नेपाली PM केपी शर्मा ओली के बयान से अयोध्या के संतों में नाराजगी, बोले- उन्हें नहीं है कोई ज्ञान

रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, ''पीएम ओली को भारत के अयोध्या और नेपाल के जनकपुर के रिश्ते का भी कोई ज्ञान नहीं है. ऐसे अज्ञानी प्रधानमंत्री को नेपाल की कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है.

नेपाली PM केपी शर्मा ओली के बयान से अयोध्या के संतों में नाराजगी, बोले- उन्हें नहीं है कोई ज्ञान
रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास (L), स्वामी परमहंस दास (R).

अयोध्या: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा भगवान राम के जन्म स्थान को लेकर दिए गए बयान के बाद अयोध्या के संतों में काफी नाराजगी है. अयोध्या के संत नेपाली पीएम ओली के इस बयान बयान की निंदा कर रहे हैं और उन्हें मूर्ख करार दे रहे हैं. रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है कि नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली को भारत और नेपाल के त्रेतायुग कालीन संबंधों का ज्ञान ही नहीं है.

''पीएम ओली को अयोध्या और जनकपुर के रिश्तों का ज्ञान नहीं''
आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, ''पीएम ओली को भारत के अयोध्या और नेपाल के जनकपुर के रिश्ते का भी कोई ज्ञान नहीं है. ऐसे अज्ञानी प्रधानमंत्री को नेपाल की कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है. शास्त्रों में प्रमाणित है कि भारत के उत्तर प्रदेश में उत्तर दिशा में बहने वाली पवित्र सरयू नदी के किनारे अयोध्या बस्ती है. आज भी अयोध्या अपनी जगह दीप्तिमान है. जो लोगों का कल्याण कर रही है.''

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''त्रेता युग से भगवान राम की बारात नेपाल के जनकपुर जाती है''
आपको बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने बीते 13 जुलाई को अपने एक बयान में कहा था कि असली अयोध्या नेपाल में है और भगवान राम का जन्म नेपाल की धरती पर हुआ था. उन्होंने उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी को नकली बताया है. रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने का कहना है कि भगवान राम का विवाह नेपाल के जनकपुर में मां सीता के साथ हुआ था. त्रेता युग से अब तक हर वर्ष भगवान की बारात बकायदा नेपाल के जनकपुर जाती है. यह शास्त्रों में वर्णित है.

''चीन के इशारे पर काम कर रहे हैं नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली''
आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, ''नेपाल के पीएम ओली चीन से प्रेरित होकर इस तरीके का बयान दे रहे हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निवेदन है कि नेपाल के पीएम से संबंधों को एक बार फिर से सोचें और इसका कड़ा विरोध दर्ज कराएं.'' वहीं तपस्वी छावनी के महंत जगतगुरु स्वामी परमहंस दास ने नेपाली पीएम ओली के बयान की घोर निंदा की. स्वामी परमहंस दास का दावा है कि लाखों की संख्या में तपस्वी छावनी के संत और शिष्य नेपाल में हैं, जो सड़कों पर उतर कर पीएम ओली का विरोध करेंगे और एक माह में वह प्रधानमंत्री पद से हटा दिए जाएंगे.

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''केपी शर्मा ओली खुद नेपाली नहीं हैं, इ​सलिए ऐसा बयान दे रहे''
अयोध्या सरयू तट पर रामा दल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कलकी राम ने नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली के नेपाली होने पर संदेह व्यक्त किया. पंडित कलकी राम का कहना है कि केपी शर्मा ओली खुद नेपाली नहीं हैं, इसलिए उनको भारत और नेपाल के युगों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का ज्ञान नहीं है. ओली जैसे लोगों से भारत और नेपाल का संबंध समाप्त होने वाला नहीं है. नेपाल की 60% जनता भारत पर निर्भर है.

''केपी शर्मा ओली बताएं नेपाल के कितने गांवों पर है चीन का कब्जा''
पंडित कलकी राम ने पूछा, ''सबसे पहले पीएम केपी शर्मा ओली यह बताएं कि नेपाल के कितने गांवों पर चीन ने कब्जा कर रखा है? नेपाल की जनता को चाहिए कि वह पीएम ओली के खिलाफ सड़कों पर उतरे, नहीं तो आने वाले समय में हर नेपाली के हाथों में कटोरा होगा और नेपाल पर चीन का कब्जा होगा. अयोध्या के संत नेपाली पीएम केपी ओली केपी शर्मा ओली के बयान का पुरजोर विरोध कर रहे हैं.''

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