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UP: महराजगंज का यह पंचमुखी शिव मंदिर इस कारण से कहलाता है पूर्वोत्तर का बाबा धाम

वैसे तो भगववान शिव को विनाश का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस पूरे महीने भर भगवान भोलेनाथ दयालु बन जाते हैं.

UP: महराजगंज का यह पंचमुखी शिव मंदिर इस कारण से कहलाता है पूर्वोत्तर का बाबा धाम
शिव के इस धाम में पंचमुखी महादेव भक्तों के हर दुखों को दूर करते हैं.

अमित त्रिपाठी/महराजगंज: सावन के महीने में देशभर में देवाधिदेव महादेव के मंदिरों में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. ऐसा ही एक मंदिर उत्तर प्रदेश के महराजगंज में स्थित है. कहा जाता है कि शिव के इस धाम में पंचमुखी महादेव भक्तों के हर दुखों को दूर करते हैं. यह धाम महाराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र में है. इसे इटहिया पंचमुखी शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है.

वैसे तो भगववान शिव को विनाश का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस पूरे महीने भर भगवान भोलेनाथ दयालु बन जाते हैं और अपने दरबार में आने वाले हर साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. पूरे देश में शिव के सभी मंदिरों पर भक्तों का हुजूम उमड़ता है. महाराजगंज जिले में स्थित इटहिया धाम को लेकर मान्यता है कि 200 वर्ष पूर्व एक आम के पेड़ के नीचे खुदाई के दौरान पंचमुखी शिवलिंग किसान को प्राप्त हुआ था और तभी से यहां पर पूजन अर्चन की जाती है. सैकड़ो साल से यह मंदिर अपना भव्य रूप लेकर श्रद्धालुओं के श्रद्धा का व्यापक केंद्र बना हुआ है.

एक अन्य मान्यता के अनुसार पूर्व में राजा रतन सेन की नंदी गाय हर रोज अपना दूध भगवान भोले शंकर को आकर अर्पण कर जाती थी. राजा को दूध जब नहीं मिलता था. राजा ने एक दिन सिपाहियों को नंदी गाय के पीछे लगाकर दूध कहां जाता है, इसकी सत्यता की जांच कराना शुरू की. पता चला कि हर रोज नंदी गाय इसी जगह पर आकर पंचमुखी भगवान भोले शंकर के इसी अपना दूध अर्पण कर चली जाती है. राजा को गुस्सा आया और राजा ने इस शिव रूपी पत्थर को खोजने और ले जाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उनकी कोशिश नाकाम हुई. स्थानीय लोगों की मदद से यहां पूजन अर्चन तभी से शुरू हुआ. जो सिलसिला आज भी सैकड़ों वर्षो से चलता आ रहा है. यहां हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है.

 

यह मंदिर काफी पुराना है और कई दशकों से यहां पर पूरे सावन माह तक भव्य मेला लगता है. यहां पर सिर्फ महाराजगंज के ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के साथ दूसरे प्रदेशों और नेपाल के भी काफी श्रद्धालु आकर अपनी मन्नत पूरी करते हैं. ऐसी मान्यता है, जो भक्त देवघर में स्थित बाबा धाम नहीं जा पाता है, वह भक्त पंचमुखी भगवान भोलेनाथ के दर पर ही जाता है. 

सावन में श्रद्धालुओं के लिए यहां एक मेले का आयोजन भी किया जाता है जिसको देखते हुए प्रशासन की तरफ से कड़ा इंतजाम किया गया है. प्रशासन की तरफ से मेले को 3 जोन और 6 सेक्टर में बांटकर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए है. इस मंदिर की चर्चा काफी दूर तक है और इसे पूर्वांचल का बाबा धाम भी कहा जाता है. इटहिया शिव मंदिर के प्रांगण में हजारों भक्तों का रेला हमेशा लगा रहता है.