रिजर्वेशन लिस्ट पर क्यों लगाई रोक? किसी सीट को कैसे किया जाता है आरक्षित, जानिए आरक्षण की पूरी प्रक्रिया
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रिजर्वेशन लिस्ट पर क्यों लगाई रोक? किसी सीट को कैसे किया जाता है आरक्षित, जानिए आरक्षण की पूरी प्रक्रिया

UP Panchayat Chunav 2021: आखिर पंचायत चुनाव में आरक्षण तय कैसे किया जाता है और ऐसा क्या है, जिसकी वजह से ये स्थिति पैदा हुई है? आइए जानते हैं...

रिजर्वेशन लिस्ट पर क्यों लगाई रोक? किसी सीट को कैसे किया जाता है आरक्षित, जानिए आरक्षण की पूरी प्रक्रिया

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर माहौल गर्म है. एक ओर हाईकोर्ट ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं. वहीं, फाइनल आरक्षण लिस्ट पर भी रोक लगा दी है. आरक्षण लिस्ट पर रोक लगाए जाने पर प्रत्याशियों के बीच फिर से दुविधा उत्पन्न हो गई है. एक बार फिर वो सोच रहे हैं कि क्या सीट उनके पक्ष में आरक्षित होगी या नहीं. वहीं, एक सवाल है कि आखिर पंचायत चुनाव में आरक्षण तय कैसे किया जाता है और ऐसा क्या है, जिसकी वजह से ये स्थिति पैदा हुई है? आइए जानते हैं...

1.क्या है हाईकोर्ट का फैसला?
दरअसल, आरक्षण प्रक्रिया को लेकर  सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार ने जनहित याचिका (PIL) दायर की थी. याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार को इस वर्ष भी 2015 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण को रोटेट करने की प्रकिया लागू करनी थी. लेकिन सरकार मनमाने तरीके से 1995 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण प्रकिया लागू कर रही है. इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आरक्षण प्रक्रिया पर रोक लगा दी और राज्य सरकार और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है.

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2. पंचायत चुनाव में किसे कितना मिलता है आरक्षण?
पंचायत चुनाव में दो आरक्षण दिए जाते हैं. पहला आरक्षण महिलाओं को दिया जाता है, जो 33 फीसदी है. इसके अलावा जातिगत आधार पर एससी-एसटी के लिए 21 फीसदी आरक्षण और ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण मिलता है. हालांकि, महिलाओं का आरक्षण सभी जातियों पर लागू होता है. यानी कि जो सीट एससी-एसटी  या ओबीसी के लिए आरक्षित है, उस पर भी महिला आरक्षण लागू हो सकता है. जैसे एससी-एसटी के लिए आरक्षित सीटों में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. ठीक वैसे ही ओबीसी और सामान्य वर्गों के लिए भी होगा. 

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3.  आरक्षण के दो तरीके
अलग-अलग राज्यों में दो तरीके से आरक्षण लगाने की प्रक्रिया है. लॉटरी और रोटेशन या चक्रानुक्रम आरक्षण व्यवस्था

A.लॉटरी प्रक्रिया - लॉटरी व्यवस्था में आधार वर्ष के हिसाब से सबसे पहले आरक्षित सीट को अलग किया जाता है. जैसे महिलाओं के पिछले चुनाव में जो सीटें आरक्षित की गई थीं, उनको अलग करके बाकी के लिए लॉटरी निकाली जाएगी. ऐसा अन्य आरक्षण के लिए भी किया जाता है. 

B.रोटेशन या चक्रानुक्रम आरक्षण- इस प्रक्रिया में आज जो सीट जिस वर्ग के लिए आरक्षित है, वो अगले चुनाव में उस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होगी. इसके लिए एक तय चक्र है. सबसे पहले एससी-एसटी महिला के लिए सीट आरक्षित की जाती है. इसके बाद एससी-एसटी, ओबीसी महिला, ओबीसी, महिला और जनरल के लिए आरक्षित होती है. समझिए कि अगर कोई सीट पिछले चुनाव में एससी-एसटी महिला के लिए आरक्षित थी, तो उसे अगले चुनाव में एससी-एसटी के लिए आरक्षित किया जाएगा. ठीक इसी तरीके जो सीट सामान्य है, वह अगले चुनाव में एससी-एसटी महिला के लिए आरक्षित हो जाएगी. गौरतलब है कि यूपी पंचायत चुनाव में इसी प्रक्रिया का पालन किया गया है. 

क्या है आधार वर्ष? 
आधार वर्ष को लेकर ही कोर्ट में याचिका डाली गई है. अगर साल 2015 को आधार वर्ष बनाया जाता है. ऐसे में जो सीट पिछले चुनाव में जिस वर्ग के लिए आरक्षित थी, वो इस बार उस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होगी. वहीं, 1995 में आधार वर्ष बनाया जाता है, तो उसके हिसाब से 1995 से लेकर 2015 तक पांच चुनावों में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित रही सीटें इस बार उस कैटेगरी के लिए आरक्षित नहीं की जाएगी.

आरक्षण में जनसंख्या का रोल
अलग- अलग चुनाव के लिए जनसंख्या को आधार बनाए जाता है. पंचायत सदस्य  के लिए गांव की आबादी आधार होती है. वहीं, ग्राम पंचायत के लिए पूरे ब्लॉक की आबादी को आधार बनाया जाता है. ठीक वैसे ही ब्लॉक सदस्य के लिए जिला और जिला पंचायत के लिए प्रदेश की आबादी आधार बनती है. 
इस विषय को ऐसे समझिए कि अगर किसी ब्लॉक में 100 ग्राम पंचायत हैं और पिछले चुनाव में वहां 27 सीटें पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित थीं. अगले चुनाव में 27 के आगे ग्राम पंचायतों की आबादी के अवरोही क्रम में (घटती हुई आबादी) प्रधान पद आरक्षित होंगी. ऐसे ही सभी आरक्षण के लिए होगा.

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