"मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी, अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं"

Eid Poetry and Message: जल्द ही ईद का त्योहार आने वाला है, इस मौके पर के पर लोग एक दूसरे को मुबारकबाद पेश करते हैं. आज का दौर डिजिटल का है. इस दौर में सभी लोग सोशल मीडिया के ज़रिए एक दूसरे को बधाई देते हैं. बधाइयों का दौर चांद रात के दिन से शुरू हो जाता है. इसलिए हम आपको एक दूसरे

"मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी, अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं"
Image Credit: File PhotoSource: ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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