अवैध कॉलोनियां होंगीं नियमित, 40 लाख लोगों को संसद ने दिया फायदा

दिल्ली की अवैध कॉलोनियों में रहने वाले करीब 40 लाख लोगों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है.  बुधवार को संसद में अप्राधिकृत कॉलोनी निवासी संपत्ति अधिकार मान्यता विधेयक, 2019 बुधवार को पारित हो गया.

अवैध कॉलोनियां होंगीं नियमित, 40 लाख लोगों को संसद ने दिया फायदा

नई दिल्लीः शीतकलीन सत्र धड़ल्ले से विधेयकों को पारित करने वाला साबित हो रहा है. बुधवार को संसद में अप्राधिकृत कॉलोनी निवासी संपत्ति अधिकार मान्यता विधेयक, 2019 बुधवार को पारित हो गया. इसके साथ ही दिल्ली की अवैध कॉलोनियों में रहने वाले करीब 40 लाख लोगों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है. ऊपरी सदन में इस विधेयक को पेश किया गया जिसपर चर्चा के दौरान केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को अब विकास के वह सभी लाभ मिल सकेंगे जिनसे अब तक वंचित रहे हैं. चर्चा के बाद विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया.

अंतिम दिसंबर तक हो जाएगी डिजिटल मैपिंग
पुरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 1731 अनधिकृत कॉलोनियों की डिजिटल मैपिंग का काम इस साल 31 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि 11 साल पहले ही शीला सरकार के समय दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों की मैपिंग की प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी. पुरी ने कहा कि 2008 में दिल्ली की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एक अधिसूचना जारी की थी और 760 कॉलोनियों को चिह्नित किया गया.

लेकिन इसके बाद प्रयास धीमे हो गए. वर्तमान की दिल्ली सरकार ने केंद्र को बताया कि जिन एजेंसियों को कॉलोनियों की मैपिंग का काम दिया गया है, वे इसे पूरा नहीं कर पा रही हैं. तब केंद्र सरकार ने राजधानी की 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 40 से 50 लाख लोगों को उनके मकानों का मालिकाना हक देने का फैसला किया.

पोर्टल पर कर सकेंगे रजिस्ट्री का आवेदन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आरडब्ल्यूए को इन पर प्रतिक्रिया देने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा. केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री ने कहा कि इसके बाद स्वामित्व अधिकारों से वंचित लोग इस संबंध में बनाए गए एक अन्य पोर्टल पर रजिस्ट्री के लिए आवेदन कर सकते हैं.

इस विधेयक में इन अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्‍यान में रखते हुए उन्‍हें पॉवर ऑफ अटॉर्नी, विक्रय करार, वसीयत, कब्जा पत्र और अन्‍य ऐसे दस्‍तावेजों के आधार पर मालिकाना हक देने की बात कही गई है जो ऐसी संपत्तियों के लिए खरीद का प्रमाण हैं. इसके साथ ही ऐसी कॉलोनियों के विकास, वहां मौजूद इंस्फ्रास्टक्चर और जन सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रावधान भी विधेयक में किया गया है. 

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विपक्ष ने इसे राजनीतिक पैंतरा कहा
पुरी ने बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) का एक पोर्टल इस संबंध में प्रभाव में आ चुका है जिसमें सारे मैप डाले जाएंगे. करीब 600 मैप तैयार भी हो चुके हैं. बाकी सभी मैप 31 दिसंबर तक पोर्टल पर अपलोड कर दिए जाएंगे. इसके अलावा 50 हेल्प डेस्क भी स्थापित किए जाएंगे और जरूरत के अनुसार, इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी. 

कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के लिए लाए गए विधेयक को राजनीतिक स्टंट करार देते हुए दावा किया कि पांच साल में केंद्र सरकार ने इसकी सुध नहीं ली और दिल्ली विधानसभा के चुनाव करीब आते ही जल्दबाजी में यह विधेयक लाया गया, वहीं सत्ता पक्ष ने इस विधेयक को सरकार के सबका साथ सबका विकास के मूल मंत्र की एक कड़ी बताया.

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