कश्मीर में धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं हालात और जनजीवन

कश्मीर में भीषण बाढ़ के ग्यारह दिन बाद धीरे-धीरे जिंदगी सामान्य हो रही है लेकिन बाढ़ से हुए नुकसान का अंदाजा लगाया जाना अभी बाकी है।

कश्मीर में धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं हालात और जनजीवन

श्रीनगर : कश्मीर में भीषण बाढ़ के ग्यारह दिन बाद धीरे-धीरे जिंदगी सामान्य हो रही है लेकिन बाढ़ से हुए नुकसान का अंदाजा लगाया जाना अभी बाकी है।

झेलम नदी और मुख्य नहर में पानी काफी नीचे उतर गया है। तीन दिनों तक इसमें पानी उफान पर रहने से रिहायशी इलाकों में अभूतपूर्व बाढ़ आई थी। कई इलाकों से पानी हट चुका है जबकि श्रीनगर की कई कालोनियों में ओएनजीसी और दमकल विभाग के पंपों के माध्यम से पानी निकाला जा रहा है।

कई क्षेत्र अभी भी पानी में डूबे हुए हैं। खासकर के पुराने शहर में। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ही सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी रूप से रह रहे लोगों को राहत सामग्री भेजी जा रही है। पानी की निकासी का काम जारी है और बाढ़ के कारण अपने घरों को छोड़ कर गए लोग अब नुकसान का जायजा लेने के लिए घरों को लौट रहे हैं। लोगों को एक दूसरे से उनका, रिश्तेदारों और दोस्तों का हालचाल लेते हुए देखा जा सकता है।

हर किसी के पास 6 सितंबर को पानी के कालोनियों और फिर घरों में घुसने को लेकर अपनी अपनी एक कहानी है। गोग्जी बाग के मोहम्मद शाफी ने कहा कि पहले हमने सोचा था कि पानी का स्तर कुछ हद तक ही बढ़ेगा। किसी ने भी अनुमान नहीं लगाया था कि कुछ इलाकों में यह 12 फुट उपर तक चला जाएगा। गोग्जी बाग में पानी की निकासी का काम पूर्ण गति से चल रहा है। वहां खाली किए गए घरों में चोरी होने की भी खबरें हैं।

कई मुख्य सड़कों से पानी उतर गया है और जिन क्षेत्रों से बाढ़ खत्म हो गई है वहां पर सार्वजनिक परिवहन को चालू कर दिया गया है। ऐसी जगहों पर लोगों की गतिविधियां बढ़ी हैं जिससे कई स्थानों पर ट्रैफिक जाम भी हो गया। कुछ महत्वपूर्ण सड़कें जैसे कि हवाईअड्डे को जोड़ने वाली सड़क पर पानी भरा होने के कारण इससे जाना अभी भी दुर्गम है। ऐतिहासिक लाल चौक और बादामी बाग छावनी के आसपास का क्षेत्र अभी भी बाढ़ की चपेट में है। दुकानों के मालिक दुकानें दुबारा खोल रहे हैं। बाढ़ से बच गए सामान को निकालने का वे प्रयास कर रहे हैं।

आवश्यक वस्तुओं जैसे कि सब्जियों और रसोई गैस की उपलब्धता अचानक से कम हो गई थी जो अब धीरे-धीरे सही हो रही है। बिजली और संचार सुविधा भी पहले से बेहतर स्थिति में है। जन जीवन सामान्य होता देख सुरक्षा बल और पुलिसकर्मी भी सड़कों पर कई जगह वापस लौट आए हैं। हालांकि बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन किया जाना अभी बाकी है। यहां पर कई घरों के ढह जाने की खबर है। बाढ़ में मारे गए लोगों की सही संख्या का भी पता लगाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि घाटी में मरने वालों की संख्या 30 से ज्यादा नहीं होगी। उम्मीद की जा रही है कि मरने वालों की जनसंख्या ज्यादा नहीं होगी क्योंकि अधिकांश लोगों को समय रहते सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया गया था। बचाव कार्य में न केवल सेना, अर्धसैनिक बलों और राष्ट्रीय आपदा राहत बल ने काम किया बल्कि स्थानीय लोगों ने भी मदद की। कई ऐसे उदाहरण हैं जहां स्थानीय लोगों ने नावों का प्रबंध किया और लोगों को बाहर निकालने में मदद की। हैदरपोरा के एक व्यापारी नसीर खान ने कहा कि राजबाग में एक प्रसिद्ध चिकित्सक और उनकी पत्नी उनके घर में तीसरे तल और सबसे ऊपर के तल पर फंसे हुए थे। उन्होंने घर छोड़ने से मना कर दिया था। पर हम नाव में उनके पास गए और उन्‍हें घर छोड़ने के लिए मनाया। वे अब पुणे में हैं। नसीर के अनुसार उन्होंने बर्न हॉल स्कूल से एक महिला अध्यापिका को भी बचाया।

राहत सामग्री से भरे ट्रक शहरभर में घूम रहे हैं और लोगों को जरूरी सामान मुहैया करा रहे हैं। श्रीनगर के पुलिस उपायुक्त फारूख शाह ने कहा कि एक राज्य सरकार इतने बड़े स्तर की आपदा से कभी भी नहीं निपट सकती। हम खुद ही असहाय थे, हमारा फोन बंद हो गया था और किसी से संपर्क करने का कोई जरिया नहीं था। उन्होंने कहा कि जल्द ही राज्य सरकार हरकत में आ गई थी और मुख्यमंत्री खुद स्थिति पर नजर रखे हुए थे। लेकिन कई इलाकों में लोग राज्य सरकार से नाराज थे। कुछ ने सेना और एनडीआरएफ को बचाव अभियान के लिए धन्यवाद दिया तो कुछ ने उन्हें कोई श्रेय नहीं दिया। लोगों के बीच मीडिया को लेकर भी गुस्सा है। उनका आरोप है कि मीडिया सही तस्वीर नहीं दिखा रहा है।