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भारत-नेपाल 1950 की मैत्री संधि की समीक्षा पर सहमत

भारत व नेपाल 1950 की भारत-नेपाल मैत्री संधि की ‘समीक्षा, समायोजन व इसे अद्यतन करने’ पर सहमत हुए हैं। इन देशों ने सीमा के मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने का भी फैसला किया है ताकि ‘अनैतिक तत्व’ इसका दुरूपयोग कर दोनों देशों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा नहीं कर सकें।

भारत-नेपाल 1950 की मैत्री संधि की समीक्षा पर सहमत

काठमांडू : भारत व नेपाल 1950 की भारत-नेपाल मैत्री संधि की ‘समीक्षा, समायोजन व इसे अद्यतन करने’ पर सहमत हुए हैं। इन देशों ने सीमा के मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने का भी फैसला किया है ताकि ‘अनैतिक तत्व’ इसका दुरूपयोग कर दोनों देशों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा नहीं कर सकें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय नेपाल यात्रा में दोनों देशों ने पुरानी संधि की समीक्षा पर सहमति जताई है। यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया है,‘दोनों प्रधानमंत्री 1950 की भारत-नेपाल मैत्री संधि और अन्य द्विपक्षीय समझौतों की ‘समीक्षा, समायोजन व उन्हें अद्यतन करने’ पर सहमत हुए हैं।’ बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी तथा नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने हाल ही में संपन्न दोनों देशों के संयुक्त आयोग की बैठक के उस निर्णय का स्वागत किया है जिसमें दोनों देशों के सचिवों को बैठक कर 1950 की संधि की समीक्षा के विशिष्ट प्रस्तावों पर चर्चा का निर्देश दिया गया है।

बयान के अनुसार नेपाल सरकार इन प्रस्तावों को यथाशीघ्र पेश करने को सहमत है। संयुक्त बयान के अनुसार भारत व नेपाल में इस बात पर सहमति है कि मैत्री संधि में वर्तमान वास्तविकताएं अच्छी तरह से परिलक्षित होनी चाहिएं और इसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच बहुआयामी व गहरे संबंधों की भविष्य की दृष्टि के साथ मजबूती होनी चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने मोदी की यात्रा के बारे में प्रेस ब्रीफिंग में कहा,‘भारत चाहता है कि नेपाल इस बारे में अपने सुझाव प्रस्तुत करे ताकि इस मसले का पक्का समाधान निकाला जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि हमें इस मुद्दे को मित्रों की तरह सुलझाना चाहिए।’

मैत्री संधि के वर्तमान प्रावधानों के तहत नेपाल के नागरिकों को भारत में ऐसी सुविधाएं प्राप्त हैं जो किसी अन्य देश के नागरिक को नहीं हैं। वे भारत में भारतीय नागरिकों के बराबर सुविधाएं व अवसर पाते हैं। नेपाल चारों तरफ से दूसरे देशों से घिरा हुआ राष्ट्र है लेकिन इस संधि के चलते उसे अपनी भौगोलिक स्थिति से कोई असुविधा नहीं है। बावजूद इसके लंबे समय से नेपाल की कई सरकारों ने इस संधि की समीक्षा का मुद्दा उठाया है।

मोदी व कोइराला सीमा संबंधी मुद्दे को भी स्थायी रूप से सुलझाना चाहते हैं। दोनों नेताओं ने सीमा पर खंबों के निर्माण व मरम्मत आदि तथा ‘सीमा के बीच के निर्जन क्षेत्र’ को खाली कराने सहित अन्य तकनीकी कार्यों के लिए सीमा कार्य समूह (बीडब्ल्यूजी) गठित करने का स्वागत किया।