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लोकनायक के सपनों के भारत के बारे में जानिए वो 5 अनसुनी बातें

सम्पूर्ण क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण की आज 117वीं जयंती है. जेपी के सपनों का आधुनिक भारत कैसा हो इस बारे में बातें जरा कम होती हैं, आइए आपको रू-ब-रू कराते हैं उनकी कुछ अनकही बातें...

लोकनायक के सपनों के भारत के बारे में जानिए वो 5 अनसुनी बातें

नई दिल्ली: बात जब सरकार के खिलाफ खड़े होने के हिमाकत की होती है तो उस कड़ी में बिहार के सारण जिले में 11 अक्टूबर को जन्में लोकनायक जयप्रकाश नारायण अगली कतार में भी सबसे आगे खड़े नजर आते हैं. भारत की आजादी के 27 साल बाद ही इंदिरा सरकार के खिलाफ ‘संम्पूर्ण क्रांति’ का बिगुल फूंकने वाले जनता के ‘जेपी’ के संपूर्ण चिंतन पर किसी का नजर ही नहीं जाता. आधुनिक भारत की तस्वीर जयप्रकाश नारायण के मस्तिष्क में बिल्कुल साफ थी. 5 जून को सम्पूर्ण क्रांति का आहूवान करते हुए जेपी ने कहा था कि “ भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना", शिक्षा में क्रांति लाना,ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकती, क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं, वे तभी पूरी की जा सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था ही बदल दी जाए, और सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लिए क्रांति, सम्पूर्ण क्रांति की जरूरत है.”

आइए आपको बताते हैं जेपी के बारे में कुछ अनकही बातें...

1). लोकनायक के चिंतन में शिक्षा नीति को बहुत अहमियत दी गई है. जेपी का मानना था कि मौलिक, नैतिक और शोधपरक शिक्षा के प्रसार से ही सिद्धांत आधारित सकारात्मक राजनीति की जा सकती है. जेपी की शिक्षा नीति के कुछ तत्व

  • गांधीजी की बुनियादी नीति पर आधारित श्रम-मूलक शिक्षा की बात करते थे जिसमें मेहनत पर परिणाम मिलने के आसार हों.
  • डिग्री धारक शिक्षा से परे पात्रता आधारित शिक्षा पर जोर देते थे जिसमें जिसकी रूचि जिस भी क्षेत्र में हो उसे उस तरीके से गढ़ा जाए.
  • जीवन-उपयोगी शिक्षा की बात जिसमें पाठ्यक्रम में जीवन के प्रयोग आधारित गुणों का समावेश हो
  • विकास-उऩ्मुख शिक्षा पर जोर जिसका फायदा जीवन-स्तर को सुधारने में हो.

2). जेपी के बारे में वो एक बात जो उन्हें सबसे जुदा बनाती है वो है उनकी मानवीय संवेदना इंदिरा गांधी के सत्ता परिवर्तन के बाद उन्होंने अपने समाजवादी करीबियों को इंदिरा के पास भेजा उनका हालचाल लेने के लिए भेजा कि उन्हें और उनके बच्चों को आम-जीवन में कोई तकलीफ तो नहीं.

3). आर्थिक नियोजन पर जेपी के सर्वोदय और ट्रस्टीशीप के सिद्धांत जो गांधी के नीति से प्रभावित था, वे बड़े महत्वपूर्ण हैं, जिसमें समाज के हर तबके तक लाभ पहुंचाया जा सके.

4).  जेपी के राजनीतिक सिद्धांत कांग्रेस से बिल्कुल मेल नहीं खाते थे. शायद यहीं कारण था कि लोकनायक ने सम्पूर्ण क्रांति को पूरी तरह छात्र आंदोलन की तर्ज पर देशव्यापी प्रसार किया. कांग्रेस से अलग हो सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था.

5). अपने पूरे राजनीतिक जीवन के दौरान जेपी इंदिरा को हर बार “माई डियर इंदिरा “ कह कर ही संबोधित करते थे. सम्पूर्ण क्रांति के दौरान वे इंदिरा से जब मिले थे तब जगजीवन बाबू उनकी मध्यस्थता कर रहे थे. उन्होंने कहा भी कि आप आंदोलन से क्या पाएंगे, जयप्रकाश जी देश का तो ख्याल करिए. उन्होंने जवाब दिया, वहीं तो कर रहे हैं.