रोशनी एक्ट का गुनाह छिपाने के लिए हंगामा कर रहा है घोटालेबाज गुपकार गैंग

जम्मू कश्मीर में मजहबी कट्टरपंथियों के हाथ मजबूत करने के लिए वहां के कथित राजनेताओं ने कई साजिशें रची. जिसमें से एक है रोशनी एक्ट. जिसकी जांच करने पर पाया गया कि यह एक बड़ा घोटाला है. जिसमें जम्मू कश्मीर के कई बड़े राजनेता शामिल हैं.   

रोशनी एक्ट का गुनाह छिपाने के लिए हंगामा कर रहा है घोटालेबाज गुपकार गैंग

श्रीनगर : गुपकार गैंग की गर्दन जम्मू कश्मीर में फंसती जा रही है. धारा 370 हटने के बाद जिस तरह से घाटी में घोटाले का खुलासा हुआ उसमें सबसे बड़ा घोटाला था रोशनी एक्ट के तहत 25 हज़ार करोड़ की ज़मीन का घोटाला. 

कश्मीर के कई नेताओं के नाम घोटाले में शामिल 
अब इस घोटाले में नए नाम सामने आए हैं, जिसमें गुपकार गैंग में जुड़ी पार्टियों के कई नेताओं के नाम शामिल हैं. इस मामले में जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट में याचिका लगानेवाले अंकुर शर्मा ने बताया कि, "जिस तरह हाईकोर्ट ने आदेश दिया था, उसी की रोशनी में बड़े नामों को सरकार सार्वजनिक कर रही है, और इस घोटाले में अभी और नाम आने बाकी हैं"

 

जम्मू कश्मीर सरकार ने इन सभी नामों को सार्वजनिक कर दिया है और इसमें कई नाम कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं तो कई महबूबा की पार्टी से वहीं फ़ारूक़ अब्दुल्ला की पार्टी के भी कई नेता आरोपियों में शामिल हैं.

जमीन कब्जाने में आगे रहे ये नेता
मुख्य रूप से इस लिस्ट में पीडीपी नेता और पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू का नाम है, उनकी मां शहजादा बानू का नाम है, भाई एजाज़ हुसैन द्राबू का नाम है, एक और भाई इफ़्तिकार अहमद द्राबू का नाम शामिल है. कांग्रेस के नेता और व्यापारी के के आमला ने भी रोशनी एक्ट के तहत ज़मीन कब्ज़ाई, इसके बाद के के आमला की रिश्तेदार रचना आमला, वीना आमला, फकीर चंद आमला का नाम शामिल है.

नेशनल कांफ्रेंस के नेता सैय्यद अखून इस घोटाले में शामिल बताए गए. कांग्रेस के पूर्व मंत्री अब्दुल माजिद वानी, नेशनल कांफ्रेंस के पूर्व नेता असलम गोनी, नेशनल कांफ्रेंस के ही हारून चौधरी, एनसी के पूर्व मंत्री सज्जाद किचलू और तनवरी किचलू.

इसके अलावा कई बिज़नेस मैन और ब्यूरोक्रेट्स के नाम भी इस घोटाले में सामने आए हैं जिन्होंने रोशनी एक्ट के तहत मामूली कीमत में जंगलों की ज़मीन अपने नाम कर ली.

कश्मीर पर इस्लामी कब्जे की साजिश 
रोशनी एक्ट वो एक्ट है जिसकी आड़ में एक साजिश रची गई थी और जम्मू-कश्मीर की आबादी में बदलाव करने का हथियार बनाया गया. सूबे की डेमोग्राफी बदलने की साजिश हुई. जुल्मों सितम के शिकार कश्मीरी पंडितों द्वारा खाली किए गए जमीनों और मकानों को एक खास कानून की आड़ में स्थानीय मुसलमानों को कौड़ियों के दाम में बेच दिया गया. इसमें और भी नाम शामिल हैं.  माना जा रहा है कि ये घोटाला करीब बीस लाख कनाल सरकारी ज़मीन का है जिकी कीमत करीब 25000 करोड़ रुपए आंकी जा रही है.

सबसे बड़ा गुनहगार अब्दुल्ला परिवार
2001 में तत्कालीन नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने रोशनी एक्ट बनाया. जिसके तहत 1999 से पहले के कब्ज़े वाली सरकारी ज़मीन को पैसे लेकर मालिकाना हक़ देने का प्रावधान किया गया. अनाधिकृत सरकारी जमीन को उनके मालिकों को मार्केट वैल्यू पर दी जानी थी. जमीन के बदले मिलने वाले पैसे का बिजली सेक्टर में निवेश होना था. इसीलिए एक्ट का नाम रोशनी एक्ट रखा गया था. 2004 में इस एक्ट में बदलाव कर 1999 से पहले कब्जे की शर्त हटा दी गई. नई व्यवस्था बनी की, जिसके भी कब्जे में सरकारी जमीन है, वो मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकता है.

सरकारी जमीन पर मालिकाना हक देने वाले इसी रोशनी एक्ट के तहत जम्मू में 25 हजार लोग बसाए गए, जबकि कश्मीर में सिर्फ 5 हजार लोग बसाए गए. सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये रही कि हिंदू बहुल जम्मू में जिन 25 हजार लोगों को सरकारी जमीन का कब्जा दिया गया, उनमें 90 फीसदी मुसलमान थे. ये जम्मू के बहुसंख्यक हिंदुओ को माइनॉरिटी में बदलने की साज़िश थी.

जमीन घोटाले की जांच शुरू हुई है तो परत दर परत जो नाम सामने आ रहे हैं, वो उसी गुपकार गैंग से जुड़े हैं. जिन पर देश विरोधी साज़िश करने का आरोप भी लग रहा है. यही लोग धारा 370 हटाए जाने के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर हैं. क्योंकि उन्हें अपने पापों से पर्दा उठने की फिक्र हो रही है. 

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