एक करोड़ रुपये किलो के हिसाब से बिकती है इस जानवर की उल्टी, खासियत जानकर दंग रह जाएंगे

भारत समेत कई देशों में इस उल्टी का व्यापार गैर कानूनी है. लेकिन फिर भी आए दिन इस उल्टी के व्यापार के चक्कर में गिरफ्तार होते रहते हैं.  

Written by - Akash Singh | Last Updated : Jun 13, 2021, 08:35 AM IST
  • अरब देशों में इन उल्टियों की भारी मांग
  • लोग कहते हैं समंदर में तैरता सोना

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एक करोड़ रुपये किलो के हिसाब से बिकती है इस जानवर की उल्टी, खासियत जानकर दंग रह जाएंगे

नई दिल्लीः अगर आपसे कोई कहे कि इस दुनिया में उल्टियों की कीमत करोड़ो में है तो आप शायद यकीन नहीं करेंगे. आपको लगेगा की भला सोने से भी महंगे दाम में उल्टियां कौन खरीद सकता है.

लेकिन, ये सच है. दरअसल, एक जानवर ऐसा है जिसकी उल्टियां एक करोड़ रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकती हैं. हम बात कर रहे हैं स्पर्म व्हेल की.

क्या है कहानी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित जब स्पर्म व्हेल किसी दूसरे समुद्र जीव को खाती है तो इसके पाचनतंत्र से एक खास तरह का स्राव होता है, जिससे शिकार किए जानवर के नुकीले अंग और दांत उसके शरीर को नुकसान न पहुंचा सके. इसके बाद स्पर्म व्हेल इस अवांछित स्राव को उल्टी के जरिये अपने शरीर से निकाल देती है. व्हेल के शरीर से निकलने वाला यह स्राव समुद्र के पानी में तैरता है. इसे एम्बेग्रेस कहते हैं.

फिर समंदर में तैरता है 'सोना'

कुछ लोगों का मानना है कि ये न पचने वाला पदार्थ व्हेल मल के जरिए भी निकालती है. जो सूरज की रोशनी और समुद्र का खारा मिलने के बाद एम्बेग्रेस बनता है.

एम्बेग्रेस अंडाकार या गोल होता है. समुद्र में तैरते रहने के दौरान यह इस तरह का आकार ले लेता है. यह ज्वलनशील पदार्थ है.

स्पर्म व्हेल क्यों पड़ा नाम

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्पर्म व्हेल इस दुनिया में दांतों वाला सबसे बड़ा जीव है. माना जाता है कि स्पर्म व्हेल के सिर पर एक ऐसा अंग होता है, जिसे स्पर्मेसेटी कहते हैं. कहते हैं कि यह व्हेल का स्पर्म होता है. इसलिए इस व्हेल को 'स्पर्म व्हेल' कहते हैं.

परफ्यूम और सेक्स पॉवर बढ़ाने में इस्तेमाल

व्हेल की ये उल्टी परफ्यूम की सुगंध को हवा में उड़ने से रोकता है. एम्बेग्रेस दुर्लभ है और इसीलिए इसकी कीमत भी बेहद ऊंची होती है. इसे समुद्र का सोना या तैरता हुआ सोना भी कहते हैं. बताते हैं कि इस उल्टी का इस्तेमाल कई तरह की दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है. सेक्स पॉवर बढ़ाने के लिए भी जानवर की ये उल्टी खासी कारगर मानी जाती है. अरब देशों में इसकी विशेष मांग होती है.

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भारत समेत कई देशों में बैन, लेकिन...

स्पर्म व्हेल को 1970 में लुप्तप्राय प्रजाति घोषित किया गया था. भारत समेत कई देशों में इस उल्टी का व्यापार गैर कानूनी है. लेकिन फिर भी आए दिन इस उल्टी के व्यापार के चक्कर में गिरफ्तार होते रहते हैं. यही नहीं, इस उल्टी को समंदर के किनारे पहुंचने में सालों का वक्त लगता है.

इसलिए इसका व्यापार करने वाले लोग समंदर के किनारे प्रशिक्षित कुत्तों को रखते हैं, जो इसकी सुगंध पाने के बाद जोर जोर से चिल्लाते हैं. 

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