चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद लागू हो जाती है आचार संहिता, जानें क्या नहीं कर सकते प्रत्याशी

आचार संहिता के नियम सख्ती से लागू किए जाते हैं. ऐसे में निर्वाचन आयोग प्रत्याशियों के हर एक्शन पर कड़ी नजर रखता है. जानें क्या नहीं कर सकते प्रत्याशी...

चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद लागू हो जाती है आचार संहिता, जानें क्या नहीं कर सकते प्रत्याशी

लखनऊ: राज्य निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव (UP Panchayat Chunav 2021) की तारीखों का ऐलान कर दिया है. 4 चरणों (12 अप्रैल, 19 अप्रैल, 26 अप्रैल, 29 अप्रैल) में होने वाले पंचायत चुनाव के परिणाम 2 मई को घोषित किए जाएंगे. इसी के साथ राज्य में आचार संहिता लागू किए जाने का समय आ गया है. क्या आप जानते हैं क्या होती है आचार संहिता?

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क्या होती है चुनाव आचार संहिता? 
दरअसल, देश में या किसी भी राज्य में निष्पक्ष रूप से चुनाव संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग कुछ नियम निर्धारित करता है, जिसके तहत प्रत्याशी चुनाव में उतरते हैं. इन्हीं नियमों को आचार संहिता कहा जाता है. लोकसभा, विधानसभा या पंचायत चुनाव के दौरान यह सरकार, नेताओं और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि इन नियमों का पालन किया जाए. 

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आचार संहिता कब लागू होती है?
गौरतलब है कि चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाती है. जैसे कि 26 मार्च को राज्य निर्वाचन आयोग ने यूपी पंचायत चुनाव की तारीखों के ऐलान किया. इसी के साथ, चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई.

कब तक चलती है आचार संहिता?
बता दें, चुनाव जब तक पूरी तरह से संपन्न नहीं हो जाते, तब तक आचार संहिता लागू रहती है. वोटों की गिनती होने तक आचार संहिता के नियमों के अनुसार ही प्रत्याशियों को पेश आना होता है. यूपी पंचायत चुनाव 2021 के मद्देनजर 2 मई तक आचार संहिता लागू रहेगी.

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आचार संहिता के तहत क्या-क्या नहीं कर सकते आप?
मालूम हो, चुनाव आचार संहिता के साथ ऐसे कई नियम लागू हो जाते हैं, जिनका लागू होने के बाद कई नियम भी लागू हो जाते हैं, जिनका उल्लंघन कोई राजनेता या राजनीतिक दल नहीं कर सकता. इनमें ये नियम शामिल हैं-

1. आचार संहिता का पहला नियम यह है कि सार्वजनिक धन का कोई भी राजनीतिक दल या नेता (कोई भी प्रत्याशी) अपने फायदे के लिए नहीं कर सकता. 

2. किसी भी चुनावी रैली में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जाएंगे. 

3. चुनाव प्रचार के लिए किसी भी सरकारी गाड़ी, विमान या बंगले का उपयोग नहीं किया दा सकता. 

4. आचार संहिता का एक और नियम यह है कि कोई भी प्रत्याशी को रैली करने से पहले पुलिस प्रशासन से इजाजत लेनी होगी.

5. आचार संहिता लागू होते ही किसी भी तरह की सरकारी घोषणा नहीं की जाएगी. साथ ही, लोकार्पण या शिलान्यास कार्यक्रम पर भी रोक लगा दी जाती है. 

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सत्ताधारी पार्टी के लिए भी होते हैं नियम
आचार संहिता लागू होने के बाद मौजूदा सरकार किसी भी तरह की नई योजना लाने जैसी बड़ी घोषणा नहीं कर सकती. साथ ही, प्रचार के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जा सकता. 
इसके अलावा, कोई भी मंत्री सरकारी दौरे को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता. न ही उन्हें सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल करने की अनुमति होती है.

आचार संहिता का उल्लंघन करने पर क्या होता है?
बता दें, आचार संहिता के नियम सख्ती से लागू किए जाते हैं. ऐसे में निर्वाचन आयोग प्रत्याशियों के हर एक्शन पर कड़ी नजर रखता है. अगर कोई प्रत्याशी इनका उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है. आचार संहिता के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान है. साथ ही, दंडनात्मक कार्रवाई होती है. 

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