योगी सरकार के नए मंत्रियों में 1 GEN, 3 OBC, 2 SC और 1 ST, जानिए इसके सियासी मायने

बीते 5-6 महीने में कई बार उत्तर प्रदेश में कैबिनेट विस्तार की खबरें आईं लेकिन हर बार हवा-हवाई साबित हुईं. आखिरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 सितंबर को अपनी कैबिनेट में 7 नए मंत्रियों को शामिल कर लिया. यह कैबिनेट विस्तार बिल्कुल केंद्र की मोदी सरकार के तर्ज पर किया गया.

योगी सरकार के नए मंत्रियों में 1 GEN, 3 OBC, 2 SC और 1 ST, जानिए इसके सियासी मायने
योगी कैबिनेट में शामिल नए मंत्री मुख्यमंत्री और राज्यपाल के साथ फोटो सेशन करवाते हुए.

लखनऊ: बीते 5-6 महीने में कई बार उत्तर प्रदेश में कैबिनेट विस्तार की खबरें आईं लेकिन हर बार हवा-हवाई साबित हुईं. आखिरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 सितंबर को अपनी कैबिनेट में 7 नए मंत्रियों को शामिल कर लिया. यह कैबिनेट विस्तार बिल्कुल केंद्र की मोदी सरकार के तर्ज पर किया गया. मंत्री पद के लिए नेताओं के चयन में जातिगत समीकरण की पूरा ध्यान रखा गया.

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को राजभवन के गांधी सभागार में आयोजित सादे समारोह में जितिन प्रसाद, पलटू राम, धर्मवीर प्रजापति, छत्रपाल गंगवार, संगीता बलवंत, संजीव कुमार गौड़ और दिनेश खटिक को मंत्री पद की शपथ दिलाई. प्रसाद को कैबिनेट मंत्री जबकि अन्‍य को राज्‍य मंत्री पद की शपथ दिलायी गयी. यूपी विधानसभा चुनाव में बमुश्किल पांच महीने रह गए हैं, ऐसे में इस कैबिनेट विस्तार के सियासी मायने क्या हैं और इन्हीं 7 नेताओं को मंत्री क्यों बनाया गया, आइए समझते हैं...

1. जितिन प्रसाद- कैबिनेट मंत्री (मनोनित सदस्य, यूपी विधान परिषद) 
शिक्षा- एमबीए
व्यवसाय- कृषि
जाति- ब्राह्मण
उम्र-  48 वर्ष 

राजनीतिक सफर
जितिन प्रसाद ने अपने राजनीति जीवन की शुरुआत 2001 से की. यूथ कांग्रेस के सचिव बने. इसके बाद 2004 में शाहजहांपुर से पहली बार सांसद चुने गए, 2008 में यूपीए सरकार में राज्यमंत्री बने. परिसीमन के बाद 2009 में धौरहरा सीट से सांसद बनकर दूसरी बार लोकसभा पहुंचे. फिर 2009 से 2011 तक सड़क परिवहन और राजमार्ग, 2011-12 तक पेट्रोलियम मंत्रालय का कार्यभार संभाला. वह 2012-14 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे. 

इसके बाद 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में वह धौरहरा सीट से चुनाव हारे, 2017 के विधानसभा चुनाव में शाहजहांपुर से विधायकी का चुनाव भी हार गए. इसके बाद कांग्रेस में वह हाशिए पर चले गए. जितिन प्रसाद उन 24 नेताओं में शामिल थे जिन्होंने कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में कुछ जरूरी संगठनात्मक सुधार की मांग की थी. इसके बाद वह और दरकिनार कर दिए गए. आखिरकार जितिन ने 9 जून, 2021 को कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. 

मंत्री बनाए जाने का कारण: इनके जरिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की है. जितिन ने कांग्रेस में रहते हुए ब्राह्मण चेतना यात्रा निकाली थी. वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में युवा ब्राह्मण चेहरा हैं. शाहजहांपुर समेत पूरे रूहेलखण्ड में ब्राह्मण वोट बैंक पर जितिन प्रसाद का अच्छा खासा प्रभाव है. इसके ​अलावा योगी सरकार पर विपक्षी पार्टियां ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाती आई हैं, चुनाव अभियान में भाजपा जितिन प्रसाद के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने में सक्षम रहेगी.

2. छत्रपाल सिंह गंगवार- राज्यमंत्री (बरेली के बहेड़ी से विधायक)
शिक्षा- स्नतकोत्तर बीएड
व्‍यवसाय- कृषि, अध्यापन (पूर्व प्रधानाचार्य)           
जाति- कुर्मी पिछड़ी जाति
उम्र- 65 वर्ष                       

राजनीतिक सफर
छत्रपाल सिंह गंगवार बरेली के बरहेड़ी विधानसभा से विधायक हैं. दमखोदा निवासी छत्रपाल सिंह गंगवार इससे पहले 2007 में भी भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर बहेड़ी विधानसभा सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. छत्रपाल आरएसएस की पृष्ठभूमि से आते हैं. वह गृह क्षेत्र के धनी राम इंटर कॉलेज में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे. यहीं पर वह प्रिंसिपल बनकर 2018 में सेवानिृत्त हुए. छत्रपाल को 2002 में भाजपा ने सियासत में उतारा था, लेकिन वह हार गए थे. वह 2007 में पहली बार विधायक बने, 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. छत्रपाल 2017 में बसपा प्रत्याशी नसीम अहमद को हराकर विधानसभा पहुंचे.

