Advertisement
trendingNow,recommendedStories0/zeesalaam/zeesalaam1623991
Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंRamadan 2023: तरावीह क्या है, किन लोगों के लिए यह जरूरी है?

Ramadan 2023: तरावीह क्या है, किन लोगों के लिए यह जरूरी है?

What is traveeh? तरावीह भी नमाज है. यह सिर्फ रमजान के दिनों में इशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है. रमज़ान का चांद नज़र आने के बाद उसी रात से ही इसकी शुरूआत हो जाती है. यह ईद तक जारी रहती है.

Ramadan 2023: तरावीह क्या है, किन लोगों के लिए यह जरूरी है?

What is traveeh? तरावीह एक तरह की नमाज है. यह सिर्फ रमजान के दिनों में ही पढ़ी जाती है. रमज़ान का चांद नज़र आने के बाद रात से ही इसकी शुरूआत हो जाती है और ईद से पहले आखिरी रमज़ान तक पढ़ी जाती है. इसमें 20 रकातें होती हैं. तरावीह की नमाज में इमाम पूरे रमजान में कम से कम एक कुरान पूरी करते हैं.

तरावीह का मतलब

तरावीह अरबी शब्द तरविह से बना है. इसका मतलब होता है ठहरना. 

पूरे रमजान पढ़ी जाती है तरावीह

इस्लाम धर्म में मान्यता है कि रमजान में पूरे महीने इशा की नमाज के बाद 20 रकात तरावीह की नमाज पढ़ी जाए. मान्यता यह भी है कि पूरे रमजान में तरावीह में कम से कम एक कुरान सुनी जाए. इसमें एक इमाम तेज अवाज में कुरान पढ़ता है, बाकी उसके पीछे जितने भी लोग खड़े होते हैं वह सब उसे सुनते हैं. यह दो-दो रकात करके पढ़ी जाती है. हर चार रकात के बाद थोड़े वक्फे के लिए रुका जाता है और खास दुआ पढ़ी जाती है.

Add Zee News as a Preferred Source

मुकम्मल होती है कुरान

पूरे रमजान के दौरान तरावीह में पूरी एक कुरान सुनने का रिवाज है. एक पूरी कुरान खत्म करने के लिए कुछ लोग ऐसा करते हैं कि हर दिन कुरान का एक पारा सुनते हैं. इससे 30 दिन में कुरान मुकम्मल हो जाती है. इसके अलावा कुछ लोग हर दिन कुरान के 6 पारे सुनते हैं. इससे 6 दिन में एक कुरान मुकम्मल हो जाती है. लोग अपनी सहूलत के ऐतबार से ऐसा कर लेते हैं. 

यह भी पढ़ें: Photo: दुनिया भर के मुस्लिम देशों ने किया रमजान का इस्तेकबाल, तस्वीरों में देखें नजारे

जरूरी है तरावीह

तरावीह की नमाज़ सुन्नते मोक्किदा है. अगर किसी बीमारी, सफर या किसी काम की वजह से कोई मुस्लिम इसे नहीं पढ़ पाता है तो यह माफ है लेकिन अगर बिना किसी वजह के इसे छोड़ा जाता है तो गुनाह है. तरावीह की नमाज हर उस मुसलमान के लिए जरूरी है जो स्वस्थ्य है, समझदार है. इसे मर्द और औरत दोनों पढ़ते हैं.

आलोचकों का क्या कहना है?

कुछ लोग तरावीह को बिदअत कहते हैं. बिदअत पैगम्मबर मोहम्मद के बाद रिवाज बन जाने वाली चीजों को कहते हैं.

Zee Salaam Live TV:

About the Author
author img
Siraj Mahi

सिराज माही युवा पत्रकार हैं. देश, दुनिया और मनोरंजन की खबरों पर इनकी अच्छी पकड़ है. ज़ी मीडिया से पहले वह 'ईटीवी भारत' और 'दि संडे पोस्ट' जैसे मीडिया हाउस में काम कर चुके हैं. लिखने-पढ़ने के अलावा ...और पढ़ें

TAGS

Trending news