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बुक लॉन्च : गौर गोपाल दास की किताब ‘जीवन के अद्भुत रहस्य’ का दिल्ली में विमोचन

आज के भागमभाग की जिंदगी में जहां लोगों को खाने से लेकर सोने तक की फुर्सत नहीं है, ऐसे में गौर गोपाल के टिप्स आमलोगों खासकर युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए काफी उपयोगी हैं.

बुक लॉन्च : गौर गोपाल दास की किताब ‘जीवन के अद्भुत रहस्य’ का दिल्ली में विमोचन
दिल्ली में हुआ किताब का विमोचन.

नई दिल्ली : प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु और लाइफ कोच गौर गोपाल दास की किताब ‘जीवन के अद्भुत रहस्य’ का आज दिल्ली के कंस्टिच्यूशन क्लब में विमोचन हुआ. विमोचन समारोह में गौर गोपाल दास, प्रख्यात फिल्म अभिनेत्री-लेखिका दिव्या दत्ता और पेंगुइन इंडिया के लैंग्वेज पब्लिशिंग की एडिटर-इन-चीफ वैशाली माथुर समेत कई लोगों ने हिस्सा लिया. पुस्तक विमोचन के बाद गौर गोपाल दास ने दिव्या दत्ता के साथ एक परिचर्चा में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने जीवन जीने के सम्यक उपायों, तनाव, उत्पादकता, आपसी संबंध और अध्यात्मिक लक्ष्य आदि विषयों पर गहन बातचीत की.

आज के भागमभाग की जिंदगी में जहां लोगों को खाने से लेकर सोने तक की फुर्सत नहीं है, ऐसे में गौर गोपाल के टिप्स आमलोगों खासकर युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए काफी उपयोगी हैं. गौर गोपाल दास ने कहा कि हमें जीवन को किसी भी तरह बिताने या समय काटने की आदत का त्याग कर उसे उत्पादक बनाना चाहिए और देखना चाहिए कि हम उस जीवन में किस तरह से उत्थान कर सकते हैं. इस किताब की शुरुआत गौर गोपाल दास और उनके एक धनी नौजवान मित्र हैरी के एक वार्तालाप से शुरु होती है जो वे मुम्बई की व्यस्त ट्रैफिक से होकर गुजरते हुए करते हैं और जिसमें वे मानवीय परिस्थितिया, जीवन का उद्येश्य और शाश्वत आनंद पर चर्चा हैं.

ये पूछे जाने पर कि उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजिनीयर का पेशा छोड़कर लाइफ कोच बनने का फैसला क्यों किया तो गौर गोपाल दास ने कहा, “जिस तरह जीवन में इलेक्ट्रिकल इंजिनीयर की जरूरत होती है उसी तरह ह्यूमन इंजीनियर की भी जरूरत होती है. उसे हम कमतर नहीं मान सकते. इसलिए मैंने सोचा कि इंसानों में जो गड़बड़ियां हैं, उसे ठीक करने की कोशिश की जाए. ”

गौर गोपाल दास ने कहा कि अक्सर कोई काम करने से पहले हम सोचते हैं कि दूसरा आदमी क्या सोचेगा, जबकि 90 फीसदी मामलों में ये गलत होता है. उन्होंने कहा कि हमने खुद को देखना बंद कर दिया है. हम अक्सर दूसरों के नजरिये से खुद को देखते हैं. यह बड़ी समस्या है. हम सोशल मीडिया पर 5000 दोस्तों के संग तो हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में हमारा एक दोस्त नहीं होता. यह अकेलापन का सबसे बड़ा कारण है. लोग अकेले रहने से घवराते हैं क्योंकि वो एक ऐसा आईऩा है जिसमें खुद का अक्श दिखता है. उन्होंने कहा कि नौजवानों का अकलेपन कृतृम है जबकि बुजुर्गों का अकेलापन वास्तविक है. उस पर ध्यान देने की जरूरत है.  

इस अवसर पर बोलते हुए मशहूर अभिनेत्री और अब लेखिका दिव्या दत्ता ने कहा, “लाइफ्स अमेजिंग सीक्रेट के हिंदी संस्करण के विमोचन के अवसर पर मौजूद रहना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है और मेरे लिए प्रभुजी एक ऐसे व्यक्तित्व की तरह रहे हैं जिनकी प्रेरक बातें हमेशा हमारे चेहरों पर खूबसूरत मुस्कान लाती है और जब आप उनको सुनते हैं तो जिंदगी और खूबसूरत हो जाती है.”

जाहिर है चाहे आप संबंधों में मजबूती तलाश रहे हों या अपनी वास्तविक क्षमता को जानने की कोशिश कर रहे हों या फिर इस पर विचार कर रहे हों कि दुनिया को क्या कुछ लौटाया जा सकता है, गौर गोपाल दास की ये किताब उसे समझाने में अत्यधिक सहायक है.

इस पुस्तक के बारे में पेंगुइन के लैंग्वेज पब्लिशिंग की एडिटर इन चीफ वैशाली माथुर ने कहा, ‘गौर गोपाल  दास जी की यह किताब प्रकाशित करना पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के लिए सम्मान की बात है और यह आश्चर्य की बात नहीं है कि यह जिस दिन से लॉन्च हुई है उसी दिन से बेस्टसेलर रही है. शीघ्र  ही यह किताब यह छह अन्य भारतीय भाषाओँ में भी उपलब्ध होगी. हम बड़ी प्रसन्नता और गौरव के साथ 'जीवन के अद्भुत रहस्य' अपने हिंदी पाठकों को समर्पित कर रहे हैं और आशा करते हैं कि वे भी प्रभु जी के सन्देश को उत्साह से पढ़ेंगे और अपने जीवन में उतारेंगे.”

गौर गोपाल दास दुनिया के अत्यधिक लोकप्रिय सन्यासियों और लाइफ कोचों में से एक हैं जिनके विचारों से दुनिया के लाखों-करोड़ों लोग प्रभावित हुए हैं. उनकी पहली किताब लाइफ्स अमेजिंग सीक्रेट उनके अपने जीवन अनुभवों का सार है जो काफी सरल भाषा में विचारोत्तेज ढंग से लिखी गई है और जीवन जीने के तौर-तरीकों पर बात करती है. गौर गोपाल दास ने पुणे के कॉलेज ऑफ इंजिनीयरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजिनीयरिंग की पढ़ाई की और कुछ समय तक ह्यूलेट पैकर्ड में नौकरी की. उसके बाद उन्होंने मुम्बई के एक आश्रम में रहते हुए सन्यासी का जीवन जीना प्रारंभ किया जहां वह बाइस साल तक रहे और प्राचीन दर्शन और समकालीन मनोविज्ञान की आधुनिकता को समझने का प्रयास करते रहे. उसके बाद वह हजारों-लाखों लोगों के लिए लाइफ कोच बन गए. गौर गोपाल दास सन् 2005 से दुनिया भर की यात्राएं कर रहे हैं और कॉरपोरेट हस्तियों, विश्वविद्यालयों और धर्मादा संस्थानों के साथ अपने विचार साझा कर रहे हैं. सन् 2016 में जब वे इंटरनेट पर आए तो उनकी लोकप्रियता का मानो विस्फोट सा हो गया और सोशल मीडिया पर उनके वीडियो को करोड़ो लोगों ने देखा. गौर गोपाल दास को एमआइटी, पुणे की इंडियन स्टूडेंट पार्लियामेंट ने ‘आइडियल यंग स्प्रिचुअल गुरु’ की उपाधि दी है.