मंत्री बनाए जाने का कारणः छत्रपाल गंगवार के जरिए भाजपा ने रुहेलखंड में कुर्मियों को तरजीह दी है. सिंचाई मंत्री धर्मपाल व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल के हटाए जाने के बाद रुलेहखंड में पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा था. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छत्रपाल सिंह को योगी मंत्रिमंडल में शामिल करके रुहेलखंड में कुर्मी वोटरों को साधने का प्रयास किया गया है. क्योंकि बरेली के सांसद संतोष गंगवार को भी मोदी कैबिनेट से हटना पड़ा था. इसके बार इस क्षेत्र में किसी कुर्मी नेता को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देना भाजपा की मजबूरी थी. क्योंकि यूपी की सत्ता में आने के लिए बीजेपी सवर्णों के अलावा गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव एससी मतदाताओं पर निर्भर है. 

3. दिनेश खटीक- राज्यमंत्री (विधायक हस्तिनापुर मेरठ)
शिक्षा- कक्षा-9 (साक्षर)                   
व्यवसाय- व्यापार              
जाति- अनुसूचित जाति                  
उम्र- 44 वर्ष                        

राजनीतिक सफर
दिनेश कुमार खटीक वर्तमान में मेरठ के हस्तिनापुर विधानसभा सीट से विधायक हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में दिनेश कुमार खटीक की मजबूत पकड़ है. इन्होंने 2017 में पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और बसपा प्रत्याशी योगेश वर्मा को पराजित किया. संघ का स्वयं सेवक होने के नाते खटीक शुरू से ही भाजपा से जुड़ाव रहा है. इनके पिता भी संघ के स्वयंसेवक थे. भाई नितिन खटीक जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं. विधायक दिनेश खटीक का फलावदा में ईंट भट्टे का व्यवसाय है. वह मेरठ के गंगानगर में रहते हैं.

मंत्री बनाए जाने का कारण: दिनेश खटीक के जरिए भाजपा पश्चिमी यूपी में दलितों को संदेश देना चाहती है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो य​ह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा और चंद्रशेखर रावण की आजाद समाज पार्टी का वर्चस्व कम करने की कोशिश है. मेरठ और आसपास के जिलों में खटीक की आबादी काफी अच्छी है और अपने समाज में दिनेश खटीक की मजबूत पकड़ है. इसके अलावा भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' को भी चरितार्थ करने की कोशिश की है.

4. पलटू राम- राज्यमंत्री (विधायक बलरामपुर) 
शिक्षा- एमए                      
व्यवसाय- कृषि, व्यापार                 
जाति- अनुसूचित जाति (जाटव)                     
उम्र- 49 वर्ष                        

राजनीतिक सफर
पलटू राम बलरामपुर की सदर सुरक्षित सीट से भाजपा विधायक हैं. वह राजनीति के अलावा खेती भी करते हैं और सादगी से अपना जीवन गुजारते हैं. गोंडा जिले के परेड सरकार गांव में जन्में विधायक पलटू राम ने अवध विश्वविद्यालय से एमए तक की शिक्षा प्राप्त की. राजनीति में रुझान होने के कारण छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों में भागीदारी करते रहे. पलटू राम 2007 विधानसभा चुनाव में बसपा की टिकटपर मनकापुर सुरक्षित सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए. इसके बाद 2015 में गिर्द गोंडा क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता. भाजपा ने उन्हें 2017 विधानसभा चुनाव में बलरामपुर सदर सुरक्षित सीट से अपना उम्मीदवार बनाया. पलटू राम इस चुनाव में भारी मतों से जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे. 

मंत्री बनाए जाने का कारण: पलटू राम को योगी कैबिनेट में दलित चेहरे के रूप में शामिल किया गया है. भाजपा ने इनके जरिए देवीपाटन मंडल में दलितों को लुभाने का प्रयास किया है. पलटू राम के जरिए भाजपा ने दलित बिरादरी को संदेश देने की कोशिश की है कि उनका हित पार्टी के साथ सुरक्षित है. चूंकि जाटव अभी भी मायावती और बसपा के साथ हैं, ऐसे में भाजपा ने चुनाव से ठीक पहले पलटू राम को मंत्री बनाकर बसपा के इस वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है. बसपा के गैर जाटव वोट बैंक में भाजपा पहले ही सेंधमारी कर चुकी है. राज्य और केंद्र की योजनाओं के अलावा दलित समाज को अपना कोई बंदा मंत्री के रूप में दिखेगा तो उनमें भाजपा के साथ जुड़ने का साहस पैदा होगा.

