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अपने 85वें जन्मदिन पर नया संस्मरण लॉन्च करेंगे रस्किन बॉन्ड

प्रकाशक ‘फिन बुक्स’ ने एक बयान में कहा,‘यह पहली बार है जब रस्किन बॉन्ड ने देश की आजादी के समय के अपने अनुभवों को शब्दों में पिरोया है. 

अपने 85वें जन्मदिन पर नया संस्मरण लॉन्च करेंगे रस्किन बॉन्ड
मशूहर लेखक रस्किन बांड (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: बच्चों के बीच लोकप्रिय भारतीय लेखक रस्किन बॉन्ड इस साल 19 मई को अपना 85वां जन्मदिन मनाएंगे और इस अवसर पर वह अपने एक संस्मरण का विमोचन भी करेंगे. उनका यह संस्मरण विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है.

‘कमिंग राउंड दी माउंटेन’ शीर्षक वाली इस पुस्तक का आधिकारिक विमोचन वह मसूरी के ‘कैम्ब्रिज बुकस्टोर’ में करेंगे, जहां वह हर हफ्ते सोमवार को अपने पाठकों के लिए पुस्तकों पर दस्तखत करते हैं.

प्रकाशक ‘फिन बुक्स’ ने एक बयान में कहा,‘यह पहली बार है जब रस्किन बॉन्ड ने देश की आजादी के समय के अपने अनुभवों को शब्दों में पिरोया है. यह पुस्तक उस दौर की याद को ताजा करने वाली, दिल को छू लेने वाली और जोश एवं उम्मीदों से लबरेज है. यह एक विशुद्ध क्लासिक रचना है जिसे किताबों के शौकीन और रस्किन बॉन्ड के प्रशंसक जरूर सहेज कर रखना चाहेंगे!’

संस्मरण श्रृंखला की तीसरी पुस्तक
‘कमिंग राउंड दी माउंटेन’ बॉन्ड की बच्चों के लिए लिखी और कई पुरस्कारों से सम्मानित उनकी संस्मरण श्रृंखला की तीसरी पुस्तक है, इसकी अन्य दो पुस्तकें ‘लुकिंग फॉर दी रेनबो’ और ‘टिल द क्लाउड्स’ हैं.

‘लुकिंग फॉर दी रेनबो’ में बॉन्ड ने अपने पिता के साथ बिताए उन दो बरसों का जिक्र किया है. उस वक्त वह नौ साल के थे. ‘टिल द क्लाउड्स रोल बाई’ में उन्होंने पाठकों को अपने जीवन के अचानक बदलते हालातों से रू-ब-रू कराया है. पुस्तक में उन्होंने यह भी जिक्र किया है कि किस तरह से अपनी मां और सौतेले पिता के साथ एकदम नये और कठिनाई भरे जीवन में तालमेल बैठाने की उन्होंने कोशिश की.

भारत विभाजन के दौर की कहानी
अब बॉन्ड के संस्मरण की यह तीसरी पुस्तक आ गई है, जिसमें वह भारत के विभाजन के दौर के समय के 13 साल के एक लड़के की कहानी बताएंगे. उन्होंने कहा, ‘कमिंग राउंड दी माउंटेन’ में मैंने अपने स्कूल के दिनों को याद किया है, खासकर 1947 का वो यादगार साल, जब मेरे जीवन में और मेरे आस-पास कई घटनाएं हुईं. 

उन्होंने कहा, नए दोस्त बने, पुराने दोस्तों को खोने का गम था, देश की आजादी और उसका विभाजन, हर जगह बदलाव हो रहा था... लेकिन मेरे जीवन में एक चीज थी जो हमेशा मेरे साथ बनी हुई थी, वह थी... किताबें और मेरी कल्पना का संसार, जिन्हें मैं कागज पर उतारा करता था. यही वो चीज थी जो बदलती दुनिया में अनिश्चितताओं से भरे जीवन में संभलने का मुझमें आत्मविश्वास भरती.’’ 

बॉन्ड ने कहा,‘मेरे पिता ने हमेशा ही मुझसे कहा, ‘खुद के प्रति हमेशा सच्चा रहो और अगर तुम खुद के प्रति सच्चे रहोगे, तो तुम दूसरों के प्रति भी सच्चे रहोगे’.’