close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राम मंदिर ही नहीं, इन तीन प्रमुख मामलों पर भी आ सकता है फैसला

सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं और 18 नवंबर को जस्टिस बोबडे उनकी जगह लेंगे.  इससे पहले अयोध्या मामले में फैसला आ सकता है. इसके अलावा भी तीन बड़े मुद्दे देश में राजनीतिक-सामाजिक महत्व रखते हैं. एक मामले में तो खुद सुप्रीम कोर्ट को अपने ही विषय में वैचारिक फैसला सुनाना है.

राम मंदिर ही नहीं, इन तीन प्रमुख मामलों पर भी आ सकता है फैसला

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई रिटायर होने वाले हैं. आने वाला 17 नवंबर बतौर सीजेआई उनका अंतिम कार्य दिवस होगा. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस तारीख से पहले कई मामलों को उनके फैसले का दिन नसीब हो सकता है. इनमें किसी भी तारीख को राम मंदिर मुद्दे का फैसला आना तो तय है ही, इसके अलावा भी कुछ मामले ऐसे हैं जिनकी सुनवाई सीजआई के समक्ष हुई है. खास बात है कि इन सभी में फैसला ही आना बाकी है, सुनवाई पूरी हो चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी मामलों में फैसला सुरक्षित रख लिया है. कुछ इन खास मसलों पर डालते हैं नजर जो कि आने वाले समय में इतिहास बदल सकते हैं.

क्या सीजेआई ऑफिस RTI के दायरे में आता है?
आने वाले हफ्तों में सुप्रीम कोर्ट की एक संवैधानिक बेंच को यह फैसला भी सुनाना है. सूचना अधिकार कार्यकर्ता कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने सीजेआई ऑफ़िस को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए याचिका दायर की थी. सुभाष चंद्र अग्रवाल का पक्ष रखने वाले वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि अदालत में सही लोगों की नियुक्ति के लिए जानकारियां सार्वजनिक करना सबसे अच्छा तरीका है. प्रशांत भूषण ने कहा, सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति और ट्रांसफ़र की प्रक्रिया रहस्यमय होती है. इसके बारे सिर्फ़ मुट्ठी भर लोगों को ही पता होता है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में पारदर्शिता की जरूरत पर ज़ोर दिया है लेकिन जब अपने यहां पारदर्शिता की बात आती है तो अदालत का रवैया बहुत सकारात्मक नहीं रहता.

प्रशांत भूषण ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति से लेकर तबादले जैसे कई ऐसे मुद्दे हैं जिनमें पारदर्शिता की सख्त जरूरत है और इसके लिए सीजेआई कार्यालय को आरटीआई एक्ट के दायरे में आना होगा. जिस संवैधानिक बेंच को यह फैसला सुनाना है उसमें जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एनवी रामन्ना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल हैं. बेंच की अगुवाई जस्टिस गोगोई ही कर रहे हैं.

सबरीमला मंदिर का फैसला भी आना है
केरल स्थित सबरीमला अय्यपा मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर भी सुप्रीम कोर्ट आख़िरी फ़ैसला सनाना है. हालांकि मामले में 28 सितंबर, 2018 को कोर्ट ने सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश का अधिकारी बना दिया था. लेकिन   फैसले की समीक्षा के लिए फिर से सुप्रीम कोर्ट में 60 याचिकाएं दायर की गईं थीं. 6 फरवरी, 2019 को इन सभी याचिकाओं पर कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. पांच जजों वाली बेंच की अगुवाई भी जस्टिस रंजन गोगोई ने ही की थी.

सबरीमला में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर भारत में काफ़ी लंबी-चौड़ी बहस हुई है. मासिक धर्म से गुज़रने वाली महिलाओं को मंदिर में न जाने दिए जाने को महिलावादी और प्रगतिशील संगठनों ने महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन बताया है. वहीं, कई धार्मिक संगठनों की दलील है कि चूंकि अयप्पा ब्रह्मचारी माने जाते हैं, इसलिए 10-50 वर्ष की महिलाओं को उनके मंदिर में जाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए. 

राफेल मामला भी बन सकता है इतिहास
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई गोगोई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच राफेल सौदा मामले पर फैसला सुनाने वाली है. बेंच में जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ हैं. राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर, 2018 को अपना फैसला सुनाया था और केंद्र सरकार को क्लीन चिट दे दी थी. हालांकि इस फैसले की समीक्षा के लिए अदालत में कई याचिकाएं दायर की गईं और 10 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

फ़्रांस से 36 रफाल फाइटर जेट के भारत के सौदे को चुनौती देने वाली जिन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की, उनमें पूर्व मंत्री अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की याचिकाएं शामिल थीं. सभी याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से उसके पिछले साल के फ़ैसले की समीक्षा करने की अपील की थी.