काशी-मथुरा विवाद केस में सुब्रमण्यम स्वामी की एंट्री, 29 साल पुराने काननू को दी SC में चुनौती

इससे पहले हिंदू पुजारियों के संगठन ने भी 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991' को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इस एक्ट में कहा गया कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय से संबंधित था वह हमेशा के लिए उसी का रहेगा. 

काशी-मथुरा विवाद केस में सुब्रमण्यम स्वामी की एंट्री, 29 साल पुराने काननू को दी SC में चुनौती
वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी. (File Photo)

नई दिल्ली: काशी-मथुरा विवाद मामले में बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. उन्होंने यह याचिका धार्मिक स्थल एक्ट 1991 (Places Of Worship Act 1991) के खिलाफ दायर की है. स्वामी ने अपनी याचिका में इस कानून को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है. गौर करने वाली बात यह है कि अयोध्या विवाद में दिए गए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक स्थल एक्ट 1991 की संवैधानिकता की पुष्टि की थी और कहा था कि यह कानून धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने के लिए पास किया गया है.

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इससे पहले हिंदू पुजारियों के संगठन ने भी 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991' को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इस एक्ट में कहा गया कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय से संबंधित था वह हमेशा के लिए उसी का रहेगा. हिंदू पुजारी संगठन की इस याचिका के खिलाफ पीस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मामले में खुद को पक्षकार बनाने की मांग की है. पीस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह मूल याचिका पर कोई नोटिस जारी न करे, क्योंकि इससे मुस्लिम समुदाय में खौफ पैदा होगा और इससे देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुंचेगा.

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पीस पार्टी ने अपनी याचिका में कहा है कि हिंदू पुजारी संगठन अदालत को सैकड़ों साल पुराने मामले में उलझाना चाहता है और इस तरह देश में धार्मिक असहिष्णुता के आधार पर तनाव पैदा करना चाहता है. पीस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से देश की धर्मनिरपेक्षता और सभी समुदायों में सद्भाव कायम करने के लिए हिंदू पुजारी संगठन की मूल याचिका को खारिज करने की मांग की है. जमीयत उलमा-ए-हिंद के बाद पीस पार्टी दूसरा याची है जो इस मामले में पक्षकार बनना चाहता है. 

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