नैनीताल: भारी बर्फबारी से खिले किसानों के चेहरे, सेब की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद

15 सालों के बाद नैनीताल में हुई भारी बर्फबारी से काश्तकारों के चेहरे खिल गए हैं. किसानों को उम्मीद है कि बर्फबारी से इस साल सेब का उत्पादन बढ़ेगा.

नैनीताल: भारी बर्फबारी से खिले किसानों के चेहरे, सेब की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद
काश्तकारों की मानें तो बर्फबारी से इस साल सेब का उत्पादन बढ़ेगा

नैनीताल: साल 2019 के आखिरी पखवाड़े में उत्तराखंड (Uttarakhand) की वादियां बर्फ की सफेद चादर से ढकी हुई हैं. पर्यटकों को सर्द भरा मौसम और बर्फबारी बेहद रास आ रही है. वहीं, 15 सालों के बाद नैनीताल में हुई भारी बर्फबारी से काश्तकारों के चेहरे खिल गए हैं. जिले के मुक्तेश्वर, रामगढ़, धनाचूली इलाके में भारी बर्फबारी सेब की पैदावार के लिए मुफीद मानी जा रही है. काश्तकारों की मानें तो बर्फबारी से इस साल सेब का उत्पादन बढ़ेगा.

सेब के लिए बर्फबारी जरूरी क्यों ?
दरअसल, सेब एक ऐसा फल है जिसे बहुत देखरेख की जरूरत होती है. सेब ज्यादा सुंदर और मीठा हो इसके लिए उसे करीब 3 महीने कूलिंग पॉइंट चाहिए. इस साल नैनीताल की फ्रूट बेल्ट में सेब, आड़ू, खुमानी, कीवी जैसे फलों के लिए लिए बर्फबारी काफी फायदेमंद है. काश्तकारों के मुताबिक पिछले 15 सालों के बाद सही समय पर बर्फबारी हुई है. जिले के मुक्तेश्वर और रामगढ़ में करीब 1 फीट बर्फबारी हुई, जिससे कीड़े भी खत्म हो गए हैं.

बर्फबारी का सबसे ज्यादा फायदा सेब की पैदावार को होगा क्योंकि अब सेब के पेड़ों में कीड़े नहीं लगेंगे और फूल भी सही समय पर आ जाएंगे. सेब ही नहीं बल्कि अन्य फसलों और सब्जियों के लिए भी बर्फबारी काफी फायदेमंद मानी जाती हैं. बर्फबारी के बाद जमीन में नमी कई दिनों तक रहती है.

बता दें कि नैनीताल ही नहीं बल्कि प्रदेश में हर्षिल, रानीखेत, मुनस्यारी, चकराता, टिहरी, धनौल्टी, जोशीमठ में भी अच्छी बर्फबारी हुई है. रामगढ़ में स्थित सरकारी सेब के बगीचे में ही करीब 15 हजार सेब के पेड़ हैं, जो प्रदेश का सबसे बड़ा उद्यान है.

(संपादन - दिव्यांश शर्मा)