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  • कोरोना वायरस से ठीक / अस्पताल से छुट्टी / देशांतर मामले: 11,86,203 जबकि मरने वाले मरीजों की संख्या 38,135 पहुंची: स्त्रोत PIB
  • कोविड-19 की रिकवरी दर 65.43% से बेहतर होकर 65.77% पहुंची; पिछले 24 घंटे में 40,574 मरीज ठीक हुए
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  • जो मात्र 400 रुपये की खर्च में एक घंटे के भीतर कोविड-19 संक्रमण का पता लगा सकता है
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  • पिछले एक साल में तीव्र गति से कार्य होने के कारण, J&K में चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल अगले साल तक तैयार हो जाएगा
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  • महिला उद्यमिता और सशक्तीकरण कोहोर्ट ने 11 महिला उद्यमियों को महिलाओं के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए पुरस्कृत किया
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मंगल ग्रह पर खोज करने नासा के साथ जाएगा बिहार का यह लाल

कहते हैं कि "पूत कपूत तो का धन संचय, पूत सपूत तो का धन संचय". बिहार के गोपालगंज जिले के लाल अंशुमान भारद्वाज न सिर्फ अपने माता-पिता का नाम रोशन किया बल्कि देश का नाम भी रोशन किया. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने उन्हें मंगल ग्रह पर एक खास मिशन के लिए भेजने की योजना बनाई है.   

मंगल ग्रह पर खोज करने नासा के साथ जाएगा बिहार का यह लाल

नई दिल्ली: अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह पर कुछ आवश्यक खोज को लेकर एक मिशन भेजने की योजना बनाई है. इस मिशन का नाम 'एक्सोमार्श' दिया गया है. दिलचस्प बात यह है कि नासा के इस मिशन में अनुसंधान टीम में एक भारतीय मूल के युवा वैज्ञानिक को भी शामिल किया गया है, जो मंगल ग्रह पर अमेरिकी मिशन की खोज के लिए निकलने वाले हैं. वह भारत में भी बिहार के रहने वाले हैं, जिसका इतिहास रहा है कि इसने कई विद्वान दिए हैं. 

मंगल पर नासा भेज रहा एक्सोमार्श मिशन

नासा का मिशन एक्सोमार्श मंगल ग्रह पर पानी के तरल अवस्था में बरकारार रहने की संभावनाओं के बारे में पता लगाने के लिए भेजा जा रहा है. विशेष रूप से इसका काम मंगल ग्रह पर वातावरण के जरिए पानी की आवश्यकता को पूरा करने या यूं कहें कि जल को तैयार करने की संभावनाओं पर शोध करना है. इस टीम में भारतीय मूल के नौजवान वैज्ञानिक अंशुमान भारद्वाज ने आखिर यहां तक का सफर कैसे तय किया, आइए जानते हैं. 

बिहार का लाल करेगा भारत और नासा का नाम रोशन

डॉ. अंशुमान भारद्वाज बिहार के गोपालगंज जिले के कटेया प्रखंड के धरहरा गांव के बाशिंदे हैं. प्रारंभिक शिक्षा ज्वाहर नवोदय विद्यालय, बेतिया से करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से बायो मेडिकल से स्नातक की डिग्री पूरी की.

वहीं से जीवन में उभार आया जब भारतीय रक्षा संस्थान डीआरडीओ में वैज्ञानिक के रूप में चयन हुआ. इसके बाद वे स्वीडन चले गए जहां लूलिया यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर के पद पर बहाल कर लिए गए. 

मिशन पर भेजे जाने को तैयार किया जाने लगा है हैबिट उपकरण

डॉ. अंशुमान भारतीय मूल के सबसे कम उम्र के वैज्ञानिक होंगे जो नासा के मंगल मिशन को जाएंगे. हैबिट उपकरण जो इस मिशन पर जाने वाला है, उसका अनुसंधान तकरीबन 14-15 वैज्ञानिकों की टीम कर रही है. इसमें स्पेस के वातावरण के हिसाब से एडजस्टिंग फीचर्स का खास ध्यान रखा जा रहा है. उपकरण से भेजे गए संकेतों को डेटा एनैलिटिक्स के जरिए कोडिंग और डिकोडिंग कर विश्लेषण किया जाएगा. 

पहले भी मंगल पर भेजे जा चुके हैं कई मिशन

इससे पहले अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने इनसाइट लैंडर भी भेजा था जिसका काम था कि मंगल ग्रह पर वातावरण और प्रकृत्ति की शोध कर ली जाए. अब नासा स्वीडन सहित अन्य यूरोपीय देशों के साथ मिल कर मंगल पर मानव जीवन की तमाम संभावनाओं का पता लगाने की कोशिश में लग गई है. अगले साल तक इस मिशन को भेज दिया जाएगा. 

इस मिशन में भारतीय नौजवान वैज्ञानिक की खासी भूमिका चर्चा का केंद्र बनी हुई है. अंशुमान के माता-पिता शिक्षक हैं.