ग्वालियर में अधिकारियों-मंत्रियों पर लगा रेमडेसिविर की बंदरबांट का आरोप, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

ग्वालियर में रेमडेसिविर का पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद जरूरतमंदों को रेमडेसिविर नहीं मिल पाने की शिकायत दर्ज कराई गई है. जिसकी जांच के आदेश कलेक्टर ने दे दिए हैं. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : May 15, 2021, 06:54 PM IST
ग्वालियर में अधिकारियों-मंत्रियों पर लगा रेमडेसिविर की बंदरबांट का आरोप, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

ग्वालियर: कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे देश को झखझोर कर रख दिया है. कोरोना के कारण हर तरफ हाहाकार मची है. बड़ी संख्या में मरीजों के सामने आने और अस्पतालों में भर्ती होने के बाद ऑक्सीजन सहित जीवनरक्षक दवाओं की कमी हो गई. जिसका फायदा कालाबाजारियों ने जमकर उठाया.

ऐसे में राज्य सरकारों ने ऑक्सीजन और जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी लेकिन इसका भी फायदा नहीं हुआ. ये प्रक्रिया भी लीकप्रूफ नहीं हो सकी. इस व्यवस्था का जिले के अधिकारियों और प्रभारी मंत्रियों ने जमकर फायदा उठाया और अपने हिसाब से रेमडेसिविर इन्जेक्शन सहित अन्य जीवन रक्षक दवाओं की बंदरबांट की गई. ये आरोप ग्वालियर के आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष चतुर्वेदी ने लगाए हैं. और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के संबंध में आवेदन दिया है जिसकी जांच के आदेश ग्वालियर कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने दिए हैं. 

आशीष ने आरोप लगाए हैं कि प्रशासन को बगैर किसी बाधा के Remdesivir और Toclizumab इन्जेक्शन की आपूर्ति हो रही है बावजूद इसके वो आम लोगों और गंभीर मरीजों तक नहीं पहुंच पा रही हैं. इसकी मुख्यवजह प्रशासनिक अधिकारियों नेताओं और मंत्रियों द्वारा इनकी बंदरबांट किया जाना है. 

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से इस बात का ब्यौरा मांगा है कि कितनी संख्या में कौन से इन्जेक्शनों का वितरण फरवरी 2021 से अबतक किन अधिकारियों और नेताओं के माध्यम से किया गया है. इनजेक्शन किस मरीज को किस अस्पताल में कितनी मात्रा में उपलब्ध कराए गए हैं. 

शिकायतकर्ता ने ये भी आरोप लगाया है कि सरकारी अस्पतालों में रेमडेसिविर और टोक्लीजुमैब और फेबीफ्लु दवाओं का स्टॉक जमा कर रखा गया है. अत: फरवरी 2021 से अबतक जय आरोग्य अस्पताल और मेडिकल कॉलेज सहित जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में इन दवाओं की कितनी सप्लाई की गई है उसकी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है. 

कलेक्टर ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जिले के एसपी अमित सांघी एवं ड्रग इन्सपेक्टर दिलीप अग्रवाल को जांच के आदेश दिए हैं. कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी/जमाखोरी को गंभीर प्रवृति और मानव जीवन की रक्षा से जुड़ा बताते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. 

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