महिलाएं और ओपन जेल : तिहाड़ से उम्मीद की एक किरण

भारत की जेलों में इस समय करीब 17,000 महिलाएं कैद हैं. इनमें से करीब 6000 आजीवन कारावास पर हैं. देश में महिलाओं के लिए कुल 18 जेलें हैं और सिर्फ 4 जेलें खुली जेलें हैं.

महिलाएं और ओपन जेल : तिहाड़ से उम्मीद की एक किरण

यह कम ताज्‍जुब की बात नहीं है कि देश की सबसे पुरानी जेलों में से एक और दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी जेल तिहाड़ को महिलाओं को ओपन जेल तक लाने में इतने सालों का समय लग गया. यह भी ताज्‍जुब की बात है कि तिहाड़ की खुली जेल में रह रहे मनु शर्मा और सुशील शर्मा जैसे बंदी लगातार चर्चा में रहे और उन्‍हें मिलने वाली सुविधाएं हर बार सवालों के घेरे में आती रहीं, लेकिन महिलाओं की स्थिति को लेकर किसी तरह की गंभीर पहल करने में खुद तिहाड़ भी चूक गया.

असल में जेलों का निर्माण पुरुषों के हिसाब से ही किया गया था. महिला और बच्‍चे बाद में जोड़े. जेलों के मामले में महिलाओं और बच्‍चों की जरूरतें आज भी उतनी प्राथमिकता नहीं पातीं. यही वजह है कि अपनी सजा पूरी होने की कगार पर खड़ी कई महिलाएं अपने अच्छे और सुधरे आचरण के बावजूद खुली जेल में पहुंचने में अयोग्य करार दी जाती हैं. जेल में बंद ये महिलाएं आर्थिक, सामाजिक, शारीरिक, सृजनात्‍मक और यहां तक कि अपने रिश्‍तों के लिहाज से भी अपने आपको कटा हुआ पाती हैं.

भारत की जेलों में इस समय करीब 17,000 महिलाएं कैद हैं. इनमें से करीब 6000 आजीवन कारावास पर हैं. देश में महिलाओं के लिए कुल 18 जेलें हैं और सिर्फ 4 जेलें खुली जेलें हैं. देश की जेलों में करीब 30 प्रतिशत जगह अभी भी खाली पड़ी है. इन्‍हीं जेलों में करीब 1800 बच्‍चे अपनी मां के साथ रहने को मजबूर हैं. य‍ह हिंदुस्‍तान की जेलों का एक बड़ा सच है. भारत के कई राज्‍यों में आज भी महिलाओं के लिए आज भी तेल या शैंपू ले जाना मना है. लेकिन इन जेलों में महिला कैदियों के साथ फैशन शो करने में कभी कोई मनाही नहीं दिखती. जेलों को लेकर हमारा रवैया इस कदर ढीला और नकारात्‍मक है कि देखकर हैरानी होती है.

15 अगस्त से पहले तिहाड़ से 6 महिलाओं का सेमी ओपन जेल तक पहुंचना तकरीबन तय लगता है. यह एक अच्छी खबर है. तिहाड़ के माहनिदेशक अजय कश्यप और उप महानिदेशक एसएस परिहार के निर्देशन में तिहाड़ एक बड़ी मिसाल कायम करने जा रहा है. देश की बाकी जेलों के लिए तिहाड़ को ऐसी नजीर पेश करनी होगी, जो अनुकरणीय हो और सम्माननीय भी.

(डॉ. वर्तिका नन्दा जेल सुधारक हैं. वे देश की 1382 जेलों की अमानवीय स्थिति के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई का हिस्सा हैं. जेलों पर एक अनूठी श्रृंखला- तिनका तिनका- की संस्थापक. खास प्रयोगों के चलते भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति से स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित. दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल. तिनका तिनका तिहाड़ और तिनका तिनका डासना- जेलों पर उनकी चर्चित किताबें.)

(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

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