ये कैसा स्कूल, यहां अपराधियों के साये में बच्चे ले रहे शिक्षा

पौड़ी जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालय ओजली को लॉकडाउन के बाद क्वारंटीन सेंटर बनाकर पौड़ी जेल के कैदियों को रखा जा रहा है. लेकिन दो सितंबर के बाद इस स्कूल में क्लासें भी लगनी शुरु हो गयी. जिससे बच्चे अपराधियों के बीच यहां पढ़ाई करने को मजबूर है.  

ये कैसा स्कूल, यहां अपराधियों के साये में बच्चे ले रहे शिक्षा
स्कूल की फोटो

पौड़ीः उत्तराखंड के पौड़ी का एक स्कूल इन दिनों चर्चा का विषय बना है. क्योंकि यहां कुछ ऐसा हो रहा है जो कोरोनाकाल में ठीक नहीं माना जाएगा. मामला राजकीय माध्यमिक विद्यालय ओजली का है. यहां बच्चे अपराधियों के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि लॉकडाउन के बाद इस स्कूल को क्वारंटीन सेंटर बना दिया गया था. जहां पौड़ी जेल के कैदियों को शिफ्ट किया गया था. अभी भी कैदी स्कूल के अंदर रह रहे हैं. जबकि राज्य सरकार के निर्देश के बाद 2 सितंबर से स्कूल भी खुल गए और अब बच्चे भी पढ़ रहे हैं. यानि एक तरफ बच्चों की क्लासें लग रही है तो दूसरी तरफ कैदी भी स्कूल में रह रहे हैं. 

कैदियों के बीच बच्चे
स्कूल खुल जाने के बाद भी कैदियों को दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया गया है. बल्कि नए कैदियों को भी यहां क्वारंटीन किया जा रहा है. जिला प्रशासन और जेल प्रशासन ने अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया. लिहाजा अब बच्चे डर के माहौल में स्कूल के मैदान में पढ़ रहे हैं. शिक्षकों का कहना है कि स्कूल में कैदियों के  रहने से डर का माहौल बना रहता है. जिससे बच्चे भी पढ़ाई के दौरान परेशान नजर आते हैं. 

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पुलिस कस्टडी में हैं कैदी 
हालांकि स्कूल में आइसोलेट किए गए कैदियों को पुलिस कर्मियों की कस्टडी में रखा गया है. लेकिन जिन पुलिसकर्मियों की स्कूल में तैनाती की गयी है वे भी लापरवाही बरत रहे हैं. पुलिसकर्मी मास्क तक नहीं पहन रहे और बाहर भी घूम रहे हैं. ऐसे में स्कूल में आ रहे छात्र कितने सुरक्षित होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. डर के चलते बच्चे और शिक्षक शौचालय तक का इस्तेमाल नहीं कर रहे. हालांकि स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को स्कूल की बिल्डिंग से दूर रखा है. 

कैदियों को हटाने की मांग कर रहे हैं शिक्षक 
माध्यमिक विद्यालय ओजली के प्रधानाचार्य ने बताया कि दो सितंबर से यहां बच्चे पढ़ रहे हैं. लेकिन कैदियों को हटाने की जहमत प्रशासन ने अब तक नहीं उठाई है. जबकि स्कूल प्रशासन कई बार कैदियों को हटाने का निवेदन प्रशासन को भेज चुका है. मामले में जिला प्रशासन का कहना है कि वे कैदियों को दूसरी जगह पर शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे हैं. जैसे ही नयी जगह मिलती है कैदियों को वहा शिफ्ट कर दिया जाएगा. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब तक कैदी दूसरी जगह शिफ्ट नहीं होते तब तक यहां बच्चे कोरोना के डर में ही अपनी पढ़ाई करने को मजबूर हैं. 

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