येदियुरप्पा से विवाद के चलते ये शख्स नहीं बन पाया कर्नाटक का मुख्यमंत्री, जानिए वजह

कर्नाटक में अगले सीएम के नाम का ऐलान हो चुका है, सियासी उलटफेर को देखते हुए हर किसी ने कई नामों की चर्चा सुनी थी. एक वक्त था जब कहा जा रहा था कि रेस में सबसे आगे अरविंद बेलाड का नाम चल रहा है. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर उन्हें क्यों सीएम की रेस से दरकिनार करके बसवराज एस बोम्मई के नाम पर मुहर लगाई गई.

Written by - Ayush Sinha | Last Updated : Jul 27, 2021, 09:19 PM IST
  • कर्नाटक में येदियुरप्पा ने विरोधी को दी मात
  • अरविंद बेलाड को कैसे लगा तगड़ा झटका?
येदियुरप्पा से विवाद के चलते ये शख्स नहीं बन पाया कर्नाटक का मुख्यमंत्री, जानिए वजह

नई दिल्ली: कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के नाम का आज ऐलान हो चुका है. बसवराज एस बोम्मई के नाम पर भाजपा आलाकमान ने मुहर लगा दी है. मंगलवार शाम 7 बजे बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें सीएम के नाम पर चर्चा हुई. कर्नाटक में बी.एस. येदियुरप्पा की जगह बोम्मई को कमान दे दी गई.

अरविंद बेलाड को क्यों नहीं मिली कुर्सी?

वैसे तो कुल 5 नेताओं का नाम रेस में चल रहा था, जिनमें केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी (Pralhad Joshi), कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज एस बोम्मई (Basavaraj Bommai), सीटी रवि (CT Ravi), कर्नाटक के मंत्री मुरुगेश आर निरानी (Murugesh Nirani), विधायक अरविंद बेलाड (Aravind Bellad) और बीएल संतोष (BL Santosh) शामिल थे. लेकिन इन 5 नामों में दो शख्स के नाम को लेकर उलझन थी, जिसमें एक नाम अरविंद बेलाड का था, तो दूसरा बसवराज एस बोम्मई का था.

अब सवाल उठ रहा है कि आखिर अरविंद का नाम आगे चलते-चलते कैसे बोम्मई ने बाजी मार ली? बेलाड का नाम लगभग तय माना जा रहा था, मगर उनकी एक कमी के चलते उन्हें कुर्सी का सुख मिलते-मिलते रह गया.

निश्चित तौर पर जिसे सीएम पद की कुर्सी पर बैठाया जाएगा वो शख्स येदियुरप्पा के रिप्लेसमेंट के तौर पर देखा जाएगा. ऐसे में यदि येदियुरप्पा के विरोधी को उनकी जगह पर बैठा दिया जाता तो पार्टी में टूट जैसी संभावनाएं बन जाती. कर्नाटक में येदियुरप्पा की ताकत का अंदाजा हर किसी को है. लिंगायत समुदाय से आने वाले येदियुरप्पा ने अपने दम पर सरकार बदल दी थी. ऐसे में उनके इस्तीफे के बाद सवाल ये उठ रहा है कि क्या भाजपा उन्हें नजरअंदाज कर पाएगी.

येदियुरप्पा के विरोधी को नहीं मिली कुर्सी

सूत्रों ने दावा किया था कि अरविंद बेलाड का नाम कर्नाटक के मुख्यमंत्री के लिए लगभग तय कर लिया गया, लेकिन इस दावे को येदियुरप्पा ने फेक न्यूज में बदल दिया. आपको यहां जानकर हैरानी होगी कि अरविंद और येदियुरप्पा एक दूसरे के विरोधी हैं. अरविंद भारतीय जनता पार्टी के ही विधायक है, लेकिन फिर भी हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया था. जिसके चलते उनकी परेशानी बढ़ गई.

येदियुरप्पा के बड़े विरोधियों में से एक हुबली-धारवाड़ पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा विधायक अरविंद बेलाड ने हाल ही में ये आरोप लगाते हुए कहा था कि उनका ‘विश्वास’ है कि उनका फोन टैप किया जा रहा है. इतना ही नहीं बेलाड ने ये तक आरोप लगा दिया था कि उनका लगातार पीछा किया जा रहा है.

बेलाड ने मीडिया से बात करते हुए उस वक्त कहा था कि इस मामले में वो विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी और राज्य के गृहमंत्री बसवराज बोम्मई को पहले ही एक विस्तृत पत्र सौंप चुके हैं. उन्होंने कहा था कि 'मैंने इस संबंध में उनसे (बोम्मई और कागेरी) हस्तक्षेप की मांग की है.'

कौन हैं अरविंद बेलाड?

आपको बता अरविंद के पिता चंद्रकांत बेलाड भाजपा से पांच बार विधायक रहे हैं और वह खुद 2013 से विधायक हैं. 3 अगस्त 1969 को जन्मे बेलाद चंद्रकांत बेलाद और लीलावती सी बेलाड के बेटे हैं. वो अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं. उन्होंने एसडीएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, धारवाड़ से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. इतना ही नहीं फ्रांस से उन्होंने व्यवसाय प्रबंधन में अपना पीजीडीएम पूरा किया है.

उन्होंने दावा किया, 'यह सब तब शुरू हुआ जब मुझे कुछ समय पहले युवराज स्वामी का फोन आया. तब से मेरा दृढ़ विश्वास है कि मेरा फोन टैप किया जा रहा है और मेरा लगातार पीछा किया जा रहा है.'

यहां ये समझने की आवश्यकता है कि अगर भाजपा ने येदियुरप्पा के विरोधी अरविंद बेलाड को सीएम इसीलिए नहीं बनाया गया कि आने वाले वक्त में येदियुरप्पा अपनी ही पार्टी के लिए खतरा बन सकते हैं. कर्नाटक में येदियुरप्पा को नजरअंदाज कर पाना बेहद मुश्किल है, या फिर ये कह सकते हैं कि अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने के समान है.

कौन थे येदियुरप्पा की पहली पसंद

मीडिया रिपोर्ट्स ने पहले ही दावा किया था कि कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज एस बोम्मई येदियुरप्पा की पहली पसंद हैं. हाल ही में येदियुरप्पा ने एक बयान में कहा था कि 'बोम्मई कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसआर बोम्मई के बेटे हैं.' हालांकि वो अन्य सवालों से बचते नजर आए थे.

कर्नाटक की राजनीति में लिंगायत समुदाय को नजरअंदाज करके सरकार बनाना रेत से पानी निकालने के समान है. इस समुदाय पर येदियुरप्पा की अच्छी खासी पकड़ है, ऐसे में उन्हें इग्नोर करके उनके धुर विरोधी को यदि भाजपा ने कर्नाटक की कमान देती तो पार्टी को यहां भारी नुकसान हो सकता था.

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