सरकार ने जारी की SOP, फिर भी उत्तराखंड में रुके हुए हैं बसों के चक्के

उत्तराखंड में पब्लिक ट्रांसपोर्ट खोलने के लिए सरकार की ओर से SOP जारी की जा चुकी है, लेकिन सड़कों पर वाहनों के दौड़ने की नौबत ही नहीं आ रही. सिटी बस संचालकों का कहना है कि वो अपनी मांगें पूरी होने तक बसों का संचालन नहीं करेंगे.

सरकार ने जारी की SOP, फिर भी उत्तराखंड में रुके हुए हैं बसों के चक्के
फाइल फोटो

देहरादून: उत्तराखंड में पब्लिक ट्रांसपोर्ट खोलने के लिए सरकार की ओर से SOP जारी की जा चुकी है, लेकिन सड़कों पर वाहनों के दौड़ने की नौबत ही नहीं आ रही. सिटी बस संचालकों का कहना है कि वो अपनी मांगें पूरी होने तक बसों का संचालन नहीं करेंगे. फिलहाल शासन की ओर से सिटी बस संचालकों की इन मांगों पर जवाब नहीं आया है और बसों के चक्के रुके हुए हैं.

क्या हैं बस संचालकों की मांगें?
बस संचालकों की सरकार से मांग है कि रोड टैक्स, फिटनेस परमिट रिन्युअल, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य मदों में लगने वाली फीस और पेनाल्टी को अगले एक साल के लिए माफ कर दिया जाए. बस संचालकों का कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग के फॉर्मूले तक यात्री किराये को भी दोगुना कर दिया जाए ताकि उनके नुकसान की भरपाई हो सके. बस संचालकों की ये भी मांग है कि पहले 6 महीने का इंश्योरेंस माफ कर दिया जाए और उसके बाद आधी सीट पर ही इंश्योरेंस प्रीमियम लिया जाए. बस संचालक चाहते हैं कि उनके लोक को 6 महीने के लिए आगे बढ़ा दिया जाए और इस पर लगने वाली पेनाल्टी को माफ किया जाए.

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शासन के समक्ष रखेंगे बात 
देहरादून महानगर सिटी बस सेवा महासंघ के अध्यक्ष विजय वर्धन डंड्रियाल ने कहा है कि जब तक बस संचालकों की इन मांगों पर विचार नहीं होता तब तक बस संचालन नहीं होगा. अपनी मांगों को वे पहले ही शासन के सामने रख चुके हैं और इस पर फिर से बात करने को तैयार हैं.

राजधानी देहरादून में थमी है रफ्तार 
सिटी बसें उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आवागमन का अहम साधन हैं. सरकार के SOP जारी करने के बाद भी सिटी बस संचालकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. हालांकि अपनी मांगों को लेकर सिटी बस संचालक आज भी मुलाकात करने वाले हैं, ऐसे में कुछ हल निकलने की उम्मीद है.

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