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नैनीतालः बच्चों को खाली पेट दी गई थी आयरन की गोली, खाने से बिगड़ी दर्जनों की हालात

नैनीताल के ओखलकांड़ा ब्लॉक के तहत आने वाले राजकीय माध्यमिक विद्यालय ककोड़गाजा मे आयरन की गोलियां खाने के बाद बीमार पड़े बच्चों की सेहत को लेकर स्वास्थ्य महकमा हरकत मे आ गया है. 

नैनीतालः बच्चों को खाली पेट दी गई थी आयरन की गोली, खाने से बिगड़ी दर्जनों की हालात
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी टीआर टम्टा की मानें तो अभी बच्चों की सेहत काफी ठीक है.

नौनीताल (राजू पनडे): नैनीताल के ओखलकांड़ा ब्लॉक के तहत आने वाले राजकीय माध्यमिक विद्यालय ककोड़गाजा मे आयरन की गोलियां खाने के बाद बीमार पड़े बच्चों की सेहत को लेकर स्वास्थ्य महकमा हरकत मे आ गया है. सीएमओ भारती राणा के निर्देशन मे 3 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई थी, जिसने स्कूल मे जाकर तथ्य जुटाये और अध्यापकों के साथ ही बच्चों के साथ बात की. 

खाली पेट बच्चों को दी गई आयरन की गोलियां
इस दौरान जांच कमेटी ने प्रथम दृष्टया पाया कि जिन बच्चों को आयरन की गोलियां दी गई थी उनमे से अधिकांश बच्चे खाली पेट थे और देखते ही देखते अन्य बच्चों को भी उल्टियां होने लगी. सभी पहलूओं पर विचार करने और बच्चों से बात करने के बाद जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी है.  

क्या है पूरा मामला
उल्लेखनीय है कि 4 फरवरी 2019 को राजकीय माध्यमिक विद्यालय में बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयरन की गोलियां दी गई थी. गोलियां खाने के कुछ देर बाद ही बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. मौके पर मौजूद कुछ बच्चों को उल्टियां शुरू हो थी. बच्चों की हालात बिगड़ने के बाद उन्हें हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल मे भर्ती कराया गया था. अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक, आयरन की गोलियां खाने से कुल 48 बच्चों की हालात बिगड़ी थी. 

स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया
बच्चों की हालात बिगड़ने के बाद पूरा स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया और पूरे मामले मे जांच कमेटी गठित कर दी और आज ये रिपोर्ट सामने आ गई है जिसमें बताया गया कि बच्चे खाली पेट थे.

स्कूल प्रशासन को जारी किए गए निर्देशप
मामले मे जांच करे अपर मुख्य चिकित्साधिकारी टीआर टम्टा की मानें तो अभी बच्चों की सेहत काफी ठीक है कुछ बच्चे अस्पताल से डिस्चार्ज हो गये है और बाकि बचे हुए बच्चो को आज (गुरुवार को) डिस्चार्ज किया जाएगा इसके अलावा टम्टा ने कहा कि मामला गंभीर है, लिहाजा स्कूल को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बच्चे जब खाना खाकर आए तभी दवा दी जाए.