5. संजय गौड़- राज्यमंत्री (विधायक ओबरा) 
पढ़ाई- स्नातक                
व्यवसाय- कृषि             
जाति- अनुसूचित जन जाति (कहार)             
उम्र- 46 वर्ष                

राजनीतिक सफर
ओबरा विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक संजीव कुमार गौड़ उर्फ संजय 1978 में जनसंघ से विधायक रहे हैं. तत्कालीन जनता दल गठबंधन की सरकार में संजय गौड़ को उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. वह 2017 के विधानसभा चुनाव में ओबरा से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़कर वह विधायक बने. ओबरा के बिल्ली गांव के रहने वाले विधायक संजय गौड़ के दादा रघुनाथ प्रसाद लगातार 35 साल तक प्रधान रहे हैं. विधायक संजय गौड़ का अपने क्षेत्र में आदिवासियों के बीच अच्छी पकड़ है.

मंत्री बनाए जाने का कारण: आदिवासी बहुल जिला सोनभद्र में एसटी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत बनाये रखने के लिए भाजपा ने संजय गौड़ के रूप में कहार जाति को सरकार में प्रतिनिधित्व दिया है. सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली इत्यादि जिलों में कहार जाति की अच्छी खासी जनसंख्या है. वैसे यह वोट बैंक पारंपरिक रूप से भाजपा के साथ रहा है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले गौड़ नेता को मंत्री बनाकर भाजपा ने इन जिलों में कहार समाज के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने की कोशिश की है.

6. डा. संगीता बिंद- राज्यमंत्री (विधायक गाजीपुर सदर)
शिक्षा- स्नातकोत्तर, बीएड., एलएलबी, पीएचडी            
व्यवसाय- वकालत, अध्यापन         
जाति- पिछड़ी जाति (बिन्द)             
उम्र- 43 वर्ष                     

राजनीतिक सफर
गाजीपुर सदर से विधायक संगीता बिंद का जन्म गाजीपुर शहर में हुआ. इनके पिता स्व. रामसूरत बिंद  पोस्टमैन थे. संगीता के पति पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक हैं. बीजेपी विधायक संगीता बिंद का पूरा नाम संगीता बलवंत बिंद है. वह छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गई थीं. गाजीपुर के पीजी कॉलेज में 2002 में छात्रसंघ उपाध्यक्ष रहीं. वर्ष 2005 में जमानियां से निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं. अपने क्षेत्र में संगीता​ बिंद काफी लोकप्रिय हैं. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के साथ जुड़ कर राजनीति में कदम रखा. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान संगीता बिंद बीजेपी में शामिल हो गईं. भाजपा ने 2017 में उन्हें टिकट  टिकट दिया और वह जीतकर विधानसभा पहुंचने में सफल रहीं.

मंत्री बनाए जाने का कारण: संगीता बलवंत, बिंद (ओबीसी) जाति से आती हैं. गाजीपुर समेत पूर्वांचल में यह वोट बैंक काफी मजबूत है और भाजपा का पारंपरिक वोटर रहा है. भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव में अपने इस वोट बैंक में अन्य पार्टियां सेंधमारी न कर पाएं इसके लिए संगीता को मंत्री पद से नवाजा है. वह गाजीपुर और आसपास के जिलों में बिंद समाज में भाजपा का प्रभाव बढ़ाएंगी. संगीता बिंद का अपने समाज के अलावा क्षेत्र के अन्य ओबीसी जातियों में भी अच्छा खासा प्रभाव है. शिक्षित होने के कारण समाज के लोग उन्हें काफी गंभीरता से लेते हैं. 

7. धर्मवीर प्रजापति- राज्यमंत्री (एमएलसी)
शिक्षा- बीएएमएस (कुम्हार)
व्यवसाय- आयुर्वेदिक डॉक्टर 
जाति- ओबीसी
उम्र- 54

राजनीतिक सफर
हाथरस जिले के बहरदोई गांव के रहने वाले धर्मवीर विधान परिषद के सदस्य हैं. साथ ही माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं. धर्मवीर इससे पहले भी भाजपा में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं. आरएसएस के सक्रिय स्वयंसेवक रहे हैं. वर्ष 2002 में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ में वह प्रदेश के महामंत्री बने, इसके बाद दो बार प्रदेश संगठन में मंत्री का दायित्व संभाला. जनवरी 2019 में उन्हें माटी कला बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया. अयोध्या में दीपोत्सव के लिए डिजाइनर दिए सजवाये.

मंत्री बनाने का कारण: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कुम्हार समाज के चेहरे के रूप में धर्मवीर प्रजापति को योगी कैबिनेट में जगह दी गयी है, जिससे आने वाले विधानसभा में इसका लाभ भाजपा को मिल सके. धर्मवीर प्रजापति का कुम्हार समाज में अच्छी पकड़. उन्होंने माटी कला बोर्ड का अध्यक्ष रहते हुए प्रजापति समाज के लिए सराहनीय काम किया है. अयोध्या में दीपोत्सव के लिए दिए का इंतजाम इनके जिम्मे ही रहता है. इसके अलावा कुम्हारों को सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक चाक और अन्य सहूलियतें उपलब्ध करवाने में इनकी भूमिका रही है.

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