डॉ वर्तिका नन्दा 0

जेल में जफर: जिसे न जमीन मिली, न कलम

रंगून में अंग्रेजों की कैद में रहते हुए उन्होंने ढेरों गजलें लिखीं. बतौर कैदी अंग्रेजों ने उन्हें कागज-कलम तक मुहैया नहीं की थी. तब यह क्रांतिकारी शासक कोयले और जली हुई तीलियों से जेल की दीवारों पर गजलें लिखने लगा. दीवार पर लिखी गई उनकी यह मशहूर गजल आज भी खूब याद की जाती है और जिंदगी की हकीकत के करीब है.

Feb 10, 2019, 04:12 PM IST

जेल में तिलक, पत्रकारिता और उनका लेखन

तिलक ने मराठी में मराठा दर्पण और केसरी नाम से दो दैनिक अखबार शुरू किए, जो बेहद लोकप्रिय हुए. इनमें वे अंग्रेजी शासन की क्रूरता और भारतीय संस्कृति को लेकर अपने विचार बहुत खुलकर व्यक्त करते थे.

Feb 5, 2019, 11:11 PM IST