तैयार होता है देश का बजट

नई दिल्ली: देश के बजट से हर किसी की उम्मीदें जुड़ी होती हैं. देशवासी उम्मीद करते हैं कि उन्हें टैक्स में छूट मिल जाए या किसी और तरीके से सरकार उनकी मदद करे, जिससे साल भर जेब पर बुरा असर न पड़े. 1 फरवरी 2021 यानी आज, को भारत का बजट पेश होने वाला है. फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण संसद में आज लोगों को उनकी उम्मीदों का बजट पेश करने वाली हैं. इस बार भी हर सेक्टर के लिए धनराशि का आवंटन होगा. 

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आपको बता दें, खुद वित्त मंत्री सीतारमण ने यह कहा है कि कोरोनावायरस महामारी की वजह से बजट 2021-22 पिछले 100 साल के बजट की तुलना में पूरी तरीके से अलग होगा. इसे देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि इस बार आय और व्यय में बदलाव देखने को मिल सकता है. लेकिन स्थिति कुछ भी हो, हर सेक्टर के विकास के लिए सरकार पैसे देगी ही. 

आपको अगर याद हो, पिछले साल का बजट (2020-21)  करीब 30 लाख करोड़ रुपये का था. इस पैसे को देश के हर विभाग ने अलग तरीके से खर्च किया होगा. अब आम व्यक्ति के मन में यह सवाल जरूर उठता होगा कि जिन 30 लाख करोड़ के जीरो काउंट करने में हमें समय लग जाता है, उतना पैसा सरकार लाती कहां से है? तो हम आपको बताते हैं कि सरकार की आमदनी का जरिया क्या होता है...

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हम जानते हैं कि सरकार को सबसे ज्यादा पैसा टैक्स और रेवेन्यू से मिलता है. इसके अलावा आमदनी का क्या जरिया है, पढ़िए यहां... 

आसान भाषा में समझने के लिए हम उदाहरण के लिए 100 रुपये की बात करते हैं. सरकार को हर 100 रुपये की आमदनी में इन जरियों से पैसे मिलते हैं-
उधार और अन्य देयताएं (Lending and Other Liabilities)- 30 रुपये
निगम कर (Corporation tax)- 18 रुपये
इनकम टैक्स- 17 रुपये
सीमा शुल्क (Custom duty)- 4 रुपये
केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central excise)- 7 रुपये
जीएसटी एवं अन्य कर (GST and other taxes)- 18 रुपये
विभिन्न राजस्व कर (Various revenue taxes)- 10 रुपये
कर्ज के इतर कैपिटल इनकम (Capital income other than debt)- 6 रुपये

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अब सरकार इसी राशि को देश के विभिन्न विभागों को लोक कल्याण के लिए आवंटित करती है. बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों की मदद ले कर एक प्लान तैयार किया जाता है. किस सेक्टर या किस मंत्रालय को कितने पैसे की जरूरत है और उन्हें कितना फंड मिलना चाहिए यह तय करने के बाद सरकार ऐसे राशि खर्च करती है-

उदाहरण के तौर पर हर 100 रुपये का व्यय इस प्रकार है-
ब्याज अदायगी (Interest payment)- 18 रुपये
केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं (Central sector schemes)- 13 रुपये
वित्त आयोग और अन्य अंतरण (Finance Commission and other transfers)- 10 रुपये
करों और शुल्कों में राज्यों का हिस्सा (States' share in taxes and duties)- 20 रुपये
केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं (Centrally sponsored schemes)- 9 रुपये
आर्थिक सहायता (Subsidies)- 6 रुपये
रक्षा (Defence)- 8 रुपये
पेंशन (Pension)- 6 रुपये
अन्य व्यय (Other expenses)- 10 रुपये

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