अमेरिका में रह रहे एक भारतीय स्टार्टअप फाउंडर का वीडियो सोशल मीडिया पर इन दिनों लोगों को खूब भावुक कर रहा है. वीडियो में वह बता रहे हैं कि अपनी कंपनी खड़ी करने की कोशिश में वह करीब दो साल से अपने मम्मी-पापा से नहीं मिल पाए हैं. बिजनेस को संभालने के लिए सुबह से देर रात तक काम, लगातार जिम्मेदारियां और हर वक्त कंपनी की चिंता ने उनकी पर्सनल लाइफ को पीछे छोड़ दिया.
ये दुनिया छल से भरी हुई है. इस छल की दुनिया का सबसे बड़ा छल है, इज़राइल का छल. छलते-छलते ये छल एक मुल्क से दूसरे मुल्क के रिश्तों में छल पैदा कर देता है. इज़रायल ने अपने वजूद के साथ ही अपने सबसे क़रीबी दोस्त अमेरिका के साथ इतने छल किए हैं कि भरोसा, दोस्ती, ईमानदारी, वफ़ादारी रिश्ते ये सारे लफ़्ज़ छल के सामने बौने पड़ गए हैं. लेकिन कमाल ये है कि अमेरिका इज़रायल के इन सारे छल से वाक़िफ़ है. मगर मजाल है कि इज़रायल के ख़िलाफ़ क़दम उठा ले. अमेरिका इज़रायल के सामने इतना मजबूर और लाचार क्यों है ? और इज़रायल ने कौन-कौन से बड़े छल किए हैं. आज उसी इज़रायली छल और अमेरिकी मजबूरी को सेंटरस्टेज में डिकोड करेंगे.
अमेरिका के 60 साल पुराने एक गुनाह की सज़ा पूरी दुनिया भुगत रही है, और वही गुनाह अमेरिका एक बार फिर करने जा रहा है. दुनिया की नज़र में एक तरफ पाकिस्तान और क़तर 10 दिन के सीज़फ़ायर की कोशिश में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ़ शिकस्त से बौखलाए अमेरिका और ट्रंप ने अब एक ऐसा ख़तरनाक पासा फेंका है, जो पूरे रीजन को न्यूक्लियर तबाही के मुहाने पर खड़ा कर सकता है. सऊदी अरब को दिया जा रहा न्यूक्लियर तोहफ़ा क्या गल्फ़ को अमन देगा या फिर शिया-सुन्नी फ़साद की एक ऐसी आग को भड़काएगा, जिसे बुझाना किसी के बस में नहीं होगा.
अमेरिका के एक अस्पताल से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हजारों लोगों को हैरान कर दिया. आरोप है कि अस्पताल की एक बड़ी गलती की वजह से दो नवजात बच्चों की अदला-बदली हो गई और दोनों अपने असली माता-पिता की बजाय दूसरे परिवारों में पल-बढ़े. करीब 38 साल तक किसी को इस गलती का पता नहीं चला. अंत में एक साधारण DNA टेस्ट ने ऐसा राज खोल दिया.
ईरान और अमेरिका सीजफायर तोड़ते हुए एक बार फिर जंग में शामिल हो चुके हैं. इसी बीच अमेरिका ने ईरान के पड़ोसी देश इराक और तुर्किये को साधना शुरू कर दिया है. दोनों देशों पर अमेरिका मेहरबान हो रहा है. दोनों से दोस्ती बढ़ा रहा है, लेकिन कहा जाता है कि अमेरिका से दुश्मनी भी उसकी दोस्ती रखने से बेकार है. आइये समझते हैं कि आखिर अमेरिका इन देशों से क्यों दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है, और इसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे?
ईरान और अमेरिका के बीच सीज फायर की हर कोशिश नाकाम हो चुकी है, और दोनों देश एक बार फिर जंग की आग में कूद गए है. एक दूसरे के ठिकानों पर ज़ोरदार हमले कर रहे हैं. इसी बीच अमेरिका ने ईरान के पड़ोसी देश इराक और तुर्किये को साधना शुरू कर दिया है. दोनों देशों पर अमेरिका मेहरबान हो रहा है, लेकिन कहा जाता है कि अमेरिका से दुश्मनी से भी बेकार है दोस्ती रखना. आइये समझते हैं कि आखिर अमेरिका इन देशों से क्यों दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है, और इसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे?
FIFA WORLD CUP 2026: ଆମେରିକା ୨୦୨୬ ଫିଫା ବିଶ୍ୱକପ୍ର ରାଉଣ୍ଡ ଅଫ୍ ୩୨ ମ୍ୟାଚ୍ରେ ବୋସନିଆ ଏବଂ ହର୍ଜେଗୋଭିନାକୁ ୨-୦ ଗୋଲରେ ପରାସ୍ତ କରିଛି। ଏହି ବିଜୟ ସହିତ, ଆମେରିକା ଟୁର୍ଣ୍ଣାମେଣ୍ଟର ପ୍ରି-କ୍ୱାର୍ଟରଫାଇନାଲ୍କୁ ଉନ୍ନୀତ ହୋଇଛି।
इराक़ की बर्बादी से लेकर अफ़गानिस्तान के मलबे तक अमेरिका की तारीख बेगुनाहों के खून और रिसोर्सेज़ की लूट से भरी पड़ी है. अपनी हवस मिटाने के लिए उसने कभी सीरिया की आग को हवा दी तो कभी लीबिया की खुशहाली को तबाही लिखने वालों को उकसाया. लेकिन आज जब वो ईरान के मैदान में अपनी पुरानी चालें चल रहा है, तो उसे ये समझना होगा कि वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता.
