12 नहीं 8 हफ्ते में लगवाना चाहिए एस्ट्राजेनेका का बूस्टर टीका? एक्सपर्ट्स ने दी सलाह

ऑस्ट्रेलियाई तकनीकी सलाहकार समूह एटीएजीआई ने आधिकारिक तौर पर सलाह दी थी कि लोग कोविड-19 से अधिक से अधिक बचाव के लिए 12 हफ्तों में बूस्टर टीका लगवाएं. लेकिन अब इस पर नई बात सामने आई है.

12 नहीं 8 हफ्ते में लगवाना चाहिए एस्ट्राजेनेका का बूस्टर टीका? एक्सपर्ट्स ने दी सलाह
फोटो: Reuters

कैलाघन (ऑस्ट्रेलिया): एस्ट्राजेनेका का बूस्टर टीका लगवाने के लिए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन न्यू साउथ वेल्स में वहां लोगों को प्रेरित करते हुए नजर आए, जहां कोरोना वायरस के ज्यादा मामले हैं. उन्होंने पहला टीका लगवाने के बाद सामान्य तौर पर 12 हफ्तों तक इंतजार करने के बजाय आठ हफ्तों में बूस्टर टीका लगवाने की अपील की.

12 हफ्ते के बजाय 8 हफ्ते में बूस्टर शॉट

टीकाकरण पर ऑस्ट्रेलियाई तकनीकी सलाहकार समूह एटीएजीआई ने आधिकारिक तौर पर सलाह दी थी कि लोग कोविड-19 से अधिक से अधिक बचाव के लिए 12 हफ्तों में बूस्टर टीका लगवाएं लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसे चार हफ्ते पहले ही लगाया जा सकता है. इन परिस्थितियों में निकटवर्ती समय में यात्रा करना या कोविड-19 के संपर्क में आने का खतरा शामिल हैं.

एटीएजीआई और कुछ अन्य टीका विशेषज्ञों की चिंता है कि अगर आप 12 हफ्तों से पहले बूस्टर टीका लगवाएंगे तो आपके शरीर में गंभीर बीमारी से बचाने के लिए पर्याप्त प्रतिरक्षा पैदा नहीं होगी.

स्टडी में सामने आई ये बात

एस्ट्राजेनेका के पहले और दूसरे टीके के बीच 12 हफ्तों का अंतर रखने की सलाह 'द लांसेट' में प्रकाशित एक स्टडी के बाद दी गई थी. इस स्टडी में पाया गया कि पहला टीका और बूस्टर टीका लगवाने के बीच छह हफ्तों से कम का समय रहने से बीमारी के लक्षणों से 55.1 प्रतिशत तक रक्षा होती है.

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इस बीच छह से आठ हफ्तों के अंतर से यह क्षमता बढ़कर 59.9 प्रतिशत और नौ से 11 हफ्तों के बीच 63.7 प्रतिशत हो जाती है. अगर टीकों के बीच का अंतर 12 हफ्तों या उससे अधिक होता है तो यह क्षमता बढ़कर 81.3 प्रतिशत हो जाती है. इसलिए एस्ट्राजेनेका टीके से सबसे बेहतर सुरक्षा पाने के लिए पहले और दूसरे टीके के बीच कम से कम 12 हफ्तों का अंतर रखने की आवश्यकता है.

सिडनी में सार्स-सीओवी-2 के अत्यधिक संक्रामक डेल्टा वैरिएंट के कई मामले आए हैं. हालांकि लांसेट के अध्ययन में डेल्टा वैरिएंट पर आंकड़े शामिल नहीं हैं क्योंकि, उस वक्त इसके मामले नहीं थे, लेकिन अब दुनियाभर में इसके मामले बढ़ रहे हैं.

डेल्टा वैरिएंट पर ये टीका कितना कारगर

डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित होने के बाद एस्ट्राजेनेका की दो खुराक गंभीर रूप से बीमार पड़ने से रक्षा करती है, जबकि एक खुराक इतनी सुरक्षा नहीं करती.

मॉरिसन की एस्ट्राजेनेका का बूस्टर टीका करीब आठ हफ्तों में लगवाने की अपील पूरी तरह हैरान करने वाली भी नहीं है. ब्रिटेन भी अत्यधिक संक्रामक डेल्टा स्वरूप से निपटने के लिए इसी रुख का इस्तेमाल कर रहा है और इसी वैरिएंट के मामले न्यू साउथ वेल्स में बढ़ रहे हैं.

‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया कि एस्ट्राजेनेका टीके की एक खुराक डेल्टा वैरिएंट को खत्म करने वाली एंटीबॉडीज अनिवार्य रूप से पैदा नहीं करती. दो खुराक 95 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी पैदा करती हैं. 

दूसरी बात इसमें पहले और दूसरे टीके के बीच कई अंतरालों का इस्तेमाल किया गया इसलिए हम निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह सकते.

यह कहा जा सकता है कि सिडनी में संक्रमण के मामले बढ़ने पर टीके की एक खुराक डेल्टा स्वरूप के खिलाफ बेअसर है और यह स्पष्ट है कि जल्द से जल्द अधिक से अधिक लोगों को दोनों खुराक देना एक रणनीति है. आठ हफ्तों में दो खुराक देने से कोरोना वायरस के खिलाफ उच्च स्तर की सुरक्षा तो नहीं मिलेगी लेकिन यह गंभीर रूप से बीमार पड़ने से बचाएगा.

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