ZEE Jankari: ऐसा है वाराणसी लोकसभा सीट पर जाति का गणित, जानें कौन है किंगमेकर

2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल की 42 लोकसभा सीटों में से विपक्ष के खाते में सिर्फ़ 3 सीट आई थीं. अमेठी से राहुल गांधी, रायबरेली से सोनिया गांधी और आज़मगढ़ से मुलायम सिंह यादव ही 2014 में चुनाव जीत पाए थे. बाकी 39 सीटें बीजेपी ने जीती थीं.

ZEE Jankari: ऐसा है वाराणसी लोकसभा सीट पर जाति का गणित, जानें कौन है किंगमेकर

अगले दो दिनों तक वाराणसी देश की राजनीति का केंद्रबिंदु बना रहेगा. 25 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में जा रहे हैं और 26 अप्रैल को वो दूसरी बार वाराणसी से अपना नामांकन भरेंगे. इन दो दिनों में आपको इस बात का अंदाज़ा मिल जाएगा कि प्रधानमंत्री मोदी और वाराणसी के रिश्ते में कितनी गहराई है?... कल प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में एक रोड शो करेंगे...कहा जा रहा है कि पिछले पांच सालों में ये उनका सबसे बड़ा रोड शो होगा. प्रधानमंत्री बनने से पहले 2014 में जब नरेंद्र मोदी वाराणसी गये थे, तो उन्होंने कहा था कि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है. तब ये भारत की सबसे high profile seat बन गई थी...और आज भी ये देश का सबसे ख़ास और सबसे चर्चित लोकसभा क्षेत्र है. अब अगले दो दिनों तक पूरा देश.. इस चुनाव को वाराणसी के चश्में से देखेगा.

प्रधानमंत्री मोदी के रोड शो और नामांकन को भव्य बनाने की ज़िम्मेदारी बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने ख़ुद संभाली है. वर्ष 2014 में वाराणसी से नरेंद्र मोदी का चुनाव लड़ने का फ़ैसला बीजेपी के लिये कामयाब दांव साबित हुआ था. इसका असर पूरे पूर्वांचल पर पड़ा था.

2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल की 42 लोकसभा सीटों में से विपक्ष के खाते में सिर्फ़ 3 सीट आई थीं. अमेठी से राहुल गांधी, रायबरेली से सोनिया गांधी और आज़मगढ़ से मुलायम सिंह यादव ही 2014 में चुनाव जीत पाए थे. बाकी 39 सीटें बीजेपी ने जीती थीं. पूर्वांचल के राजनीतिक और जातिगत समीकरण को साधने के लिए बीजेपी ने 2014 में अपना दल से गठबंधन किया, जिसका कुर्मी जाति में अच्छा प्रभाव है. 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल में गठबंधन का विस्तार करते हुए बीजेपी ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन किया था. नतीजा ये हुआ कि यूपी में बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ 325 सीटें जीतकर आज सत्ता में है.

बीजेपी जानती है कि इस बार लोकसभा चुनाव में भी प्रधानमंत्री की ये लोकसभा सीट पूर्वांचल ही नहीं पश्चिम बिहार की 6 सीटों पर बड़ी जीत की गारंटी है. वाराणसी में प्रधानमंत्री मोदी खुली जीप में रोड शो करेंगे. ये रोड शो कल दोपहर 3 बजे शुरू होगा और क़रीब 7 किलोमीटर की दूरी तक चलेगा. BHU गेट पर पण्डित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा को माला पहनाने के बाद प्रधानमंत्री का रोड शो अलग अलग इलाक़ों से होते हुए दशाश्वमेध घाट तक पहुंचेगा, जहां प्रधानमंत्री मोदी, गंगा आरती में शामिल होंगे.

इस रोड शो के अगले दिन...यानी 26 अप्रैल को प्रधानमंत्री के नामांकन में 6 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे, साथ में NDA के नेता भी होंगे. इनमें नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, उद्धव ठाकरे, प्रकाश सिंह बादल, पूर्वोत्तर भारत में NDA के साथी और AIADMK के नेता शामिल हैं.
 
पूर्वांचल में 3 चरणों में मतदान होगा और वाराणसी इसमें सबसे आख़िरी चरण में है. वाराणसी में 19 मई को वोट डाले जाएंगे. 90 के दशक से वाराणसी बीजेपी के लिये एक सुरक्षित सीट मानी जाती है.

वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाराणसी में 5 लाख 81 हज़ार वोट मिले थे. उन्होंने अरविंद केजरीवाल को 2 लाख 9 हजार वोटों से हराया था. वर्ष 2009 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, यहां पर एक लाख 85 हजार वोटों से जीते थे. वर्ष 2004 में इस सीट पर कांग्रेस के राजेश मिश्रा, एक लाख 49 हज़ार वोटों से जीते थे. वर्ष 1991, 1996, 1998 और 1999 में वाराणसी की सीट बीजेपी ने ही जीती थी.

इस बार बीजेपी, वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर बढ़ाना चाहती है. अगर हम वाराणसी के जातिगत समीकरण की बात करें. तो वाराणसी में करीब 3 लाख मुस्लिम वोटर हैं. यहां 3 लाख ब्राह्मण वोटर हैं.
3 लाख से ज्यादा गैर यादव OBC वोटर हैं.
2 लाख से ज्यादा वोटर कुर्मी जाति के हैं.
2 लाख वैश्य वोटर हैं. डेढ़ लाख भूमिहार वोटर हैं. और वाराणसी में एक लाख यादव और एक लाख अनुसूचित जातियों के वोटर हैं.

इन आंकड़ों के बीच ये समझना भी ज़रूरी है कि काशी के मन की बात क्या है? आज हमने आपके लिए प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की एक Ground Report तैयार की है.