Iran US War: सात समंदर पार एक सुपरपावर का गुरूर फ़ारस की खाड़ी की लहरों में डूब रहा है.ट्रंप की धमकियां धरी की धरी रह गईं, और चीन के टैंकरों ने अमेरिकी ब्लॉकेड की धज्जियां उड़ा दीं. आज बात इसी पर कि क्या अमेरिका का सूरज ढलने वाला है?
Iran US War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग फिलहाल रुकी हुई है और पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच आज बातचीत होगी, लेकिन इससे पहले ईरान ने दो ऐसे बड़े दांव चले हैं कि उसके दुश्मन देश देखते ही रह गए.
Iran Defeat America in War: अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्ध विराम अब रणनीतिक टकराव बन गया है. दोनों देश अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. ईरान ने 10 शर्तें रखीं, जिनमें प्रतिबंध हटाना और सेना वापसी शामिल है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है, जिस पर दुनिया की नजर टिकी है.
USA vs Iran: ईरान में F-15E गिरने के बाद अमेरिका ने पायलटों को बचाने के लिए बड़ा रेस्क्यू मिशन चलाया, लेकिन इसमें 11 विमान नष्ट हो गए. हालांकि पायलट सुरक्षित बचा लिए गए, लेकिन यह ऑपरेशन अमेरिका के लिए भारी नुकसान वाला साबित हुआ.
Super air power china: चीन तेजी से अपनी एयर पावर बढ़ा रहा है. मौजूदा समय में 5वीं पीढ़ी के J-20 माइटी ड्रैगन फाइटर जेट की संख्या 200 हो चुकी है. 2030 तक यह संख्या 500 से अधिक हो जाएगी. इसके अलवा J-35 भी तैयार हो जाएगा. अगले 5 साल में 1000 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट से चीनी एयरफोर्स लैस होगी. यह एयर पावर में बड़ा शिफ्ट होगा. जो अमेरिका के लिए बिग थ्रेट होगा.
Chines navy: चीन के टाइप 055 डेस्ट्रॉयर Anqing का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह उन्नत इलेक्ट्रॉनिक माहौल में युद्धाभ्यास करता दिखा. इसके आधुनिक रडार और मिसाइल सिस्टम इसे बेहद ताकतवर बनाते हैं. यह जहाज चीन की नौसैनिक शक्ति बढ़ाकर अमेरिका और जापान के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है.
Iran vs America: ईरान-अमेरिका संघर्ष में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने F-15 और A-10 जैसे अमेरिकी विमानों को निशाना बनाया है. 23 साल बाद अमेरिकी एयरक्राफ्ट को बड़ा नुकसान हुआ है. इस टकराव ने मिडिल ईस्ट में युद्ध के खतरे को और बढ़ा दिया है.
Iran vs America: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज के पास अमेरिकी A-10 विमान गिराने का दावा किया, जिसकी पुष्टि नहीं हुई. साथ ही ईरान में F-15E जेट क्रैश बताया गया, एक पायलट बचा है जबकि दूसरा लापता है. घटना से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा, अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं आई है.
Iran power structure leadership: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध के बीच सबसे बड़ा सवाल है कि ईरान में असली ताकत किसके हाथ में है. सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के पास सर्वोच्च अधिकार हैं, लेकिन IRGC की सैन्य और आर्थिक पकड़ बेहद मजबूत है. राष्ट्रपति की भूमिका सीमित है, जबकि गार्जियन काउंसिल और अन्य संस्थाएं फैसलों को प्रभावित करती हैं. सत्ता कई हिस्सों में बंटी है, जिससे युद्ध और शांति के फैसले जटिल हो जाते हैं और पर्दे के पीछे बड़ा पावर गेम चलता रहता है.
Patriot vs S-400: Patriot और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की तुलना में दोनों की रणनीति अलग है. S-400 लंबी दूरी का एरिया डिफेंस देता है, जबकि Patriot सटीक पॉइंट डिफेंस करता है. यूक्रेन युद्ध में Patriot ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि S-400 को कुछ नुकसान भी झेलना पड़ा.
Middle East War: ईरान की IRGC ने अमेरिका और खाड़ी देशों की 18 बड़ी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है. Apple, Google, Microsoft और Tesla जैसी कंपनियां लिस्ट में हैं. आज रात से हमले की चेतावनी के बाद Middle East में तनाव और सुरक्षा अलर्ट बढ़ गया है.
Iran vs US: अमेरिका ईरान के साथ जंग का खर्च अरब देशों से साझा करना चाहता है. ट्रंप का यह विचार सामने आया है, जबकि शांति वार्ता जारी है. अमेरिका ईरान पर भरोसा नहीं कर रहा और चेतावनी भी दे चुका है, जिससे स्थिति और जटिल बनी हुई है.
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल ईरान के साथ जंग लड़ रहे हैं. ईरान अमेरिकी हमलों के जवाब में मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्यबेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला कर रहा है, जिसमें सऊदी अरब भी शामिल है.
America and China: अमेरिका F-15EX फाइटर जेट का परीक्षण तेज कर रहा है और इसे चीन के करीब कडेना एयर बेस पर तैनात कर रहा है. यह लंबी दूरी, भारी हथियार क्षमता और आधुनिक रडार से लैस है, लेकिन चीन के स्टेल्थ J-20 से मुकाबला चुनौतीपूर्ण रहेगा.